भारत ने यूक्रेन में हिंसा रोकने का आह्वान किया

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यूक्रेन में अशांति की स्थिति और हिंसा को तत्काल रोकने का आह्वान करते हुए भारत ने दोहराया कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने तथा संघर्ष से, खासकर विकासशील देशों में पैदा होने वाली आर्थिक चुनौतियों को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति की वकालत करता है।

संयुक्त राष्ट्र, 26 अगस्त। यूक्रेन में अशांति की स्थिति और हिंसा को तत्काल रोकने का आह्वान करते हुए भारत ने दोहराया कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने तथा संघर्ष से, खासकर विकासशील देशों में पैदा होने वाली आर्थिक चुनौतियों को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति की वकालत करता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने बुधवार को यूक्रेन में संघर्ष की शुरुआत के छह महीने बाद सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अंदर और बाहर रचनात्मक रूप से काम करना सामूहिक हित में है, ताकि जल्द से जल्द युद्ध का समाधान निकाला जा सके। 

उन्होंने कहा, ‘‘हम फिर से कहना चाहेंगे कि वैश्विक व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और क्षेत्रीय अखंडता और राज्यों की संप्रभुता के सम्मान पर टिकी हुई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत अशांति की स्थिति और हिंसा को रोकने की वकालत करता रहा है। हम यूक्रेन और रूस के बीच बातचीत को प्रोत्साहित करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक से अधिक बार उनसे इस संबंध में बात की है।’’ कंबोज ने कहा कि भारत, यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न होने वाली आर्थिक कठिनाइयों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और भागीदार देशों के साथ काम करेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध का प्रभाव केवल यूरोप तक ही सीमित नहीं है और इसने खासकर विकासशील देशों में खाद्य, उर्वरक और ईंधन सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत यूक्रेन की स्थिति पर बेहद चिंतित है। संघर्ष के परिणामस्वरूप उसके लोगों के लिए, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए जीवन की हानि और अनगिनत दुख हुए हैं, लाखों लोग बेघर हो गए हैं और पड़ोसी देशों में शरण लेने के लिए मजबूर हो गए हैं।’’ यूक्रेन ने रूस के साथ जारी युद्ध के बीच बुधवार को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया और यह यूक्रेन पर रूसी हमला शुरू होने के छह महीने पूरे होने का भी दिन है। अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने इस हमले के बाद रूस पर बड़े आर्थिक और अन्य प्रतिबंध लगाए हैं।

भारत ने यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की आलोचना नहीं की है। भारत कई बार रूस और यूक्रेन से कूटनीति और बातचीत के रास्ते पर लौटने का आह्वान कर चुका है और दोनों देशों के बीच संघर्ष को समाप्त करने के सभी राजनयिक प्रयासों के लिए अपना समर्थन भी व्यक्त किया है। यूक्रेन में तत्काल मानवीय राहत को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए, कंबोज ने कहा कि मानवीय कार्रवाई को हमेशा मानवीय सहायता, यानी मानवता, तटस्थता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए और इन उपायों का कभी भी राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों में, भारत ने यूक्रेन और पड़ोसी देशों जैसे रोमानिया, मोल्दोवा, स्लोवाकिया और पोलैंड को लगभग 97.5 टन मानवीय सहायता की 11 खेप भेजी है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और उसके पड़ोसी देशों ने इस साल फरवरी-मार्च में लगभग 22,500 भारतीय नागरिकों के बचाव और निकासी अभियान में अपना पूरा समर्थन दिया। कंबोज ने कहा, ‘‘यह मानवीय सहायता और मदद भारत सरकार के मानवता केंद्रित दृष्टिकोण का प्रतीक है, जो हमारे राष्ट्रीय विश्वास और मूल्यों का एक केंद्रीय सिद्धांत है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में मानता है।’’

कंबोज ने बताया कि भारत ने मानवीय सहायता की अपनी 12वीं खेप यूक्रेन को भेजी है। इसमें बच्चों और वयस्कों में गहरे घावों के रक्तस्राव को रोकने के लिए ‘हेमोस्टैटिक बैंडेज’ सहित 26 प्रकार की दवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह यूक्रेनी पक्ष द्वारा एक विशिष्ट अनुरोध था और हमने कम से कम समय में इसे पूरा करना सुनिश्चित किया।’’ उन्होंने उल्लेख किया कि खाद्य सुरक्षा एक प्रमुख चिंता बनी हुई है। कंबोज ने कहा कि जब खाद्यान्न की बात आती है तो हम सभी के लिए समानता, किफायत और पहुंच के महत्व की पर्याप्त रूप से सराहना करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, ‘‘कई देशों द्वारा भारत से गेहूं और चीनी की आपूर्ति के लिए संपर्क किया गया है और हमने सकारात्मक जवाब दिया है। पिछले तीन महीनों में, भारत ने अफगानिस्तान, म्यांमा, सूडान और यमन सहित जरूरतमंद देशों को 18 लाख टन से अधिक गेहूं का निर्यात किया है।’’ कंबोज ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का दृष्टिकोण संघर्ष को समाप्त करने और रूस-यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न होने वाली आर्थिक चुनौतियों को कम करने के लिए अन्य भागीदारों के साथ काम करने के व्यापक उद्देश्य के साथ संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देना होगा।

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