China की गीदड़भभकी पर मिला करारा जवाब, अगला दलाई लामा भारत से होगा?

China
AI Image
अभिनय आकाश । May 25 2026 7:29PM

जिस देश की सरकार नास्तिकता में विश्वास रखती है, वह एक आध्यात्मिक अवतार के लिए इतना बेचैन क्यों है? दरअसल चीनी प्रवक्ता यूजिंग ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म पूरी तरह चीन का आंतरिक मसला है।

तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का अगला अवतार। दरअसल चीन ने एक बार फिर गीदड़ भभकी दे दी है। चीनी दूतावास की प्रवक्ता हैं यू जिन जिन्होंने साफ शब्दों में भारत को चेतावनी दे डाली है कि वो दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया में हस्तक्षेप बिल्कुल ना करें। चीन का साफ कहना है कि यह उनका आंतरिक मामला है। लेकिन सवाल तो यह है कि आखिर जिस देश की सरकार नास्तिकता में विश्वास रखती है, वह एक आध्यात्मिक अवतार के लिए इतना बेचैन क्यों है? दरअसल चीनी प्रवक्ता यूजिंग ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म पूरी तरह चीन का आंतरिक मसला है।  उन्होंने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन यानी कि तिब्बत की निर्वासी सरकार को अवैध बताया और कहा कि भारत को तिब्बत की आजादी की वकालत करने वालों को मंच नहीं देना चाहिए। लेकिन चीन की इस बौखलाहट की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है।  हाल ही में भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने खुलकर कहा कि जो लोग दलाई लामा को मानते हैं उनका यह मानना है कि पुनर्जन्म का फैसला दलाई लामा की इच्छा और परंपरा के अनुसार होना चाहिए। अब भारत का यह कड़ा रुख ही चीन की परेशानी की सबसे बड़ी वजह बन चुका है। 

इसे भी पढ़ें: वेटर नहीं PLA की कमांडर, बीजिंग में एलन मस्क की जासूसी करा रहे थे जिनपिंग?

अब सवाल आता है कि चीन दलाई लामा को खुद क्यों नहीं चुनना चाहता है?  इसके पीछे के तीन बड़े कारण हैं। पहला कारण है पूर्ण नियंत्रण। चीन चाहता है कि अगला दलाई लामा उनकी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीसीपी की कठपुतली हो। अगर दलाई लामा चीन का होगा तो तिब्बत और दुनिया भर के बौद्ध समुदाय पर बीजिंग का कब्जा पक्का हो जाएगा। दूसरा कारण है भारत का डर। तिब्बत की निर्वासी सरकार धर्मशाला भारत में है। चीन को डर है कि अगला दलाई लामा भारत के तवांग यानी कि अरुणाचल प्रदेश या किसी और क्षेत्र से चुना जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे का दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिट्टी में मिल जाएगा। तीसरा कारण है कानून का बहाना। चीन गोल्डन अर्न यानी कि सोने की कलश वाली एक पुरानी पद्दति का हवाला देता है और कहता है कि उनकी मंजूरी अनिवार्य है। जबकि 14वें दलाई लामा ने साफ कर दिया है कि उनका पुनर्जन्म किसी स्वतंत्र देश में होगा ना कि चीनी कब्जे वाले तिब्बत में।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप को समझ आ गया कि चीन का मुकाबला अकेले नहीं, भारत के साथ मिलकर किया जा सकता है

कैसे चुना जाता है दलाई लामा

यह प्रक्रिया जितनी रहस्यमई होती है, उतनी ही पवित्र भी होती है। दरअसल, तिब्बती बौद्ध धर्म में यह कोई चुनाव नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक खोज है। वर्तमान दलाई लामा अपनी मृत्यु से पहले कुछ संकेत छोड़ जाते हैं। जैसे कोई कविता या पत्र जो उनके अगले जन्म की दिशा बताते हैं। वरिष्ठ भिक्षु तिब्बत की लुहमा, लातसो पवित्र झील पर जाकर ध्यान लगाते हैं। कहते हैं कि झील के पानी में उन्हें उन रास्तों या घरों के दृश्य दिखाई देते हैं जहां बच्चे का जन्म हुआ है। भिक्षु भेष बदलकर उन जगहों पर जाते हैं और ऐसे बच्चों की तलाश करते हैं जिनमें अद्भुत लक्षण हो। फिर आता है अंतिम परीक्षा। दरअसल यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है दोस्तों। बच्चे के सामने कई वस्तुएं रखी जाती है। कुछ पिछले दलाई लामा को असली चीजें जैसे कि चश्मा, माला और कुछ उनकी नकल। अगर बच्चा बिना गलती के अपने पिछले जन्म की चीजों को पहचान लेता है तो उसे अवतार मान लिया जाता है। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़