अगले 50 साल में 96 फीसदी Coral Reefs नष्ट होने की कगार पर, IUCN की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने चेतावनी दी है कि समुद्र के बढ़ते तापमान के चलते उथले पानी की 96 फीसदी प्रवाल भित्तियां 2075 तक लुप्त हो सकती हैं। अल्बानिया में जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार ग्रेट बैरियर रीफ सहित दुनिया के कई बड़े समुद्री तंत्र अब गंभीर संकट में हैं।
दुनिया की लगभग सभी प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) के अगले 50 वर्षों में नष्ट होने का गंभीर खतरा है। एक वैश्विक अध्ययन में यह चेतावनी देते हुए, इसके लिए मुख्य रूप से समुद्र के बढ़ते तापमान और लू जैसी अत्यधिक गर्मी की घटनाओं को जिम्मेदार बताया गया है। अल्बानिया में संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता सम्मेलन से इतर, बृहस्पतिवार को जारी अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के आकलन में कहा गया है कि उथले पानी में मौजूद 96 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां पहले से ही गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं और वर्ष 2075 तक गायब हो सकती हैं।
ऑस्ट्रेलिया की ग्रेट बैरियर रीफ, पश्चिमी प्रशांत महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित कोरल ट्रायंगल, मेसोअमेरिकन बैरियर रीफ प्रणाली और लाल सागर की प्रवाल भित्तियां सहित दुनिया की कई प्रसिद्ध प्रवाल भित्तियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। यह खतरे का सबसे गंभीर स्तर है। आईयूसीएन की प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी प्रणालियों की ‘ग्लोबल रेड लिस्ट’ के इस आकलन का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक मिशाल गुडका ने कहा, ‘‘प्रवाल भित्तियों के नष्ट होने का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन इसे निराशा का कारण बनाने के बजाय खतरे की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रवाल भित्तियों ने बड़े पैमाने पर हानिकारक विरंजन (ब्लीचिंग) जैसी विनाशकारी घटनाओं के बाद भी उल्लेखनीय रूप से उबरने की क्षमता दिखाई है।
भविष्य में भी कुछ स्थानों पर ऐसी प्रवाल भित्तियां बची रह सकती हैं, जो प्रतिकूल परिस्थितियों को सहने में सक्षम हों। इसलिए हमें उनकी रक्षा और विकास के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।’’ यह आकलन प्रवाल भित्तियों को लेकर आई ताजा चिंताजनक रिपोर्ट है। ये भित्तियां समुद्री भोजन और पर्यटन के महत्वपूर्ण स्रोत हैं तथा तटीय कटाव और तूफानों से बचाव में भी मदद करती हैं।
इन्हें ‘‘समुद्र के वर्षावन’’ भी कहा जाता है, क्योंकि यहां दुनिया की सबसे समृद्ध जैव विविधता में से कुछ पाई जाती हैं। ये समुद्री जीवों की एक चौथाई प्रजातियों के साथ-साथ तटीय समुदायों और व्यवसायों को भी सहारा देती हैं। जब कोई प्रवाल भित्ति नष्ट हो जाती है, तो उसके कठोर प्रवाल गायब होने लगते हैं और उनकी जगह शैवाल, टूटे हुए प्रवाल के टुकड़े तथा स्पंज जैसे जीव ले लेते हैं।
इसके परिणामस्वरूप भित्ति एक ऐसे विविध पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा देने में सक्षम नहीं रह जाती, जिसमें छोटे अकशेरुकी जीवों से लेकर ग्रूपर जैसी रीफ मछलियां तक शामिल होती हैं। आईयूसीएन की महानिदेशक ग्रेथेल एगुइलार ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रवाल भित्तियां समुद्र के स्वास्थ्य के सबसे स्पष्ट संकेतकों में से एक हैं।’’ इस आकलन में उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) और उपोष्णकटिबंधीय (सबट्रॉपिकल) क्षेत्रों के 127 पारिस्थितिकी क्षेत्रों तथा दुनिया भर में फैली 1,88,362 वर्ग किलोमीटर प्रवाल भित्तियों को शामिल किया गया। इसमें जलवायु परिवर्तन को दुनिया भर में प्रवाल भित्तियों के क्षरण का ‘‘सबसे प्रमुख और लगातार बना रहने वाला खतरा’’ बताया गया है।
एक सप्ताह पहले आईयूसीएन के एक अन्य अध्ययन में कहा गया था कि प्रवाल भित्तियां बनाने वाली लगभग 44 प्रतिशत प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ गया है। वहीं, एक साल पहले किए गए सर्वेक्षण में पाया गया था कि दुनिया की 84 प्रतिशत समुद्री प्रवाल भित्तियां हानिकारक विरंजन (ब्लीचिंग) की चपेट में आ चुकी हैं। दर्ज इतिहास में यह इस तरह की सबसे व्यापक घटना थी।
वर्ष 2024 पृथ्वी का अब तक का सबसे गर्म वर्ष था और इस दौरान पैदा हुई गर्मी का बड़ा हिस्सा महासागरों में समा गया। ध्रुवीय क्षेत्रों से दूर स्थित महासागरों की सतह का औसत वार्षिक तापमान रिकॉर्ड 20.87 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के साथ-साथ प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने और तटीय क्षेत्रों में अनियंत्रित विकास को कम करने के प्रयास भी प्रवाल भित्तियों को बचाने में मदद कर सकते हैं।
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