बाईक नहीं साईकिल... बेटा (बाल कहानी)

By संतोष उत्सुक | Publish Date: Jul 23 2018 3:54PM
बाईक नहीं साईकिल... बेटा (बाल कहानी)

शेखू छठी कक्षा में हुआ तो उसके पापा का ट्रांसफर भी आ गया। नई जगह बिलासपुर काफी दूर थी। पापा ने मम्मी से कहा, आप बच्चों के साथ यहीं रहें ताकि बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब न हो। मैं वहां अकेले रहकर मैनेज कर लूँगा।

शेखू छठी कक्षा में हुआ तो उसके पापा का ट्रांसफर भी आ गया। नई जगह बिलासपुर काफी दूर थी। पापा ने मम्मी से कहा, आप बच्चों के साथ यहीं रहें ताकि बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब न हो। मैं वहां अकेले रहकर मैनेज कर लूँगा। शेखू व छोटी बहन अन्नू ने कहा पापा हम वहां जाकर भी पढ़ाई मैनेज कर लेंगे। मम्मी ने कहा यह तो अच्छी बात है, हम सब एक साथ भी तो रह पाएंगे। पूरा परिवार शिफ्ट होने की तैयारी में लग गया पैकिंग शुरू हो गई। मम्मी चाहती थी बिलासपुर जाकर बच्चों को उसी संस्था के स्कूल में दाखिला मिल जाए जिसमें वे पढ़ रहे थे। संयोग से ऐसा हो गया लेकिन मकान स्कूल के पास नहीं मिला। स्कूल दूर भी था और स्कूल के पास बसें कम थीं, उनके घर तक बस नहीं आती थी।
 
शेखू व अन्नू सरकारी बस से जाते जो स्कूल से थोड़ा पहले उन्हें उतार देती थी। वहां से दोनों पैदल चलते, रास्ते में अन्य विद्यार्थी भी मिल जाते। कभी बस लेट होती या उन्हें तैयार होते देर लग जाती तो पापा उन्हें अपनी कार से छोड़ आते। नए स्कूल में कुछ दिन बीते तो शेखू के नए दोस्त बने। उसने देखा कि कुछ बच्चे स्कूटी या बाइक से स्कूल आते हैं। उसने अन्नू से कहा पापा से बात करते हैं कि उन्हें भी स्कूटी दिला दें ताकि दोनों मज़े से आ जा सकें। पापा से बात हुई, उन्होनें कहा, ‘अभी आप अठ्ठारह साल से कम उम्र के हो, आपका ड्राइविंग लाईसेंस नहीं बन सकता, इसलिए बस से ही आना जाना पड़ेगा'। शेखू का एक सहपाठी जिसके पास बाइक था बोला कि उसकी उम्र भी अठ्ठारह साल नहीं है पर उसके पापा ने उसे बाइक दिला दी है जिसे वह फर्राटे से दौड़ाता है। किसी ने कभी उसे टोका नहीं। सब चलता है। शेखू ने पापा से फिर बात की। पापा ने समझाया कि बेटा बिना लाइसेंस के कोई भी गाड़ी नहीं चलानी चाहिए और यदि कोई उम्र का गलत प्रमाण देकर ड्राइविंग लाईसेंस बनवाता भी है तो गैर कानूनी है। ऐसे व्यक्ति की गाड़ी का यदि एक्सीडेंट हो जाए तो कानूनन बुरी तरह से फंस जाता है। इंश्योरंस क्लेम भी नहीं मिलता।
 
शेखू ने ज़िद करके कहा, पापा मेरे कई दोस्तों के पास स्कूटी भी हैं, बाइक भी। आप मुझे स्कूटी दिला दो। पापा बोले एक शर्त पर। शेखू खुश, उसे लगा काम हो गया, बोला क्या क्या ? पापा बोले यदि स्कूटी चलाते समय तुम में से किसी को चोट लग गई या किसी के साथ एक्सीडेंट हो गया, झगड़ा हो गया तो पूरी ज़िम्मेवारी तुम्हारी होगी। जिनके माता-पिता ने अपने बच्चों को अठ्ठारह साल से पहले बाइक दिलाई है वह ग़लत है ज़रूरी नहीं मैं भी वैसा करूँ। जब आप अठ्ठारह साल के हो जाओगे तो मैं खुद तुम्हारा ड्राइविंग लाईसेंस बनवा कर दूँगा और बाइक भी दिला सकता हूं। शेखू सोच में पड़ गया। उसने अन्नू से बात की। अन्नू ने उसे समझाया, पापा बिलकुल ठीक कह रहे हैं वैसे भी वे गलत बात को स्पोर्ट नहीं करेंगे। कुछ गड़बड़ हो गई तो पापा मदद नहीं करेंगे तो कौन करेगा। शेखू की समझ में आ गया कि अभी हम स्टूडेंट्स हैं हमें स्कूटी या बाइक की ज़रूरत भी क्या है और गलत तरीके से ड्राइविंग लाईसेंस बनवाना ठीक नहीं।


 
शाम को जब सब साथ खाना खा रहे थे तो पापा ने कहा मेरे पास शेखू अन्नू के लिए एक अच्छी ऑफर है। मैं आप दोनों को बढ़िया साइकिलें दिलाना चाहता हूं। जिससे आप दोनों की एक्सरसाइज़ भी होगी, भूख लगेगी, कद बढ़ेगा, स्टैमिना व स्मार्टनेस बढ़ेगी। और तुम स्कूल में होने वाली साइकिल रेस भी जीत सकोगे। सोच कर बता देना। जो सब कर रहे होते हैं ज़रूरी नहीं कि हम भी करें, ज़रूरी है कि जो ठीक हो वही हम करें। अन्नू शेखू ने कहा- यह सचमुच ग्रेट ऑफर है पापा। साइकिल लेने कब जाना है। पापा ने कहा, कल सुबह नाश्ते के बाद।
 
-संतोष उत्सुक

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