सऊदी अरब के रेगिस्तान में भारत का तूफान, इजरायल भी हैरान!

ईरान अमेरिका जंग ने तेल पर सऊदी अरब की बादशाहत खत्म कर दी है। ईरान जंग ने दुनिया भर में तेल निर्यात पर असर डाला। व्यापार मार्गों खासकर हॉर्मोस स्ट्रेट को बाधित किया। इसके अलावा सप्लाई चेन पर भी दबाव डाला। इसी की वजह से सऊदी अरब का तेल निर्यात बहुत कम हो गया।
दुनिया मिडिल ईस्ट में पैर जमाने के लिए वर्चस्व की जंग लड़ रही है लेकिन भारत अब नया मिडिल ईस्ट बन गया है। शायद इसीलिए मिडिल ईस्ट का सबसे ताकतवर देश सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की की तरफ चला गया। नौबत यहां तक आ गई कि दुनिया को कर्ज बांटने वाला सऊदी अरब पहली बार कंगाल हो गया है। सऊदी अरब पहली बार बहुत बड़ा कर्ज मांग रहा है। सऊदी अरब का नाम आते ही आपके दिमाग में एक अमीर देश की छवि बनती है। तेल के कुएं दिखते हैं। ऊंची इमारतें और महंगी एसयूवी कारें दिखती हैं। सऊदी अरब वो देश रहा है जिसने कई देशों को कर्ज दिया है। सऊदी अरब तो पाकिस्तान का परमानेंट फाइनेंसर है। लेकिन सऊदी अरब को अब मोटे कर्ज की जरूरत पड़ गई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब $8 अरब डॉलर का भारी भरकम लोन लेने की तैयारी कर रहा है। ईरान अमेरिका जंग ने सऊदी अरब को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। आप जानते हैं कि सऊदी अरब लंबे समय से विश्व का सबसे बड़ा तेल निर्यातक और मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी महाशक्ति रहा है।
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ईरान अमेरिका जंग ने तेल पर सऊदी अरब की बादशाहत खत्म कर दी है। ईरान जंग ने दुनिया भर में तेल निर्यात पर असर डाला। व्यापार मार्गों खासकर हॉर्मोस स्ट्रेट को बाधित किया। इसके अलावा सप्लाई चेन पर भी दबाव डाला। इसी की वजह से सऊदी अरब का तेल निर्यात बहुत कम हो गया। ईरान ने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जिनमें ऑयल रिफाइनरीज शामिल है। इसके साथ अब ईरान समर्थित होती विद्रोहियों ने लाल सागर में जहाजों के लिए नया खतरा पैदा कर दिया है। स्टेट ऑफ हॉर्मोस के बंद होने के बाद सऊदी अरब के लिए आखिरी उम्मीद की किरण बाबल मंदेब स्ट्रेट था। लेकिन यहां पर हुथ विद्रोहियों ने सऊदी अरब को निशाना बना लिया। यानी सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। लेकिन सहयोग देखिए कि यहीं पर भारत के साथ एक बड़ा चमत्कार हुआ। भारत अब रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की मार्केट में नया सऊदी अरब बन गया। जिस तरह से क्रिटिकल मिनरल्स को प्रोसेस करने में चीन की बादशाहत है, जिस तरह से सेमीकंडक्टर पर ताइवान का कब्जा है, वैसे ही कच्चे तेल को प्रोसेस करने के मामले में भारत नया बादशाह बन गया है। भारत अब अफ्रीका और यूरोप समेत रूस को भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बेच रहा है।
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अफ्रीका और यूरोप को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बेचने के मामले में भारत सऊदी अरब से आगे निकल गया है। दुनिया के पास अब भारत से पेट्रोल और डीजल प्रोडक्ट्स खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। विचित्र बात यह है कि भारत खुद अपनी जरूरतों का 80% कच्चा तेल इंपोर्ट करता है। लेकिन भारत इसी कच्चे तेल को प्रोसेस करके अब दुनिया को बेच रहा है। भारत के नियंत्रण में वह पूरी मार्केट आ गई है जो कभी सऊदी अरब की होती थी।
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