परंपरागत भारतीय रंगोली के साथ होगी बाइडेन-हैरिस के शपथग्रहण समारोह की शुरुआत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 17, 2021   10:24
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परंपरागत भारतीय रंगोली के साथ होगी बाइडेन-हैरिस के शपथग्रहण समारोह की शुरुआत

बाइडन-हैरिस के शपथग्रहण समारोह की शुरुआत पवित्र कोलम रंगोली से होगी।विभिन्न समुदायों के सभी आयुवर्ग के लोगों ने पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी रंगोलियां बनाने की इस पहल में अपने-अपने घर से भाग लिया।

वाशिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन और नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के शपथ ग्रहण से जुड़े ऑनलाइन समारोह की शुरुआत परंपरागत भारतीय रंगोली के साथ होगी। रंगोली को तमिलनाडु में कोलम के नाम से जाना जाता है। घर के द्वार पर इसे बनाना शुभ माना जाता है।हैरिस की मां मूल रूप से तमिलनाडु की रहने वाली थीं। रंगोली के हजारों डिजाइन बनाने के लिए अमेरिका और भारत के 1,800 से अधिक लोगों ने इस ऑनलाइन पहल में हिस्सा लिया।

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इस पहल में भाग लेने वाली मल्टीमीडिया कलाकार शांतिचंद्रशेखर ने कहा, ‘‘ कईलोगों का मानना है कि कोलम सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक है। विभिन्न समुदायों के सभी आयुवर्ग के लोगों ने पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से बनी रंगोलियां बनाने की इस पहल में अपने-अपने घर से भाग लिया। स्थानीय स्तर पर शुरू की गई यह पहल हमारी उम्मीदों से अधिक बड़ी बन गई।’’ शुरुआत में इसे व्हाइट हाउस के बाहर बनाया जाना था। बाद में इसे कैपिटल हिल के बाहर बनाने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन वाशिंगटन डीसी में सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंधों के कारण यह अनुमति रद्द कर दी गई। इसी कारण बाइडन और हैरिस का स्वागत करने के लिए रंगोली के हजारों डिजाइन को एक वीडियो में सजाया गया, ताकि अमेरिका की बहु सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया जा सके। ‘इनॉगरेशन कोलम 2021’ आयोजन दल की सदस्य सौम्या सोमनाथ ने कहा कि स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों की मंजूरी के बाद इसे प्रदर्शित किये जाने की तारीख तय की जाएगी।





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द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की जिम्मेदारी भारत की: इमरान खान

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   19:39
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द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की जिम्मेदारी भारत की: इमरान खान

भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बृहस्पतिवार को संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि वे नियंत्रण रेखा पर और अन्य सेक्टरों में संघर्ष विराम समझौते का कड़ाई से पालन करेंगे।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के साथ संघर्ष विराम समझौते का शनिवार को स्वागत किया और कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए “अनुकूल वातावरण” बनाने की जिम्मेदारी नयी दिल्ली की है। भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बृहस्पतिवार को संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि वे नियंत्रण रेखा पर और अन्य सेक्टरों में संघर्ष विराम समझौते का कड़ाई से पालन करेंगे। इसके बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए खान ने कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ “सभी लंबित मुद्दों” का समाधान बातचीत के जरिये करने को तैयार है। 

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उन्होंने ट्वीट किया, “नियंत्रण रेखा पर फिर से संघर्ष विराम स्थापित करने का मैं स्वागत करता हूं। इसमें आगे की प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की जिम्मेदारी भारत की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीरी लोगों द्वारा अपने निर्णय खुद करने की उनकी बहुप्रतीक्षित मांग और अधिकार के लिए भारत को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।” खान ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, “हम हमेशा शांति चाहते हैं और सभी लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिये निकालने को तैयार हैं।” पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायु सेना द्वारा 2019 में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविरों पर हवाई हमला किया गया था। इस हमले की दूसरी सालगिरह के अवसर पर सिलसिलेवार ट्वीट कर खान ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है और सभी लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिये करना चाहता है। 

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उन्होंने कहा कि पकड़े गए भारतीय पायलट को वापस कर पाकिस्तान ने दुनिया को अपना “जिम्मेदाराना बर्ताव” दिखाया है। कश्मीर के मुद्दे पर खान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीरी लोगों द्वारा अपने निर्णय खुद करने की उनकी बहुप्रतीक्षित मांग और अधिकार के लिए भारत को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि भारत पाकिस्तान से कह चुका है कि उसके अंदरूनी मामलों में टिप्पणी करने का पड़ोसी देश को कोई अधिकार नहीं है। इसके साथ ही भारत ने कहा है कि जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख संघ शासित क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा थे और रहेंगे।





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म्यांमा में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए: भारत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   14:55
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म्यांमा में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए: भारत

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने म्यांमा की स्थिति पर महासभा की अनौपचारिक बैठक में शुक्रवार को उक्त टिप्पणी की। म्यांमा में इस महीने के शुरू में सेना ने तख्तापलट कर दिया था।

संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कहा कि म्यांमा में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए और हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए। साथ में उसने दक्षिण पूर्व एशियाई देश के नेतृत्व से शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से अपने मतभेदों को हल करने के लिए मिलजुलकर काम करने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने म्यांमा की स्थिति पर महासभा की अनौपचारिक बैठक में शुक्रवार को उक्त टिप्पणी की। म्यांमा में इस महीने के शुरू में सेना ने तख्तापलट कर दिया था। 

