America से तनाव के बीच Kim Jong Un का बड़ा दांव, North Korea अब समुद्र में बढ़ाएगा परमाणु ताकत

Kim Jong Un
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Jun 24 2026 10:41PM

किम जोंग उन ने अपने सबसे बड़े युद्धपोत 'चोए ह्योन' को नौसेना में शामिल करते हुए दो और ऐसे पोत बनाने की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य तटीय रक्षा से आगे बढ़कर नौसेना को एक रणनीतिक परमाणु शक्ति बनाना है। उत्तर कोरिया इस सैन्य विस्तार को अमेरिका और दक्षिण कोरिया द्वारा क्षेत्र में बढ़ते तनाव की प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

उत्तर कोरिया एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत को लेकर चर्चा में है। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने नौसेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा में बड़े ऐलान किए हैं। उन्होंने कहा है कि आने वाले पांच वर्षों के भीतर चोए ह्योन जैसे दो और बड़े युद्धपोत तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की योजना तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है।

बता दें कि किम जोंग उन ने यह घोषणा पश्चिमी तटीय शहर नाम्पो में आयोजित एक समारोह के दौरान की। इसी समारोह में उत्तर कोरिया के अब तक के सबसे बड़े युद्धपोत चोए ह्योन को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। मौजूद जानकारी के अनुसार यह युद्धपोत लगभग 5,000 टन क्षमता वाला है और पिछले 14 महीनों से सैन्य परीक्षणों से गुजर रहा था।

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने पिछले वर्ष अप्रैल में इसी श्रेणी के दो युद्धपोतों को लॉन्च किया था। इनमें से एक चोए ह्योन है जबकि दूसरा कांग कोन है। कांग कोन के जलावतरण के दौरान तकनीकी समस्या के कारण वह आंशिक रूप से पलट गया था, जिसके बाद उसकी मरम्मत की गई। अब उत्तर कोरिया ने संकेत दिए हैं कि कांग कोन को भी जल्द नौसेना में शामिल किया जाएगा।

समारोह को संबोधित करते हुए किम जोंग उन ने कहा कि अब उत्तर कोरिया की नौसैनिक क्षमता ऐसी होगी जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक नौसैनिक अड्डों का निर्माण देश की तत्काल आवश्यकता बन चुका है। किम के अनुसार उत्तर कोरिया केवल अपने तटीय क्षेत्रों की रक्षा तक सीमित रहने वाली नौसेना नहीं चाहता, बल्कि उसे रणनीतिक स्तर की सैन्य शक्ति में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार चोए ह्योन युद्धपोत को उत्तर कोरिया के पश्चिमी समुद्री तट की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकारी मीडिया की पूर्व रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इस युद्धपोत में हवाई हमलों से रक्षा करने वाली प्रणालियां, समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाने वाले हथियार तथा परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें मौजूद हैं।

बता दें कि उत्तर कोरिया पिछले कई वर्षों से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का लगातार विस्तार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद प्योंगयांग अपनी सैन्य परियोजनाओं को आगे बढ़ाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने समुद्री सैन्य शक्ति को भी अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया है।

इसी बीच सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की तीन दिवसीय बैठक में भी किम जोंग उन ने राष्ट्रीय रक्षा क्षमता को तेजी से बढ़ाने की नीति दोहराई है। उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ाने का आरोप लगाया। किम का कहना है कि दोनों देशों द्वारा हथियारों के आधुनिकीकरण और सैन्य सहयोग में बढ़ोतरी से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ रहा है।

उत्तर कोरियाई नेतृत्व का दावा है कि ऐसी परिस्थितियों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करना जरूरी है। पार्टी के अधिकारियों ने भी परमाणु बलों के विस्तार को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात से निपटने का सबसे प्रभावी रास्ता बताया है। ऐसे में उत्तर कोरिया के नए सैन्य कदमों पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं।

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