US FDA के Nicotine Products पर बड़े फैसले के बाद उठी मांग, क्या ICMR अब करेगा स्वतंत्र Scientific Review?

अमेरिका में FDA के मूल्यांकन के बाद ही 'कम जोखिम वाले दावों' की इजाज़त दी जाती है। इनमें से किसी भी तरीके या ढांचे को पूरी तरह से वैसा का वैसा नहीं अपनाया जाना चाहिए। हालाँकि, कुल मिलाकर ये रिसर्च का एक ऐसा आधार बनाते हैं जिस पर देश के वैज्ञानिकों को निष्पक्ष रूप से विचार करना चाहिए—न तो इसे विचारधारा के आधार पर खारिज किया जाना चाहिए और न ही बिना सोचे-समझे अपना लिया जाना चाहिए।
अमेरिकी फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने हाल ही में कुछ ऐसे निकोटीन प्रोडक्ट्स के लिए 'कम जोखिम वाले दावों' (modified-risk claims) को मंज़ूरी दी है जिन्हें जलाया नहीं जाता (non-combustible)। यह कदम तंबाकू और निकोटीन के इस्तेमाल से जुड़ी रणनीतियों पर हो रही व्यापक अंतरराष्ट्रीय बातचीत का हिस्सा है। भारत के लिए अहम सवाल यह है कि क्या देश के रिसर्च संस्थान इस नए डेटा का स्वतंत्र विश्लेषण करने के लिए तैयार हैं, और क्या वे इसे अपनी परिस्थितियों के हिसाब से ढाल सकते हैं। अलग-अलग निगरानी मॉडल अपनाने वाले देशों से नतीजे सामने आ रहे हैं। स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम, जापान और नॉर्वे में सिगरेट पीने वालों की संख्या में कमी देखी गई है, साथ ही वहाँ बिना जलाए इस्तेमाल होने वाले विकल्पों को भी अपनाया गया है।
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अमेरिका में FDA के मूल्यांकन के बाद ही 'कम जोखिम वाले दावों' की इजाज़त दी जाती है। इनमें से किसी भी तरीके या ढांचे को पूरी तरह से वैसा का वैसा नहीं अपनाया जाना चाहिए। हालाँकि, कुल मिलाकर ये रिसर्च का एक ऐसा आधार बनाते हैं जिस पर देश के वैज्ञानिकों को निष्पक्ष रूप से विचार करना चाहिए—न तो इसे विचारधारा के आधार पर खारिज किया जाना चाहिए और न ही बिना सोचे-समझे अपना लिया जाना चाहिए। इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) देश की सबसे बड़ी बायोमेडिकल रिसर्च संस्था है और स्वास्थ्य के मामलों में सरकार की मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार है। एक सदी से भी ज़्यादा समय से, इसके आकलन ने संक्रामक बीमारियों की रोकथाम से लेकर क्लिनिकल रिसर्च के मानकों तक, हर चीज़ पर राष्ट्रीय नीति को दिशा दी है। अपनी संस्थागत विश्वसनीयता के कारण, ICMR तंबाकू और निकोटीन से जुड़े नए डेटा का निष्पक्ष मूल्यांकन करने के लिए सबसे उपयुक्त संस्था है।
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नई दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट और पद्म श्री से सम्मानित डॉ. मोहसिन वली कहते हैं, भारत का ग्लोबल सबूतों की बारीकी से जांच करने और उन्हें देश की ज़रूरतों के हिसाब से ढालने का अच्छा रिकॉर्ड रहा है। ICMR इस व्यावहारिक नज़रिए का एक बेहतरीन उदाहरण है: COVID-19 डायग्नोस्टिक वैलिडेशन, जीन थेरेपी डेवलपमेंट, क्लिनिकल ट्रायल और 'गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस' के मामलों में, इसने अपने सिस्टम को U.S. FDA और ICH जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने जाने वाले मानकों के अनुरूप बनाया है। इस तरीके से भारत को साबित हो चुके तकनीकी तरीकों को अपनाने और साथ ही उन्हें राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुसार ढालने में मदद मिली। अब तंबाकू नियंत्रण के मामले में अमेरिका के तौर-तरीकों का भी इसी तरह से आकलन करना फायदेमंद हो सकता है। कई दशकों में अमेरिका में सिगरेट पीने और कुल मिलाकर तंबाकू के सेवन में काफी कमी आई है, जबकि भारत के सामने अभी भी एक बड़ी और कुछ वर्गों में बढ़ती हुई चुनौती है। उस अंतर का अध्ययन करने से भारत की खास परिस्थितियों के अनुकूल रणनीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।
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