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उन्होंने कहा, “भारत म्यांमा के साथ जमीन और समुद्री सीमा साझा करता है और उसका शांति और स्थिरता बनाए रखने में सीधा हित है। इसलिए म्यांमा के हालिया घटनाक्रम पर भारत करीब से निगाह रख रहा है। हम इस बात पर चिंतित हैं कि लोकतंत्र की दिशा में म्यांमा में पिछले दशकों में हासिल की गई बढ़त को कमतर नहीं किया जाना चाहिए।“ तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत का मानना है कि कानून का शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखा जाना चाहिए, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाना चाहिए तथा शांति कायम रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम म्यांमा के नेतृत्व से आह्वान करते हैं कि वे अपने मतभेदों को शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से सुलझाने के लिए मिलकर काम करें। एक फरवरी को सेना ने म्यांमा की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर दिया था और सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। इसी के साथ स्टेट काउंसलर आंग सांग सू ची, राष्ट्रपति यू विन मिन्त और अन्य शीर्ष राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। तिरुमूर्ति ने कहा, लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करना म्यांमा में सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए। 

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उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस महत्वपूर्ण मोड़ पर म्यांमा के लोगों को अपना रचनात्मक समर्थन देना चाहिए। इस बीच संयुक्त राष्ट्र में म्यांमा के राजदूत ने देश की सेना की अवहेलना करते हुए शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा से सैन्य तख्तापलट को खत्म करने में मदद के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की गुहार लगाई। के एम तुन बेदखल कर दी गई असैन्य सरकार के प्रति वफादार रहे। उन्होंने कहा कि वह एनएलडी नीत असैन्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। तुन ने तख्तापलट की निंदा की और सभी सदस्य राष्ट्रों और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वे सैन्य तख्तापलट की निंदा करें और सैन्य शासन को किसी भी माध्यम से मान्यता न दें।

न्होंने तीन उंगलियों से सलाम किया जो सैन्य शासन के खिलाफ म्यांमा में प्रदर्शनकारी कर रहे है और कहा, “ हम उस सरकार के लिए लड़ाई जारी रखेंगे जो जनता की, जनता द्वारा और जनता के लिए हो।“ म्यांमा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत क्रिस्टीन एस बर्गनर ने महासभा से सामूहिक रूप से म्यांमा में लोकतंत्र के समर्थन में एक स्पष्ट संकेत भेजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “इस समय, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को किनारे कर दिया गया है और स्टेट काउंसेलर तथा संघीय गणराज्य के राष्ट्रपति सहित निर्वाचित नेताओं को हिरासत में रखा गया है।“ 

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म्यांमा के रखाइन राज्य में विस्थापित लोगों के मुद्दे पर अपने संबोधन में तिरूमूर्ति ने कहा कि विस्थापित लोगों की देश वापसी के मुद्दे को हल करने में भारत का सबसे ज्यादा हित है, क्योंकि वह एकमात्र ऐसा देश है जिसकी बांग्लादेश और म्यांमा, दोनों के साथ एक लंबी सरहद है।





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सीरिया हवाई हमले पर सामने आया व्हाइट हाउस का बयान, अमेरिकी कर्मियों को लेकर कही यह अहम बात

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   14:46
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सीरिया हवाई हमले पर सामने आया व्हाइट हाउस का बयान, अमेरिकी कर्मियों को लेकर कही यह अहम बात

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा, ‘‘ राष्ट्रपति स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि वह अमेरिकियों के हितों की रक्षा करने के लिए कदम उठाने जा रहे हैं और जब खतरा होगा तो वह सही समय पर अपने हिसाब से कदम उठाएंगे।’’

वाशिंगटन। व्हाइट हाउस ने कहा है कि सीरिया में हवाई हमले कर राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अमेरिकी कर्मियों एवं ठिकानों की रक्षा की तथा ‘आने वाले हफ्तों में’ सभांवित और हमलों के खतरों को टाला है। उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को अमेरिका ने हवाई हमले में ताकतवर ईरान समर्थित इराकी सैन्य समूहों के सीरिया स्थित ठिकानों को निशाना बनाया जिसमें एक लड़ाके के मारे जाने एवं कई के घायल होने की खबर है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ राष्ट्रपति स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि वह अमेरिकियों के हितों की रक्षा करने के लिए कदम उठाने जा रहे हैं और जब खतरा होगा तो वह सही समय पर अपने हिसाब से कदम उठाएंगे।’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘वह (बाइडेन) इन कदमों को विचारशील तरीके से उठाएंगे और इसका उद्देश्य सीरिया और इराक के बीच तनाव कम करना है।’’ इस हवाई हमले के, ईरान के साथ दोबारा शुरू होने वाली वार्ता पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर साकी ने कहा कि इस समय स्थिति यह है कि अमेरिका इन कूटनीतिक वार्ताओं के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस समय यूरोप ने आमंत्रण दिया है और ‘हम जवाब का इंतजार कर रहे हैं।’’ सीरिया पर हवाई हमले की वैधानिकता के सवाल पर साकी ने कहा कि यह घरेलू कानून का मामला है जिसके तहत राष्ट्रपति अमेरिकी कर्मियों की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठा सकते हैं।





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