Saubhagya Sundari Vrat: सौभाग्य सुंदरी तीज व्रत से होता है सभी का कल्याण

शास्त्रों के अनुसार सौभाग्य सुंदरी व्रत पूजा में इन मंत्रों का जाप करें। ॐ उमाये नम:। देवी देइ उमे गौरी त्राहि मांग करुणानिधे माम् अपरार्धा शानतव्य भक्ति मुक्ति प्रदा भव॥ इसके बाद पूजा करते समय भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। बेलपत्र, आंकड़े और धतुरा अर्पित करें। रोली-चावल से तिलक करें।
पौराणिक मान्यताओं में तृतीया तिथि माता गौरी अर्थात देवी पार्वती की जन्म तिथि मानी जाती है। यह व्रत सौभाग्यवती स्त्रियों को अखण्ड सौभाग्य व संतान का सुख देना वाला होता है। यह व्रत दांपत्य दोष, विवाह न होना या देर होना तथा मंगली दोष को दूर करता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत सौभाग्य और सौंदर्य प्रदान करता है।
सौभाग्य सुंदरी तीज, जिसे ‘सौभाग्य सुंदरी व्रत’ के नाम से भी जाना जाता है, उत्तरी भारत में विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह पारंपरिक हिंदू पंचांग के ‘मार्गशीर्ष’ महीने में ‘कृष्ण पक्ष’ (चंद्रमा के घटते चरण) की ‘तृतीया’ (तीसरे दिन) को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह दिसंबर से जनवरी के महीनों के बीच पड़ता है। सौभाग्य सुंदरी तीज के दौरान, महिलाएं अपने परिवार के कल्याण और समृद्धि के लिए देवी माँ की विशेष पूजा-अर्चना करती हैं।
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सौभाग्य सुंदरी तीज व्रत का शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष सौभाग्य सुंदरी व्रत 21 मार्च को मनाया जा रहा है।
सौभाग्य सुंदरी व्रत के दिन ऐसे करें पूजा
पंडितों के अनुसार सौभाग्य सुंदरी व्रत सुहागिन स्त्रियों के लिए बहुत खास होता है इसलिए सौभाग्य सुंदरी व्रत करने वाली स्त्री प्रात:काल जल्दी उठकर स्नानादि नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सुहागिन स्त्री इस दिन सोलह श्रृंगार करें। पूजास्थान पर चौकी बिछाकर उसपर भगवान गणेश, देवी पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। एक जल से भरा कलश स्थापित करें। धूप-दीप जलाकर पूजा आरम्भ करें। सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा करें। उनको जल से छींटे लगाये, फिर रोली से तिलक करे, अक्षत लगायें, मोली चढ़ायें, चंदन व सिंदूर लगाये। फिर फूलमाला और फल अर्पित करें। गणेश जी को भोग के साथ सूखे मेवे, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और दक्षिणा भी चढ़ायें। फिर नवग्रह की पूजा करें। भगवान कार्तिकेय की पूजा करें। तत्पश्चात् देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें।
सौभाग्य सुंदरी व्रत पर देवी पार्वती की पूजा करते समय करें इस मंत्रों का जाप
शास्त्रों के अनुसार सौभाग्य सुंदरी व्रत पूजा में इन मंत्रों का जाप करें। ॐ उमाये नम:। देवी देइ उमे गौरी त्राहि मांग करुणानिधे माम् अपरार्धा शानतव्य भक्ति मुक्ति प्रदा भव॥ इसके बाद पूजा करते समय भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। बेलपत्र, आंकड़े और धतुरा अर्पित करें। रोली-चावल से तिलक करें। फल- फूल अर्पित करें। भोग लगायें, सूखे मेवे, और दक्षिणा अर्पित करें। भगवान शिव की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करें, ॐ नम: शिवाय।
उसके बाद माता पार्वती और भगवान शिव की आरती करें। फिर भगवान गणेश, मां पार्वती और भगवान शिव से अपनी गलतियों के लिये क्षमा मांगे। माता पार्वती से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि, “हे माँ मेरे दुखों और पापों का नाश करों। मुझे आरोग्य, सौभाग्य, रिद्धि-सिद्धि और उत्तम संतान प्रदान करों।“ पूजा पूर्ण करने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराये और दक्षिणा देकर संतुष्ट करें। व्रत करने वाली स्त्री इस दिन एक ही समय भोजन करें और एक बार सिर्फ दूध से बनी चीजों का सेवन करें।
