Trump के Board Of Peace के न्योते को PM Modi ने ठुकराया? नेतन्याहू क्यों रह गए सन्न

भारत समेत कई बड़े देश इसमें शामिल होने वाले हैं और अमेरिका यह चाहता है कि भारत इस ऐतिहासिक प्रयास में अहम भूमिका निभाए और इसके लिए प्रेसिडेंट ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है और इस शांति बहाली के लिए सदस्य देश के तौर पर शामिल किए जाने की योजना है।
मिडिल ईस्ट के लिए शांति की पहल पर भारत की एक बड़ी भूमिका रहने वाली है और एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भारत को अब मिली है। दरअसल अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय शांति पहल में शामिल होने का न्योता दिया है। इस पहल का मकसद मिडिल ईस्ट में शांति को मजबूत करना और गजा संघर्ष को खत्म करना है। पत्र में यह कहा गया कि अमेरिका पहले ही इस मुद्दे पर एक 20 तय योजना पेश कर चुका है जिसे कई देशों का समर्थन भी मिला है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इसे मंजूरी दी है और अब इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए बोर्ड ऑफ पीस नाम की एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाई जाएगी के तौर पर शामिल होगा। भारत समेत कई बड़े देश इसमें शामिल होने वाले हैं और अमेरिका यह चाहता है कि भारत इस ऐतिहासिक प्रयास में अहम भूमिका निभाए और इसके लिए प्रेसिडेंट ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है और इस शांति बहाली के लिए सदस्य देश के तौर पर शामिल किए जाने की योजना है।
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अमेरिकी राजदूत सरियो गौर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक राष्ट्रपति ट्रंप का न्योता पहुंचाने का सम्मान मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बोर्ड गजा में स्थिरता और समृद्धि लाने के लिए प्रभावी शासन में मदद करेगा। गवर्नर नेते की चिट्ठी भी एक्स पर साझा की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार 15 जनवरी को गजा बोर्ड ऑफ पीस के गठन का ऐलान किया था। इसे इजराइल हमास युद्ध को खत्म करने की अमेरिका समर्थित योजना का दूसरा अहम फज़ बताया गया है। रविवार 18 जनवरी को भारत के अलावा कम से कम चार और देशों ने पुष्टि की है कि उन्हें भी इस बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जॉर्डन, ग्रीस, साइपरस और पाकिस्तान को भी न्योता भेजा गया है। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक जो इस बोर्ड में प्रस्तावित चार्टर से वाकिफ हैं, बोर्ड के अस्थाई सदस्यता के लिए एक अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना होगा। वहीं 3 साल के कार्यकाल के लिए किसी तरह की आर्थिक शर्त नहीं रखी गई है।
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इस पहल से जुटाई गई रकम गजा में पुनिर्माण में इस्तेमाल की जाएगी।
बताया जा रहा है कि बोर्ड में दुनिया के कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं। वाशिंगटन आने वाले दिनों में इसके अंतिम सदस्यों की सूची जारी कर सकता है। यह ऐलान स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के दौरान भी हो सकता है। जिन अन्य नेताओ को निमंत्रण भेजे जाने की पुष्टि हुई है, उनमे कनाडा के पीएम मार्क कार्नी, इजिप्ट के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप अर्दआन शामिल है। पाकिस्तान ने कहा कि पीएम शहबाज शरीफ को भी बोर्ड में शामिल होने का पत्र मिला है। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा को लेकर बने पैनल पर आपत्ति जताने के बाद रविवार को अपनी सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार की बैठक बुलाई। नेतन्याहू कार्यालय ने कहा कि बोर्ड की सरचना इस्त्राइल से परामर्श किए बिना तय की गई है और यह नीति के विपरीत है।
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