Women Health: बार-बार लगने वाली भूख और Weight Gain पर कैसे लगाएं लगाम? जानें Mindful Eating टिप्स

Pregnancy Diet Myth
Creative Common License

प्रेग्नेंसी में बढ़ता वेट न सिर्फ महिला की सेहत बल्कि बच्चे की सेहत और डिलीवरी के लिए भी सही नहीं माना जाता है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचने के लिए क्या करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी के समय एक हेल्दी बच्चे के लिए जरूरी होता है कि महिलाएं अपनी डाइट में जरूरी पोषण को शामिल करें। प्रेग्नेंट महिलाओं को अक्सर यह कहा जाता है कि उनको दो लोगों का खाना खाना चाहिए। वहीं इमोशनल, हार्मोनल बदलाव और शारीरिक बदलावों की वजह से प्रेग्नेंट महिलाएं ज्यादा खाने भी लगती हैं। जिस कारण इस दौरान उनका वेट बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी में बढ़ता वेट न सिर्फ महिला की सेहत बल्कि बच्चे की सेहत और डिलीवरी के लिए भी सही नहीं माना जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचने के लिए क्या करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से बचने के टिप्स

एक स्टडी के मुताबिक प्रेग्नेंसी में खाने पर कंट्रोल न करना एंग्जायटी और तनाव को बढ़ाता है। वहीं यह वेट बढ़ने का भी कारण बन सकता है।

इसे भी पढ़ें: Health Tips: पीरियड्स में भी नहीं रुकेगा फैट लॉस, बस डाइट में करें ये छोटे बदलाव

प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स, परिवार का प्रेशर या हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाएं ज्यादा खा लेती हैं। ऐसे में प्रेग्नेंसी में ओवरईटिंग से वेट बढ़ जाता है। इससे हाई बीपी, जस्टेशनल डायबिटीज, एसिडिटी और डिलीवरी के समय जोखिम बढ़ जाता है। इन जोखिमों को कम करने के लिए और ओवरईटिंग से बचने के लिए आप इन टिप्स को फॉलो कर सकती हैं।

इस मिथक से बचें

प्रेग्नेंसी की शुरूआत में गर्भ में पलने वाले बच्चे का आकार एक छोटे बीज या फल के समान होता है। इसलिए उसको अपने लिए भोजन की जरूरत नहीं होती है। आप जो खाती हैं, उससे बच्चे को पोषण मिलता है। प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही तक आप नॉर्मल कैलोरी ले सकती हैं। दूसरी और तीसरी तिमाही में ज्यादा कैलोरी इनटेक लेना चाहिए। हालांकि इसके लिए बहुत खाने की जरूरत नहीं है। भोजन में सिर्फ 300 से 450 ज्यादा कैलोरी सही है।

दिन में 5-6 छोटे मील लेने चाहिए

अगर दिन में एक बार ही पेट भर के खाना खाएंगी, तो गर्भाशय का पेट पर दबाव पड़ेगा। जिस कारण आपको एसिडिटी, ब्लोटिंग और भारीपन महसूस हो सकता है। इसलिए इसकी जगह दिनभर के भोजन को 5-6 छोटे-छोटे मील में बांट लें। हर 2 से 3 घंटे में कुछ हल्का और पौष्टिक खाएं। इससे ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहेगा और अचानक तेज भूख का एहसास भी नहीं होगा।

डाइट में प्रोटीन और फाइबर की बढ़ाएं

फाइबर और प्रोटीन पचने में थोड़ा समय लेते हैं, इससे आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है। प्रोटीन के लिए थाली में दही, उबला अंडा, पनीर, अंकुरित अनाज, दालें और टोंड मिल्क डाइट में शामिल करें। वहीं फाइबर के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, ओट्स और मौसमी फल खाएं।

असली भूख और क्रेविंग में फर्क

प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से तीखा, मीठा या जंक फूड खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है। इस दौरान जब भी कुछ खाने का मन करे, तो 1 गिलास पानी या नारियल पानी पीकर 10 मिनट रुकें। कई बार शरीर डिहाइड्रेशन को भूख समझ लेता है। इसके बाद भी अगर खाने की इच्छा हो, तो भुना चना या मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स खाएं।

प्रोसेस-फूड और सिर्फ कैलोरी से बचना चाहिए

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक कोल्ड ड्रिंक्स, समोसे, मिठाइयां, पिज्जा, बिस्कुट और पैकेटबंद जूस पोषण नहीं होता है। लेकिन इनमें कैलोरी बहुत होती है। इन चीजों के सेवन से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और फिर अचानक लो होता है। इस वजह से आपको थोड़ी देर बाद फिर से भूख लगने लगती है। इसलिए आप प्रोसेस फूड्स या खाली कैलोरी की बजाय घर का हेल्दी और ताजा खाना खाएं।

माइंडफुल ईटिंग

खाना खाते समय माइंडफुल ईटिंग अपनाना चाहिए। खाना खाते समय मोबाइल चलाना, टीवी देखना या किसी एंग्जायटी में रहना ओवरईटिंग की सबसे बड़ी वजह हो सकती है। जब आप बिना ध्यान दिए खाते हैं, तो दिमाग को पेट भरने का सिग्नल देर से मिलता है। इसलिए आराम से बैठकर चबा-चबाकर खाना खाएं। वहीं खाना खत्म करने में कम से कम 15 से 20 मिनट का समय लें।

पर्याप्त नींद है जरूरी

नींद की कमी और तनाव शरीर में कोर्टिसोल और घ्रेलिन जैसे हार्मोन्स को बढ़ा देता है। जोकि भूख को ज्यादा बढ़ाते हैं। इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी और गहरी नींद लेना जरूरी है। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल न करें। इसकी जगह पर मेडिटेशन, हल्का संगीत या डॉक्टर की सलाह पर वॉक करें।

एक रिसर्च स्टडी के मुताबिक नींद की समस्याओं और बिंज ईटिंग के बीच कनेक्शन है। नींद की कमी होने और ज्यादा खाने की आदत मिलकर एक हानिकारक हार्मोनल और मेटाबॉलिक चक्र पैदा कर सकता है। जिसका हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
All the updates here:

अन्य न्यूज़