US-Iran Peace Deal पर Donald Trump का बड़ा खुलासा, Netanyahu ने क्यों डाला था अड़ंगा?

डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर बेरूत हमले के जरिए अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लगभग बिगाड़ने का बड़ा आरोप लगाया है, जिससे दोनों नेताओं के बीच तनाव उजागर हुआ है। इस विवाद के बावजूद, 19 जून को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाइयां रोकने और परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने हेतु एक ऐतिहासिक समझौता होने जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हवाई हमले करके अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते को लगभग बिगाड़ दिया था। ट्रंप के मुताबिक, इस हमले की वजह से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली डील में काफी देरी हुई। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने नेतन्याहू को बहुत मुश्किल इंसान भी कहा।
इजरायल को अमेरिका का आभारी होना चाहिए
डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के दौरान कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए जो शांति समझौता हो रहा है, उसके लिए इजरायल को अमेरिका का बहुत आभारी होना चाहिए। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "सच कहूं तो, ऐसा करने के लिए उन्हें हमारा बहुत आभारी होना चाहिए। क्योंकि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो इजरायल दो घंटे भी नहीं टिक पाता।"
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19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा समझौता
इस बीच, अमेरिका और ईरान दोनों ही लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को 'तुरंत और हमेशा के लिए' रोकने पर सहमत हो गए हैं। यह ऐतिहासिक समझौता 19 जून को स्विट्जरलैंड में साइन किया जाना है। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों का रास्ता फिर से खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर कुछ नियम और गाइडलाइंस तय की जाएंगी।
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इजरायल की चुप्पी और नेतन्याहू की मजबूरी
इस पूरे समझौते में इजरायल को शामिल नहीं किया गया था, इसलिए उसके लिए इसे स्वीकार करना काफी मुश्किल हो सकता है। इजरायल ने अभी तक अमेरिका-ईरान समझौते की खबर पर कोई भी रिएक्शन नहीं दिया है। जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू के पास ईरान और उसके साथी संगठनों (जैसे लेबनान के हिज्बुल्लाह) के साथ लड़ाई को जारी रखने के अपने देश के भीतर कुछ राजनीतिक कारण हैं।
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