आइए आपको बताते हैं मेंढकों की अनोखी प्रजातियों के बारे में

By अमृता गोस्वामी | Publish Date: Jun 26 2017 10:37AM
आइए आपको बताते हैं मेंढकों की अनोखी प्रजातियों के बारे में
Image Source: Google

ब्राजील, अर्जेंटीना और एशिया में सींग वाले मेंढक पाए जाते हैं और दक्षिण अफ्रीका में ऐसे मेंढक देखे जा सकते हैं जो घोड़े की हिनहिनाहट जैसी आवाज निकालते हैं। थाइलैंड में मेंढक की एक प्रजाति ऐसी आवाज निकालती है, जैसे बांसुरी बज रही हो।

बच्चों, आपने मेंढक तो देखा ही होगा। इसे अक्सर पानी वाली जगहों कुएं व बावड़ी के पास या पोखरों के आसपास देखा जा सकता है। बाग-बगीचों में भी ये पाए जाते हैं। बरसात के मौसम में तो मेंढकों को आसानी से देखा जा सकता है। यह एक उभयचर प्राणी है जो पानी तथा जमीन पर समान रूप से रह सकता है। इसके पीछे के पैर की अंगुलियों में झिल्ली पाई जाती है, जो पानी में तैरने में इसकी मदद करती है।

संसार भर में मेंढकों की 5000 से भी अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें कई प्रजातियां तो एकदम अनोखी हैं। दक्षिण अमेरिका में अमेजन नदी के पास चिड़िया के आकार के हरे रंग के मेंढक पाए जाते हैं, जो हरे से लाल और लाल से हरे रंग के हो जाते हैं और साइबेरिया के उत्तरी जंगलों में तो ऐसे मेंढक पाए गए जो गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं। दक्षिण अमेरिका में ही ईक्वाडोर के वर्षावनों में रहने वाले कुछ मेंढक अपनी त्वचा का स्ट्रक्चर भी बदल लेते हैं। ये मेंढक अपनी त्वचा को स्पाइकी से स्मूथ बना लेते हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हें म्यूटेबल रेन फ्रॉग नाम दिया है। 
 
ब्राजील, अर्जेंटीना और एशिया में सींग वाले मेंढक पाए जाते हैं और दक्षिण अफ्रीका में ऐसे मेंढक देखे जा सकते हैं जो घोड़े की हिनहिनाहट जैसी आवाज निकालते हैं। थाइलैंड में मेंढक की एक प्रजाति ऐसी आवाज निकालती है, जैसे बांसुरी बज रही हो।


 
तो दोस्तों, दिलचस्प लगीं न मेंढक की ये प्रजातियां। आईए! आपको मेंढक की ही एक और ऐसी नई प्रजाति से मिलाते हैं जिसका पता हाल ही में वैज्ञानिकों ने लगाया है, जो अंधेरे में चमकता है। अंधेरे में चमकने वाली मेंढक की नई प्रजाति को दक्षिण अमेरिका के अजेंटीना में खोजा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार इस मेंढक की ऊपरी त्वचा पर हरे, पीले और लाल रंग के डॉटस हैं, जो सामान्य रोशनी में तो पोल्का डॉट्स की तरह दिखते हैं किन्तु अंधेरा होने पर गहरे नीले और हरे रंग का प्रकाश उत्पन्न करते हैं। ये मेंढक ज्यादातर पेड़ों पर रहते हैं और प्रकाश के परावर्तन की प्रक्रिया करते हैं, जो दुर्लभ बात है।
 
शोधकर्ताओं के मुताबिक पोल्का डॉट्स वाले नए मेंढक पर जब पराबैंगनी किरणों से युक्त एक फ्लैशलाइट की रोशनी फेंकी गई तो इससे लाल की जगह गहरे हरे और नीले रंग का प्रकाश परावर्तित होने लगा। ये नए मेंढक बाकी किसी भी जानवर की तुलना में बिल्कुल अलग तरीके से परावर्तन प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं। शार्ट तरंगदैर्ध्य पर प्रकाश को अवशोषित करने और लंबे तरंगदैर्ध्य पर उसे परावर्तित करने की यह प्रक्रिया पदार्थों में तो आम है किन्तु जीवों के अंदर यह प्रक्रिया बहुत दुर्लभ होती है। उभयचर जीवों के अंदर तो अभी तक यह गुण देखा भी नहीं गया था। प्रकाश परावर्तन का गुण कई जलीय जीवों कोरल्स, मछलियां, शार्क तथा कछुए की एक प्रजाति में पाया जाता है तथा स्थलीय जीवों में यह एक तोते की प्रजाति और कुछ मकड़ियों में पाया जाता है। 
 


- अमृता गोस्वामी

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप   



Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.