अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच जो बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति पद की लेंगे शपथ, ट्रंप समारोह में नहीं होंगे शामिल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 20, 2021   09:04
  • Like
अभूतपूर्व सुरक्षा के बीच जो बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति पद की लेंगे शपथ, ट्रंप समारोह में नहीं होंगे शामिल

निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होंगे। शपथ ग्रहण कार्यक्रम सुबह करीब 11 बजे शुरू हो जाएगा जिस दौरान गायिका-नृत्यांगना लेडी गागा राष्ट्रगान गाएंगी और अमांडा गोरमैन इस अवसर के लिए लिखी गई एक खास कविता पढ़ेंगी।

वॉशिंगटन। जो बाइडेन बुधवार को अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति जबकि कमला हैरिस उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। ट्रम्प समर्थकों द्वारा कैपिटल हिल (संसद भवन परिसर) पर हाल में हुए हमले के बाद ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर सुरक्षा की बढ़ती चिंताओं के बीच बुधवार को बाइडेन और हैरिस शपथ ग्रहण करेंगे। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स 12 बजते ही (स्थानीय समयानुसार) कैपिटल के वेस्ट फ्रंट में बाइडन को पद की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण का यह पारंपरिक स्थान है जहां नेशनल गार्ड्स के 25 हजार से अधिक जवान सुरक्षा में तैनात रहेंगे। 

इसे भी पढ़ें: पहले 5 मार्च को होता था US के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, फिर 20 जनवरी को क्यों होने लगा इनाॅगरेशन डे? 

निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समर्थकों के हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए इस स्थान को किले में तब्दील कर दिया गया है। बाइडन (78) अपने परिवार की 127 वर्ष पुरानी बाइबिल के साथ शपथ लेंगे। इस दौरान उनकी पत्नी जिल बाइडेन अपने हाथों में बाइबिल लिए खड़ी रहेंगी। अमेरिका के इतिहास में सबसे अधिक उम्र के राष्ट्रपति बनने जा रहे बाइडेन शपथ ग्रहण के तुरंत बाद राष्ट्रपति के तौर पर देश के नाम अपना पहला संबोधन देंगे। ऐतिहासिक भाषण भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक विनय रेड्डी तैयार कर रहे हैं, जो एकता और सौहार्द पर आधारित होगा। हैरिस (56) पहली महिला, पहली अश्वेत और पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनकर इतिहास रचेंगी। उन्हें सुप्रीम कोर्ट की पहली लैटिन सदस्य न्यायमूर्ति सोनिया सोटोमेयर पद की शपथ दिलाएंगी। 

इसे भी पढ़ें: जो बाइडेन के शपथ समारोह में हो सकता है हमला, FBI रख रही पैनी नजर 

सोटोमेयर ने बाइडेन को 2013 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई थी। वह दो बाइबिल को लेकर शपथ लेंगी जिसमें एक निकट पारिवारिक मित्र रेगिना शेल्टन की होगी और दूसरी देश के पहले अफ्रीका मूल के अमेरिकी सुप्रीट कोर्ट के न्यायाधीश थुरगूड मार्शल की होगी। इस वर्ष सत्ता हस्तांतरण अपने विवादों को लेकर याद किया जाएगा। चुनावों के बाद सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया शुरू हो जाती थी लेकिन निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तीन नवंबर के चुनाव परिणाम को अस्वीकार करने के बाद यह कई हफ्ते बाद शुरू हुआ है। ट्रंप ने कहा है कि वह शपथ ग्रहण में शामिल नहीं होंगे। शपथ ग्रहण कार्यक्रम सुबह करीब 11 बजे शुरू हो जाएगा जिस दौरान गायिका-नृत्यांगना लेडी गागा राष्ट्रगान गाएंगी और अमांडा गोरमैन इस अवसर के लिए लिखी गई एक खास कविता पढ़ेंगी। अभिनेत्री-गायिका जेनिफर लॉपेज भी इस दौरान प्रस्तुति देंगी।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सड़क किनारे हुए बम धमाके में पांच लोगों की मौत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   13:17
  • Like
पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सड़क किनारे हुए बम धमाके में पांच लोगों की मौत

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान में फिर फटा शक्तिशाली बम फटने से पांच लोगों की मौत हो गई। धमाका टंडोरी इलाके के सिबी कस्बे से 30 किलोमीटर दूर एक स्थान पर हुआ। सिबी के उपायुक्त सैयद जाहिद शाह ने कहा कि धमाके में पांच मजदूरों की मौत हो गई जबकि पांच अन्य घायल हो गए। इनमें सुरक्षा कर्मी भी शामिल है।

