Human Rights के नाम पर चुनिंदा देशों को निशाना न बनाए UN, भारत ने दी सख्त नसीहत

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत ने विरोध प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की आलोचना को खारिज किया। विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा ताम्रकार ने कहा कि देश की छवि खराब करने के लिए बिना पुष्टि वाले आरोपों और अधूरे आंकड़ों का सहारा न लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के लिए नहीं होना चाहिए।
भारत ने हाल के विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर संयुक्त राष्ट्र की आलोचना का जवाब दिया है। भारत ने चेतावनी दी है कि देश की नकारात्मक छवि पेश करने के लिए बिना पुष्टि वाले आरोपों और अधूरे आंकड़ों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग, बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाबंदियों को लेकर चिंता जताई है।
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मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में बोलते हुए, विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा ताम्रकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्रों के साथ भारत का जुड़ाव बातचीत, परामर्श, सहयोग, गैर-चयनात्मकता और पारदर्शिता पर आधारित होना चाहिए। तमराकर ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्रों के साथ जुड़ता है, लेकिन इस जुड़ाव का आधार संवाद, परामर्श, सहयोग, निष्पक्षता और पारदर्शिता जैसे सिद्धांत होने चाहिए।
उन्होंने सदस्य देशों को आगाह किया कि वे रिपोर्ट में दी गई बातों से आगे बढ़कर कोई निष्कर्ष न निकालें। उन्होंने कहा कि हम प्रतिनिधिमंडलों से आग्रह करते हैं कि वे रिपोर्ट का सही संदर्भ में हवाला दें; किसी मानवीय मुद्दे से जुड़ी जानकारी को एक अंतिम फैसले का रूप न दें। भारत ने कहा कि वह उचित दस्तावेजों के साथ सामने आने वाले विशिष्ट मामलों पर, तय प्रक्रियाओं के माध्यम से चर्चा करने के लिए तैयार है। हालांकि, भारत ने उन कोशिशों का कड़ा विरोध किया, जिनमें बिना पुष्टि वाले आरोपों, अधूरे आंकड़ों या ऐसी रिपोर्टों का इस्तेमाल करके दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश की जाती है, जिनमें भारत से जुड़ी कोई ठोस टिप्पणी नहीं होती।
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भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह भी तर्क दिया कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले, विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके पर संयुक्त राष्ट्र की आलोचना को नई दिल्ली ने "अनुचित" और अपने आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप करार दिया था। यह ताजा घटनाक्रम संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के एक बयान के बाद सामने आया है। इन विशेषज्ञों ने मंगलवार को चिंता जताई कि युवाओं के नेतृत्व में हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस ने बार-बार बहुत कठोर रवैया अपनाया है।
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