सौभाग्य सुंदरी तीज के दौरान की जाने वाली रस्में भी होती हैं खास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सौभाग्य सुंदरी तीज के दिन, महिलाएं सूर्योदय के समय उठती हैं और जल्दी स्नान करती हैं। वे सुहागिन महिलाओं के 16 श्रृंगार करती हैं और अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनती हैं। इन 16 श्रृंगारों में से कुछ हैं: मेहंदी, कुमकुम, चूड़ियाँ, रोली, हल्दी पाउडर, सुपारी, सिंदूर और पायल। सौभाग्य सुंदरी तीज के अवसर पर, सुहागिन महिलाएँ देवी माँ (जो देवी पार्वती का ही एक रूप हैं) की पूजा करती हैं। महिलाएँ भगवान शिव और देवी पार्वती से प्रार्थना करती हैं और सभी पूजा-पाठ विधि-विधान से करती हैं। भगवान और देवी की मूर्तियों को लाल कपड़े से ढका जाता है और एक लकड़ी के आसन पर रखा जाता है। मूर्तियों के सामने एक मिट्टी का दीपक जलाया जाता है और देवी-देवताओं को मोली, रोली, चावल, सुपारी और पान जैसी विभिन्न चीज़ें अर्पित की जाती हैं। देवी पार्वती की मूर्ति को भी 16 श्रृंगारों से सुंदर ढंग से सजाया जाता है।
सौभाग्य सुंदरी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है रोचक
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार महादेव पार्वती वन में गए चलते-चलते गहरे वन में पहुंच गए तो पार्वती जी प्यास बुझाने एक नदी के पास गईं। पार्वती ने पानी की अंजुली भरी तो दुब का गुच्छा, टेसू के फूल, और ढोकला नामक फल आया। इस बात से पार्वती जी के पूछने पर, महादेव जी ने बताया कि, आज तीज है। सारी महिलाएं अपने सुहाग के लिए गौरी उत्सव करती हैं। गौरी जी को चढ़ाए हुए दूब, फूल और अन्य सामग्री नदी में बहकर आ रहे हैं। पार्वती जी ने महादेव जी से प्रार्थना की, आप इन व्रत करने वाली स्त्रियों को सौभाग्य का वरदान दें, महादेव जी ने उन्हें, सौभाग्य का वरदान दिया। इस तरह देवी पार्वती ने विधिपूर्वक ये व्रत रखा और भगवान शिव से अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त किया। इस व्रत के प्रभाव से देवी पार्वती को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई।
जानें सौभाग्य सुंदरी तीज व्रत का महत्व
पंडितों के अनुसार विवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य सुंदरी तीज एक महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा को करने से मिलने वाला पुण्य 'तीज' और 'करवा चौथ' के समान ही होता है। सौभाग्य सुंदरी तीज का त्योहार जीवन में सकारात्मकता और सौभाग्य लाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। महिलाएं एक सदाचारी पति और पुत्रों का आशीर्वाद पाने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ यह पूजा और अनुष्ठान करती हैं। सौभाग्य सुंदरी तीज का व्रत रखने से कोई भी व्यक्ति अपने भाग्य को बेहतर बना सकता है और एक सुखी तथा सफल जीवन व्यतीत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, युवा और अविवाहित कन्याएं भी विवाह संबंधी किसी भी दोष से मुक्ति पाने और विवाह में हो रही देरी को दूर करने के लिए सौभाग्य सुंदरी तीज का व्रत रखती हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है, जो 'मांगलिक दोष' अथवा अपनी कुंडली में ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति से पीड़ित हैं। जब यह व्रत पूर्ण समर्पण भाव से किया जाता है, तो युवा कन्याओं को एक योग्य वर की प्राप्ति होती है और वे एक सुखमय वैवाहिक जीवन का आनंद उठा पाती हैं।
- प्रज्ञा पाण्डेय
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