अमेरिका को चुभता BRICS, भारत के लिए कितना फायदेमंद?

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अभिनय आकाश । Sep 10 2026 8:39PM

बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जरा 1947 से लेकर के 2014 तक का हिसाब भी देख लीजिए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं और 7 साल के बाद यह शी जिनपिंग का भारत दौरा होगा।

12 तारीख से दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। जिसमें शामिल होने के लिए रूस, चीन समेत दुनिया के कई देशों के राष्ट्र प्रमुख यहां पर आ रहे हैं। लेकिन समिट शुरू होने से पहले ब्रिक्स समिट को लेकर पी चिदंबरम ने कहा कि हालिया बैठकों से कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला। बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जरा 1947 से लेकर के 2014 तक का हिसाब भी देख लीजिए। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं और 7 साल के बाद यह शी जिनपिंग का भारत दौरा होगा। 

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7 साल बाद जिनपिंग का भारत आना क्या पुराने विवादों को खत्म कर देगा, सुलझा देगा? 

शी जिनपिंग का यह दौरा भारत और चीन के रिश्तों में आई तल्खी के बाद काफी अहम माना जा रहा है। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती के साथ-साथ दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में भी खिंचाव देखने को मिला। अगर 12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक होती है, तो गलवान की घटना के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत होगी। इसके अलावा शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आएंगे। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।

डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ब्रिक्स समिट में क्या कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा?

भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भारत की जिम्मेदारी है। यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। इसमें डर की बात है कि दिल्ली में ईरान की एंट्री और क्या यही अमेरिका की बेचैनी बढ़ा रही है। दरअसल दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाली जो ब्रिक्स समिट है पूरी दुनिया की नजर जरूर है। लेकिन सबसे ज्यादा नजर अगर किसी की है तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की। वजह साफ है ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, डॉलर से दूरी की कोशिश और भारत की मेजबानी में रूस, चीन और ईरान जैसे देशों का एक मंच पर आना।

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ईरान की मौजूदगी क्या अमेरिका की टेंशन को बढ़ा रही है? 

हालांकि उसमें करीब 11 देश हैं। लेकिन ये जो तीन चार नाम है भारत को छोड़कर रूस, चीन, ईरान यहीं पर तो फंसी है ट्रंप की जान। ट्रंप पहले ही ब्रिक्स को लेकर कई बार नाराजगी जता चुके हैं। 100% तक टेरिफ की धमकी दे चुके हैं। दिल्ली में इस बार मंच पर ग्लोबल साउथ की बड़ी उभरती इकॉनमीज़ एक साथ होंगी। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। 12 13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेजबानी भी वो करेगा और यही वजह है कि वाशिंगटन की नजर भी दिल्ली पर टिकी हुई है। ब्रिक्स अब सिर्फ ब्राजील, रशिया, इंडिया, चाइना और साउथ अफ्रीका तक सीमित नहीं है। ईरान समेत कई देश इसका एक हिस्सा बन चुके हैं। यानी एक ऐसा मंच जिसकी आर्थिक और राजनीतिक पहुंच लगातार बढ़ती जा रही है, स्प्रेड हो रही है। विस्तार उसका हो रहा है। यही विस्तार अमेरिका के लिए चिंता का कारण है। खासकर इसलिए भी क्योंकि ब्रिक्स के भीतर कुछ देश दुनिया को मौजूदा आर्थिक व्यवस्था जो है तो कुछ देश ऐसे हैं जो उसमें व्यवस्था में बदलाव की बात करते हैं।

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