अल्लाह की मस्जिद को भी नहीं छोड़ा, मक्का के बाद दहला डाला मदीना?

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के मदीना स्थित पावर स्टेशन और एक प्रमुख तेल टर्मिनल पर ड्रोन हमला किया। पैगंबर की मस्जिद को बिजली देने वाले केंद्र पर हुए इस हमले से मुस्लिम देशों में भारी रोष है। यूएई, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सहित कई देशों ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब का समर्थन किया है।
कट्टरता चाहे किसी भी विचारधारा संगठन या मजहब के नाम पर हो वो एक दिन अपना रंग दिखाई देती है। वैसे ही कुछ इन दिनों मिडिल ईस्ट में देखने को मिल रहा है। यमन के हूति विद्रोहियों ने जो किया है वो यह जाहिर करता है कि लोग अल्लाह के भी सगे नहीं यानी कि हूतियों ने अल्लाह को भी नहीं बख्शा है। दरअसल मुसलमानों के सबसे पवित्र स्थलों में माने जाने वाले मक्का पर हमला करने के बाद अब हूतियों ने अल्लाह के घर को निशाना बना डाला है। हूति विद्रोहियों ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में ड्रोन हमला किया है। इस हमले में पैगंबर की मस्जिद को बिजली देने वाले तैबा पावर स्टेशन पर निशाना बनाया गया है। जिसमें काफी नुकसान पहुंचा है। हूतियों के इस हमले को लेकर कई मुस्लिम देश भयंकर भड़क गए हैं।
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खाड़ी देशों ने हूतियों की हमले की निंदा की है और सऊदी अरब के साथ एकजुटता दोहराई है। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन ने इस हमले की निंदा की है क्योंकि मामला मदीना के धार्मिक महत्व से जुड़ा है। अगर किसी ऐसी जगह को निशाना बनाया जाता है जो मस्जिद नबी जैसी पवित्र जगह को बिजली देता है, तो इसका असर सऊदी अरब की सीमाओं से बाहर भी महसूस होता है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल मलिकी ने पैगंबर की मस्जिद को बिजली सप्लाई करने वाली सुविधा पर हमले की कोशिश का हिस्सा बताया जिसका मकसद दो पवित्र मस्जिदों को निशाना बनाना है और मक्का और मदीना पर हमलों के जरिए दुनिया भर के मुसलमानों को उकसाना है। अब आप समझ सकते हैं कि मिडिल ईस्ट में तनाव किस स्तर पर पहुंच गया है कि इस्लाम को मानने वाले हूती ही अब इस्लाम धर्म के संस्थापक पैगंबर मोहम्मद साहब के घर को ही निशाना बना रहे हैं और इसका सबसे बड़ा कारण कुछ और नहीं बल्कि कट्टरपंथी हैं। क्योंकि कट्टरता उसी समाज और क्षेत्र के लिए भी संकट पैदा करती है जिसे उससे बढ़ावा मिला है। इससे उन लोगों को भी सीख लेनी चाहिए जो बात-बात पर खाड़ी देशों के खासकर हूती जैसे कट्टरपंथियों की धमकी देते हुए कहते हैं कि अगर हमें छेड़ा तो यहां जलजला आ जाएगा।
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अब यही कट्टरबंदी कैसे अल्लाह के घर को ही निशाना बनाकर जलजला लाने की कोशिश कर रहे हैं। वह धमकी देने वाले लोगों के लिए क्या ही कर सकते हैं। दरअसल यमन के हूती विद्रोहियों के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। खासकर सऊदी के अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाते हुए हूं ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। इसी बीच सऊदी के तेल टर्मिनल पर भीषण अटैक हुआ है। जहां यह हमला हुआ है, वह सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर लाल सागर के किनारे बसा एक बड़ा औद्योगिक और तेल निर्यात केंद्र है। यहां से सऊदी अरब दुनिया के दूसरे हिस्सों में कच्चा तेल भेजता है। इस टर्मिनल में रोजाना करीब 15 लाख बैरल कच्चा तेल लोड करने की क्षमता है। इसकी एक और रणनीतिक अहमियत है।
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