Kuwait Drone Attack में भारतीय की मौत, US-Iran तनाव के बीच Middle East में बढ़ा खतरा

कुवैत में हुए ड्रोन हमले के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और गहरा गया है, जिसमें एक भारतीय की जान चली गई। अमेरिकी सेना द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कुवैत से एक दुखद खबर सामने आई है। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। घटना के बाद कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतक के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह हमला बुधवार को हुआ, जिसमें हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह मृतक के परिवार के संपर्क में है और कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। साथ ही हमले में घायल हुए लोगों की मदद के लिए भी समन्वय किया जा रहा है।
बता दें कि यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच टकराव की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। हालांकि संघर्ष विराम बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
गौरतलब है कि कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक माना जाता है। ऐसे में वहां हुए हमले ने न केवल कुवैत बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ड्रोन हमले से यात्री टर्मिनल के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है, जिससे हवाई अड्डे के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने कुवैत में तैनात अपने सैनिकों को निशाना बनाकर भेजे गए कई ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया। सेना के अनुसार कुवैत की ओर दागी गई कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही टूट गईं। इसके अलावा बहरीन की ओर बढ़ रहे ड्रोन और मिसाइलों को भी अमेरिकी तथा बहरीनी सुरक्षा बलों ने मिलकर रोक दिया है।
बता दें कि बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है, जिसके कारण वहां की सुरक्षा को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार घटनाओं के बाद अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित क़ेश्म द्वीप पर एक सैन्य नियंत्रण केंद्र को निशाना बनाकर हमला किया गया। अमेरिका और ईरान दोनों ने अपनी-अपनी कार्रवाई को जवाबी कदम बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता उन हजारों विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है जो कुवैत और आसपास के देशों में काम कर रहे हैं। भारतीय दूतावास भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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