वेनेजुएला के बाद ट्रंप का ईरान प्लान एक्टिव, 24 घंटे में होने वाली है कार्रवाई? खामनेई तो बुरा फंस गए!

पूरे ईरान में यह बात जोर शोर से उठ रही है कि अमेरिका तैरान में घुसकर खामनेई को भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की तरह अगुवा कर सकते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप के हाथ खामेनई तक पहुंच सकते हैं?
ईरान में एक तरफ तो खामनेई के खिलाफ हिंसा अब और तेज भड़क उठी है। जी हां इस हिंसा हिंसक विरोध प्रदर्शन में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात पर काबू पाने के लिए 1200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान सरकार को धमकी के बाद आयतुल्लाह खामे ने ईरान रूस भागने की प्लानिंग पूरी तैयार कर ली है। पूरे ईरान में यह बात जोर शोर से उठ रही है कि अमेरिका तैरान में घुसकर खामनेई को भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की तरह अगुवा कर सकते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप के हाथ खामेनई तक पहुंच सकते हैं?
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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब हिंसक होते जा रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 78 शहरों के 222 से ज्यादा स्थानों पर प्रदर्शन हो चुके हैं। इनमें कम से कम 35 लोगों की मौत हुई है। वहीं 1200 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। 22 साल की महसा अमीरी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद भड़की यह हिंसा 27 राज्यों में फैल गई है। तेहरान की सड़कों पर खामीन विरोधी नारे जोर शोर से गूंज रहे हैं। इस बीच वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और वेनेजुला के राष्ट्रपति माधुरों को बंधक बनाने की कारवाई ने ईरान में हलचल मचा दी है। ऐसे में खामनेई की बेचैनी इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि डोन्ड ट्रंप ने ईरान को सीधे चेतावनी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों पर जुल्म जारी रहा तो ईरान हमला झेलने के लिए तैयार रहे।
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अब सबसे बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि क्या अमेरिका या कोई विदेशी ताकत तेहरान में घुसकर ईरान के सुप्रीम लीडर को अगवा करने की हिम्मत कर सकती है। हालांकि डॉनल्ड ट्रंप की धमकी के बाद खामिनाई से लेकर उनके सलाहकार और विदेश मंत्रालय ने ट्रंप को दखल अंदाजी ना करने की सलाह दी है। ऐसे में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामिनई ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिन लोगों का तर्क था कि देश की समस्याओं का समाधान अमेरिका के साथ बातचीत में है। उन्होंने नतीजे देख लिए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के दौरान अमेरिकी सरकार पर्दे के पीछे से जंग की योजना बनाने में मशगूल थी।
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