Social Media कोई खिलौना नहीं, EU President Ursula von der Leyen ने की बच्चों के लिए कड़े Age Limit की वकालत

ब्रसेल्स में पत्रकारों से बात करते हुए वॉन डेर लेयेन ने कहा कि हमारे बच्चों को असल दुनिया में समय बिताने की ज़रूरत है। उन्हें खेलने, दोस्ती करने और गलतियाँ करने का समय चाहिए।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि आयोग गर्मियों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बच्चों की पहुँच को सीमित करने का प्रस्ताव पेश करेगा। यह फ़ैसला इसलिए लिया गया है ताकि बच्चे एल्गोरिदम के बारे में सोचे बिना अपनी ऑफ़लाइन ज़िंदगी पर ध्यान दे सकें। ब्रसेल्स में पत्रकारों से बात करते हुए वॉन डेर लेयेन ने कहा कि हमारे बच्चों को असल दुनिया में समय बिताने की ज़रूरत है। उन्हें खेलने, दोस्ती करने और गलतियाँ करने का समय चाहिए। उन्हें अपनी पहचान और अपना व्यक्तित्व खुद बनाने का समय चाहिए, इससे पहले कि कोई एल्गोरिदम उन्हें आकार दे दे। उन्होंने आगे कहा कि बात यह नहीं है कि बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं या नहीं। असल बात यह है कि सोशल मीडिया हमारे बच्चों तक कब और कैसे पहुँचता है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यह भी कहा कि एक ऐसी उम्र तय होनी चाहिए जिस पर बच्चों को कानूनी तौर पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की इजाज़त दी जा सके। उन्होंने कहा कि हमें अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए धीरे-धीरे और चरणों में एक्सेस देने पर विचार करना होगा।
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उन्होंने कहा कि 'सोशल मीडिया कोई खिलौना नहीं है' और बताया कि सबूत इस बात का समर्थन करते हैं कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए कम से कम उम्र तय की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने का सुझाव भी दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात - यानी ऐसी दुनिया जहाँ हम बड़ी टेक कंपनियों को अपने बच्चों तक बिना किसी रोक-टोक के पहुँचने देते हैं से एक और पीढ़ी मानसिक नुकसान, लत और दुख की ओर धकेल दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को सुरक्षित बनाने की ज़िम्मेदारी माता-पिता या बच्चों की नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी कंपनियों की होनी चाहिए और उन्हें यह मानना चाहिए कि "अपने यूज़र्स की देखभाल करना उनकी ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने अपनी पिछली बात को समझाते हुए कहा, "यूरोप में, जो कोई भी कोई प्रोडक्ट बनाता है, उसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उसी की होती है। कार बनाने वाली कंपनियों को अपनी गाड़ियाँ सुरक्षित बनानी चाहिए। हम यह उम्मीद नहीं करते कि बच्चे अपनी सीटबेल्ट खुद डिज़ाइन करें। हम यह भी उम्मीद नहीं करते कि माता-पिता घर पर एयरबैग लगाएँ। और यही बात बड़ी टेक कंपनियों पर भी लागू होनी चाहिए।
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