Iran Protests | ईरान में कोहराम! प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई में अब तक 2,571 की मौत, 18,000 से अधिक हिरासत में... मानवाधिकार संस्था HRANA का दावा

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प्रतिरूप फोटो
ANI
रेनू तिवारी । Jan 14 2026 8:52AM

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने अब तक का सबसे भयावह रूप ले लिया है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी' (HRANA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में हिंसक झड़पों और दमन के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई है।

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने अब तक का सबसे भयावह रूप ले लिया है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी' (HRANA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में हिंसक झड़पों और दमन के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई है। यह आंकड़ा हाल के वर्षों में ईरान में हुए किसी भी प्रदर्शन के मुकाबले कहीं अधिक और चिंताजनक है। यह एजेंसी हाल के वर्षों में हुई हिंसक घटनाओं के दौरान सटीक जानकारी देने के लिए जानी जाती रही है और ईरान में मौजूद अपने समर्थकों के जरिए सूचनाओं का सत्यापन करती है। संस्था ने कहा कि मरने वालों में 2,403 प्रदर्शनकारी हैं और 147 सरकारी कर्मी हैं।

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संस्था ने बताया कि मारे गए लोगों में 12 बच्चे और नौ आम नागरिक भी शामिल हैं जो प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। संस्था ने बताया कि 18,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरान में प्रदर्शन के कारण इंटरनेट बंद है जिससे स्थिति का सटीक आकलन करने में मुश्किल हो रही है।

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‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) मृतकों की संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है। ईरान की सरकार ने भी हताहतों की संख्या की जानकारी नहीं दी है। प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों की यह संख्या ईरान में अब प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या से कहीं अधिक है।

मृतकों के आंकड़ों का विश्लेषण

HRANA, जो ईरान के भीतर अपने गुप्त समर्थकों के नेटवर्क के माध्यम से सूचनाओं का सत्यापन करने के लिए जानी जाती है, ने बुधवार को चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:

कुल मौतें: 2,571

प्रदर्शनकारी: 2,403

सुरक्षाकर्मी/सरकारी कर्मचारी: 147

बच्चे: 12 (हिंसा की चपेट में आने से जान गंवाई)

आम नागरिक: 09 (जो प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे, लेकिन हिंसा का शिकार हुए)

संस्था ने यह भी बताया कि अब तक 18,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जिनमें छात्र, कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हैं।

वैश्विक प्रतिक्रिया और चिंता

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शक्तियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। आशंका जताई जा रही है कि यदि इंटरनेट बहाली नहीं हुई और स्वतंत्र जांच की अनुमति नहीं दी गई, तो हताहतों की वास्तविक संख्या और भी डरावनी हो सकती है।

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