भारत-रूस ने मिलकर किया खेल! बौखलाया अमेरिका, ठोकेगा 500% टैरिफ?

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अभिनय आकाश । Jul 13 2026 12:56PM

भारत समेत कई देशों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर अमेरिका का नया बिल क्या है? भारत का नाम इसमें बार-बार क्यों लिया जा रहा है और अगर यह कानून लागू होता है तो इसका भारत पर कितना असर पड़ सकता है?

भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर रूस को लेकर तनाव बढ़ सकता है और इस बार वजह है अमेरिका में तैयार किया जा रहा एक नया प्रतिबंध कानून जिसका सीधा असर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर पड़ सकता है। भारत पिछले कुछ सालों से रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है। अब अमेरिका के कुछ सांसदों का कहना है कि अगर कोई देश रूस से तेल खरीदना जारी रखता है तो उस पर भारी टेरिफ लगाया जाना चाहिए। शुरुआती ड्राफ्ट में तो 500% तक टेरिफ लगाने का प्रस्ताव भी रखा गया। हालांकि यह कानून अभी लागू नहीं हुआ और इसके अंतिम ड्राफ्ट का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन इसने भारत समेत कई देशों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर अमेरिका का नया बिल क्या है? भारत का नाम इसमें बार-बार क्यों लिया जा रहा है और अगर यह कानून लागू होता है तो इसका भारत पर कितना असर पड़ सकता है? 

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आखिर पूरा विवाद है क्या?

फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। मकसद था रूस की कमाई कम करना ताकि उसके लिए युद्ध जारी रखना मुश्किल हो जाए। लेकिन भारत ने इस दौरान रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया। इसकी सबसे बड़ी वजह थी सस्ता कच्चा तेल। रूस ने भारत को बाजार भाव से कम कीमत पर तेल बेचा और भारत ने अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खरीद जारी रखी। दरअसल भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अगर सस्ता तेल मिलता है तो उसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों दोनों को होता है और यही वजह है कि भारत ने साफ कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेगा। और अब अमेरिका में सेंशनिंग रशिया नाम से एक नया बिल तैयार किया जा रहा है। इस बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसदों का समर्थन मिल रहा है। इसका मकसद सिर्फ रूस पर प्रतिबंध लगाना नहीं बल्कि उन देशों पर आर्थिक दबाव बनाना है जो रूस से कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और दूसरे ऊर्जा उत्पाद खरीद रहे हैं। सबसे बड़ी बात इस बिल के शुरुआती ड्राफ्ट में सबसे ज्यादा चर्चा 500% टेरिफ के प्रस्ताव को लेकर हुई।   

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टैरिफ होता क्या है? 

आसान भाषा में समझे तो जब कोई देश दूसरे देश से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाता है उसे टेरिफ कहा जाता है। अगर अमेरिका भारत के सामान पर बहुत ज्यादा टेरिफ लगा देगा तो भारतीय उत्पाद अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। इससे भारत का निर्यात प्रभावित हो सकता है और कई उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि राहत की बात यह है कि अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब इस बिल में कुछ बदलाव किए जाएंगे और 500% जैसे बेहद सख्त टेरिफ को कम किया जा सकता है। लेकिन अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ क्योंकि बिल का फाइनल ड्राफ्ट सामने आना बाकी है। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया जब ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिका की व्यापार नीति पहले से ज्यादा सख्त नजर आ रही है। एक ओर ईरान युद्ध चल रहा है। ट्रंप लंबे समय से टेरिफ को एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले कुछ वक्त में भारत और अमेरिका के बीच भी व्यापार को लेकर कई बार तनातनी देखने को मिली। कुछ भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टेरिफ लगाने की घोषणा हुई। फिर दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद कई मामलों में राहत भी दी गई। यानी बातचीत और दबाव दोनों साथ-साथ चलते रहे। इस नए बिल में एक और बड़ा प्रावधान रखा गया है। अगर अमेरिकी राष्ट्रपति को लगे कि किसी देश को छूट देना अमेरिका के रणनीति के हित में है तो वह 180 दिनों तक प्रतिबंधों से राहत दे सकेंगे। यानी भारत के लिए आगे क्या स्थिति बनेगी यह काफी हद तक अमेरिका के राजनीतिक फैसलों और दोनों देशों के रिश्तों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि भारत पर कोई नया टेरिफ लागू नहीं हुआ। अभी सिर्फ एक प्रस्तावित बिल पर सहमति बनी है। इसे अमेरिकी संसद से मंजूरी मिलना बाकी है। इसलिए 500% टेरिफ लगने की खबर सही नहीं होगी। लेकिन इतना जरूर है कि अगर यह कानून सख्त रूप से लागू हो जाता है। 

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