अमेरिका ने समुद्र में ईरानी युद्धपोत को डुबाकर किया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन? UNCLOS क्या कहता है, जानिए नियम

श्रीलंका की विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमेरिकी पनडुब्बी के हमले को श्रीलंका की सुरक्षा से जोड़कर सरकार से कई सवाल पूछे हैं। श्रीलंकाई विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने संसद में सवाल उठाया कि सरकार की जानकारी के बिना एक विदेशी सबमरीन श्रीलंका के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में कैसे घुस गई।
4 मार्च को सुबह खबर आई कि अमेरिका की सबमरीन के द्वारा ईरानी वॉरशिप आईआरआईएस डेना को भारत की जमीनी सीमा कन्याकुमारी से कम से कम 380 किमी दूर समुद्र में अमेरिका के द्वारा डुबो दिया गया है। श्रीलंका के नेवल कोस्ट से केवल 70 कि.मी. दूर समुद्र में यह घटना हुई। इसलिए श्रीलंका की नेवी ने रेस्क्यू कार्यक्रम चलाकर ईरानी नेवी के कुछ लोगों को बचा लिया है। इस हमले के बाद भारत से लेकर श्रीलंका तक में बवाल मचा हुआ है। एक तरफ जहां
ईरानी वॉरशिप के भारत में हुए मिलन 2026 नामक एक अभ्यास कार्यक्रम में हिस्सा लेकर वापस लौटने के दौरान हुए हमले का आरोप लगाकर विपक्ष सरकार को घेर रही है। वहीं दूसरी तरफ श्रीलंका की विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अमेरिकी पनडुब्बी के हमले को श्रीलंका की सुरक्षा से जोड़कर सरकार से कई सवाल पूछे हैं। श्रीलंकाई विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने संसद में सवाल उठाया कि सरकार की जानकारी के बिना एक विदेशी सबमरीन श्रीलंका के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में कैसे घुस गई।
इसे भी पढ़ें: 120 देशों में बैन..खलीफा के ब्रह्मास्त्र से खाड़ी में खलबली, नरसंहार वाला रक्तबीज इजरायल में ला देगा तबाही!
क्या अमेरिका का हमला अवैध था?
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका सरकार ने संसद में बताया कि जिस स्थान पर ईरानी युद्धपोत को डुबोया गया, वह दक्षिण श्रीलंका के गॉल हार्बर से लगभग 19 नॉटिकल मील (करीब 35 किलोमीटर) दूर था। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के मुताबिक, यदि कोई देश अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष में शामिल है तो उसके युद्धपोतों को सामान्यतः वैध सैन्य लक्ष्य माना जाता है। ऐसे में उन पर हमला करना कानूनन वैध हो सकता है। आमतौर पर इस तरह के हमले खुले समुद्र में या फिर संघर्ष में शामिल देशों के 12 नॉटिकल मील तक के क्षेत्रीय जल में किए जा सकते हैं। लेकिन किसी तटस्थ देश के क्षेत्रीय जल के भीतर सैन्य हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार वैध नहीं माना जाता।
क्या है समुद्री युद्ध का कानून?
UNCLOS समुद्री युद्ध का कानून के नाम से भी जाना जाता है, सशस्त्र संघर्ष के कानून का एक हिस्सा है जो समुद्र में होने वाले युद्ध में शामिल लड़ाकों, नागरिकों और तटस्थ देशों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े नियम तय करता है। यह कानून इस बात से ही स्वतंत्र रूप से लागू होता है कि युद्ध शुरू करने का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध था या नहीं। इस कानून का एक केंद्रीय विचार यह है कि समुद्री क्षेत्र से संबंधित सभी मुद्दे आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं और उनका समग्र रूप से समाधान किया जाना चाहिए। इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए, UNCLOS ने तीन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना की है
इसे भी पढ़ें: US-Israel-Iran War Day 8 Updates: तेहरान से तेल अवीव तक मिसाइलों की गूंज, युद्ध में अब तक की सबसे बड़ी तबाही!
1. अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण (ITLOS): यह संस्था समुद्री कानून संबंधी विवादों का निपटारा करती है। इसका मुख्य कार्य समुद्र के कानून संबंधी समझौते (UNCLOS) की व्याख्या और उसके अनुप्रयोग से जुड़े विवादों का निर्णय करना है। यदि दो देशों के बीच समुद्री सीमा, जहाजों की गिरफ्तारी या समुद्री अधिकारों को लेकर विवाद होता है, तो ITLOS उस पर फैसला दे सकता है।
2. अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल प्राधिकरण (ISA): यह संस्था उन क्षेत्रों में खनिज संसाधनों की खोज और खनन गतिविधियों को नियंत्रित करती है जो किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते और अंतरराष्ट्रीय समुद्रतल क्षेत्र में स्थित होते हैं। इसका उद्देश्य समुद्रतल के संसाधनों का समान और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना है।
3. महाद्वीपीय शेल्फ की सीमाओं पर आयोग (CLCS): यह आयोग तटीय देशों द्वारा किए गए दावों की जांच और सिफारिश करता है, जिनमें वे अपने महाद्वीपीय शेल्फ की बाहरी सीमा तय करने का दावा करते हैं। CLCS यह सुनिश्चित करता है कि देशों के दावे समुद्री कानून के नियमों के अनुसार सही हों।
अन्य न्यूज़