क्वेटा । पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में ट्रक के सड़क किनारे हुए बम धमाके की चपेट में आने से उसमें सवार पांच निर्माण मजदूरों की मौत हो गई और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार शाम हुए इस बम धमाके की किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है। धमाका टंडोरी इलाके के सिबी कस्बे से 30 किलोमीटर दूर एक स्थान पर हुआ। सिबी के उपायुक्त सैयद जाहिद शाह ने कहा कि धमाके में पांच मजदूरों की मौत हो गई जबकि पांच अन्य घायल हो गए। इनमें एक सुरक्षा कर्मी भी शामिल है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




‘कोवैक्स’ कार्यक्रम के तहत श्रीलंका को मिला ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीका

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   12:23
  • Like
‘कोवैक्स’ कार्यक्रम के तहत श्रीलंका को मिला ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीका

‘कोवैक्स’ एक वैश्विक पहल है जिसके तहत आय के स्तर को नजरअंदाज कर सभी देशों को त्वरित और समान रूप से कोविड-19 का टीका देने का प्रयाय किया जा रहा है।

कोलंबो। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ‘कोवैक्स’ कार्यक्रम के तहत ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीके की 2,64,000 खुराकों की पहली खेप रविवार को श्रीलंका पहुंची। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ‘कोवैक्स’ एक वैश्विक पहल है जिसके तहत आय के स्तर को नजरअंदाज कर सभी देशों को त्वरित और समान रूप से कोविड-19 का टीका देने का प्रयाय किया जा रहा है।

इसे भी पढ़ें: इस देश में 30 लाख के पार हुई कोरोना संक्रमण की संख्या, नए स्ट्रेन का बढ़ रहा प्रकोप

श्रीलंका की मंत्री डॉ सुदर्शिनी फर्नांडोपुले ने बताया कि कोरोना वायरस टीके की पहली खेप रविवार को श्रीलंका पहुंची। उन्होंने कहा, “कोवैक्स कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय को आज कोविड-19 टीके की 2,64,000 खुराकें मिलीं।” यूनिसेफ ने एस्ट्राजेनेका टीके की पहली खेप श्रीलंका तक पहुंचाई।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




म्यांमा की सैन्य सरकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए बढ़ रहा वैश्विक दबाव

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   11:28
  • Like
म्यांमा की सैन्य सरकार पर प्रतिबंध लगाने के लिए बढ़ रहा वैश्विक दबाव

अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है कि वह म्यांमा की सैन्य सरकार पर और अधिक प्रतिबंध लगाए। कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि दमनकारी सरकार के संसाधनों और उसे मिलने वाले धन के स्रोत में कटौती कर दबाव बनाया जा सकता है।

बैंकाक। म्यांमा में एक फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के विरोध में बढ़ते जनाक्रोश पर की जा रही हिंसक कार्रवाई के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है कि वह म्यांमा की सैन्य सरकार पर और अधिक प्रतिबंध लगाए। इसके साथ ही कई देश इस बारे में भी विचार कर रहे हैं कि वैश्विक निंदा के आदी हो चुके म्यांमा के सैन्य अधिकारियों को किस प्रकार हटाया जाए। महामारी के कारण पहले से ही आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है ऐसे में उन्हें नुकसान पहुंचाए बिना म्यांमा की सैन्य सरकार को अपदस्थ करने की चुनौती और बढ़ गई है। फिर भी, कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि दमनकारी सरकार के संसाधनों और उसे मिलने वाले धन के स्रोत में कटौती कर दबाव बनाया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र के विशेष राजनयिक क्रिस्टीन एस. बर्गनर ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद से आग्रह किया था कि सैन्य सरकार के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। बर्गनर ने कहा था, “सामूहिक कार्रवाई अनिवार्य है। हम म्यांमा की सेना को कितनी छूट दे सकते हैं?” 

इसे भी पढ़ें: म्यांमा में घटनाक्रम पर करीबी नजर हैं, सभी मुद्दे शांतिपूर्ण तरीके से सुलझने चाहिए : विदेश मंत्रालय

संयुक्त राष्ट्र द्वारा समन्वित कार्रवाई करना कठिन है क्योंकि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रूस और चीन इस पर वीटो कर सकते हैं। इसके साथ ही म्यांमा के पड़ोसी देश, उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार और निवेश के स्रोत वाले देश प्रतिबंधों के खिलाफ हैं। शांतिपूर्ण कार्रवाई के भी कुछ प्रयास किए गए हैं जिसके तहत अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने म्यांमा की सेना, उनके परिजनों और सैन्य सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं पर प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि म्यामां सेंट्रल बैंक में रखी एक अरब डॉलर से अधिक की राशि को निकालने के म्यांमा की सेना के प्रयासों को अवरुद्ध कर दिया गया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के विशेष अधिकारी थॉमस एंड्रयूज ने पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट में कहा था कि सैन्य सरकार के ज्यादातर आर्थिक हितों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। कुछ देशों ने म्यांमा को दी जाने वाली सहायता पर भी रोक लगा दी है और विश्व बैंक ने कहा है कि उसने भी वित्तपोषण रोक दिया है तथा सहायता कार्यक्रमों की समीक्षा की जा रही है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept