बिहार की बेटी ज्योति की 'FAN' हुई अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी इवांका ट्रंप, पोस्ट किया ये ट्वीट

  •  निधि अविनाश
  •  मई 23, 2020   13:34
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बिहार की बेटी ज्योति की 'FAN' हुई अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी इवांका ट्रंप, पोस्ट किया ये ट्वीट

लॉकडाउन में अपने पिता को साइकिल के पीछे बिठा कर गुड़गांव से दरभंगा की ओर निकल पड़ी। ज्योति ने तकरीबन 12 सौ किलोमीटर का संघर्षपूर्ण सफर को अपनी हिम्मत के साथ पुरा किया और पहुंच गई गुड़गांव से दरभंगा।

नई दिल्ली। कोरोना का कहर अगर किसी पर सबसे ज्यादा पड़ा है तो वह हैं मजदूर लोग। इस महमारी से जो लोग शहरों में रह कर अपना गुजारा करते थे आज वहीं मजदूर लोग अपनी जिंदगी को बचाने के लिए वापस अपने गांव लौटना चाहते है। लेकिन लॉकडाउन के कारण बसों और ट्रेनों के बंद रहने की वजह से मजदूर अपने दो पैरो को ही पहिया बनाकर घर की और निकल गए है। मजदूरों की परेशानी और दर्द सिर्फ वहीं समझ सकते है जो इतनी कड़ी धूप में अपने बच्चों को लेकर अपनी मंजिल की और बिना कुछ सोचे-समझे निकल चुकें है। ऐसा ही कुछ बिहार के दरभंगा जिले की बेटी ज्योति ने किया है। अपने  बीमार पिता को इस कोरोना लॉकडाउन के दौरान गांव  दरभंगा के सिरहुल्ली पहुंचाने के लिए ज्योति ने कमर कसी और निकल पड़ी साइकिल लेकर अपनी मंजिल की ओर। लॉकडाउन में अपने पिता को साइकिल के पीछे बिठा कर गुड़गांव से दरभंगा  की ओर निकल पड़ी। ज्योति ने तकरीबन 12 सौ  किलोमीटर का संघर्षपूर्ण सफर को अपनी हिम्मत के साथ पुरा किया और पहुंच गई गुड़गांव से दरभंगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप हुई ज्योति की फेन

ज्योति के इस हौसले और हिम्मत की न सिर्फ भारत ने तारीफ की बल्कि उनके इस हौसले की कहानी अमेरिका तक को पसंद आई। जी हां, ज्योति की कहानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप का दिल जीत लिया है। बता दें कि इवांका ट्रंप ने ज्योति के हौसले और हिम्मत की काफी सरहना की। साथ ही उन्होनें इस कहानी को अपने ट्वीटर अकांउट पर शेयर किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि '15 साल की ज्योति कुमारी अपने घायल पिता को साइकिल से सात दिनों में 1,200 किमी दूरी तय करके अपने गांव ले गई। सहनशक्ति और प्यार की इस वीरगाथा ने भारतीय लोगों और साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है'। बता दें कि इस खबर को एचटी मीडिया समूह की वेबसाइट लाइव मिंट ने ज्योति की कहानी चलाई थी जिसे बाद में इवांका ट्रम्प ने ट्विटर पर साझा किया। ज्योति के इस हौसले और हिम्मत को देखते हुए साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उसे अगले महीने ट्रायल के लिए बुला लिया है। ज्योति ने बताया कि साइकिलिंग फेडरेशन के चेयरमैन ओंकार सिंह ने उसे फोन करके आशीर्वाद दिया है। 

ज्योति को कितना वक्त लगा गुड़गांव से दरभंगा पहुंचने में 

15 साल की ज्योति अपने बीमार पिता की सेवा करने  गुड़गांव गई थी। इसी बीच कोरोना लॉकडाउन लागू हो गया और ज्योति और पिता दोनों गुड़गांव में ही फंस गए है। इस कोरोना संकट के बीच बीमार पिता के पैसे भी खत्म हो गए। लेकिन प्रधानमंत्री राहत कोष से आए एक हजार खाते में आते ही ज्योति ने पैसे मिलाकर एक पुरानी साइकिल खरीदी और अपनी पिता को लेकर अपने गांव की ओर निकल पड़ी। बेटी के इस विचार को पहले पिता ने इंकार किया लेकिन बेटी के हिम्मत के आगे पिता को झुकना ही पड़ा। अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत ज्योति आठ दिनोंं में साइकिल चलाकर गुड़गांव से दरभंगा के सिरहुल्ली पहुंच गई। ज्योति के इस कड़ी मेहनत से राढ़ी पश्चिमी पंचायत के पकटोला स्थित डॉ. गोविंद चंद्र मिश्रा एजुकेशनल फाउंडेशन ने उसे और उसके पिता को नौकरी का प्रस्ताव दिया है। साथ ही इस फाउंडेशन ने सिरहुल्ली निवासी मोहन पासवान और उनकी पुत्री ज्योति कुमारी को हरसंभव मदद देने का भी निर्णय किया है।







भड़काऊ वीडियो पोस्ट करने के बाद ट्विटर ने रिपब्लिकन सांसद के अकाउंट किए बैन

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 18, 2021   12:02
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भड़काऊ वीडियो पोस्ट करने के बाद ट्विटर ने रिपब्लिकन सांसद के अकाउंट किए बैन

ट्विटर ने अमेरिका में रिपब्लिकन सांसद के अकाउंट पर रोक लगा दी है। सोशल मीडिया पर उन्होंने कई भड़काऊ वीडियो और कमेंट पोस्ट किए हैं। ग्रीन ने रविवार को एक स्थानीय समाचार को दिए साक्षात्कार का वीडियो पोस्ट किया था।

वाशिंगटन। ट्विटर ने रविवार को रिपब्लिकन सांसद मारजोरी टेलर ग्रीन के अकाउंट पर अस्थायी रोक लगा दी। सांसद के पोस्ट से कथित तौर पर नस्ली विचार और क्यूनन साजिश सिद्धांत के ऑनलाइन समर्थन की झलक मिल रही थी। ग्रीन ने एक बयान में कहा कि उनके अकाउंट को ‘‘बिना कोई विस्तृत जानकारी दिए’’ बंद कर दिया गया। उन्होंने रूढ़िवादी विचारों पर ट्विटर की ‘‘चुप्पी’’ को लेकर भी निंदा की। पेशे से कारोबारी ग्रीन राजनीति में नई हैं। नवंबर में वह जॉर्जिया 14वें डिस्ट्रिक्ट की प्रतिनिधि चुनी गयी थीं।

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सोशल मीडिया पर उन्होंने कई भड़काऊ वीडियो और कमेंट पोस्ट किए हैं। ग्रीन ने रविवार को एक स्थानीय समाचार को दिए साक्षात्कार का वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में वह जॉर्जिया के चुनाव अधिकारियों की निंदा करती दिख रही हैं और राष्ट्रपति चुनाव में धोखाधड़ी के दावों का समर्थन कर रही हैं। ट्विटर ने ग्रीन और अन्य लोगों के ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए संदेश लिखा कि चुनाव में धोखाधड़ी का दावा ‘‘विवाद पैदा करने वाला है और इससे हिंसा की आशंका’’ है। ग्रीन की टीम ने रविवार को ट्विटर के संदेश का स्क्रीनशॉट जारी कर बताया कि कंपनी ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में उनके अकाउंट पर 12 घंटे के लिए रोक लगा दी है।





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इंडोनेशिया भूकंप से मची तबाही,अब तक 81 की मौत; 800 के करीब लोग घायल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 18, 2021   11:58
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इंडोनेशिया भूकंप से मची तबाही,अब तक 81 की मौत; 800 के करीब लोग घायल

इंडोनेशिया भूकंप में मृतक संख्या बढ़कर 81 हो गई है।इससे पहले 2018 में पालू शहर में 7.5 तीव्रता का भूकंप और उसके बाद सुनामी आई थी। तब चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

ममूजू (इंडोनेशिया)। इंडोनेशिया में आए 6.2 तीव्रता के भूकंप के बाद घरों और इमारतों के मलबे में दबे लोगों की तलाश का काम सोमवार को बचावकर्मियों ने तेज कर दिया। भूकंप से कम से कम81 लोगों की मौत हुईं है। राष्ट्रीय आपदा मोचन एजेंसी के प्रवक्ता रादित्य जति ने कहा कि भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित ममूजू शहर और सुलावेसी द्वीप पर माजेने में सबसे अधिक बचावकर्मी और स्वयंसेवक तैनात हैं। उन्होंने बताया कि ममूजू में 70 और माजेने में 11 लोगों की मौत हुई है। वहीं करीब 27,850 लोगों का आश्रय स्थलों में रखा गया है।

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800 के करीब लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें से करीब आधे लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। ट्रकों के जरिए इलाकों में पानी, खाद्य सामग्री और चिकित्सीय सामग्री पहुंचाई जा रही है। बिजली आपूर्ति तथा फोन संचार सुविधाएं भी धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं। जति ने बताया कि माजेने में करीब 1150 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और ममूजू में क्षतिग्रस्त हुए घरों का आंकड़ों एकत्रित किया जा रहा है। इससे पहले 2018 में पालू शहर में 7.5 तीव्रता का भूकंप और उसके बाद सुनामी आई थी। तब चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।





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रिकॉर्ड में हुआ खुलासा, कैपिटल में हिंसा करने वाली रैली के पीछे ट्रंप समर्थकों का हाथ

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 18, 2021   10:59
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रिकॉर्ड में हुआ खुलासा, कैपिटल में हिंसा करने वाली रैली के पीछे ट्रंप समर्थकों का हाथ

‘एसोसिएटिड प्रेस’ द्वारा की गई रिकॉर्डों के अनुसार, कैपिटल में हिंसा करने वाली रैली के पीछे ट्रंप समर्थकों का हाथ था।सके अलावा प्रदर्शन के दौरान घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों के व्हाइट हाउस के साथ निकट संबंध हैं।

वाशिंगटन।अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चुनाव प्रचार मुहिम से जुड़े लोगों की वॉशिंगटन में उस रैली को आयोजित करने में अहम भूमिका थी, जिसने अमेरिकी कैपिटल में घातक हमला किया था। ‘एसोसिएटिड प्रेस’ द्वारा की गई रिकॉर्डों की समीक्षा में यह बात सामने आई है। ट्रंप समर्थक गैर सरकारी संगठन ‘विमेन फॉर अमेरिका फर्स्ट’ ने व्हाइट हास के निकट स्थित संघ के मालिकाना हक वाली जमीन ‘इलिप्स’ में छह जनवरी को ‘सेव अमेरिका रैली’ का आयोजन किया था, लेकिन ‘नेशनल पार्क सर्विस’ द्वारा दी गई मंजूरी की सूची में छह से अधिक ऐसे लोग हैं, जो स्टाफकर्मी थे और जिन्हें ट्रंप की 2020 चुनाव प्रचार मुहिम ने कुछ ही सप्ताह पहले हजारों डॉलर का भुगतान किया था। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान घटनास्थल पर मौजूद कई लोगों के व्हाइट हाउस के साथ निकट संबंध हैं।

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चुनाव परिणाम में धांधली का आरोप लगाने वाले ट्रंप के इलिप्स में दिए भाषण और इससे पहले की टिप्पणियों के कारण कैपिटल (अमेरिकी संसद भवन) में हिंसा भड़की थी। इसके बाद प्रतिनिधि सभा ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। ट्रंप अमेरिका के इतिहास में पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिनके खिलाफ दूसरी बार महाभियोग चलाया जा रहा है। जब ‘विमेन फॉर अमेरिका फर्स्ट’ से पूछा गया कि इस रैली के लिए वित्तीय मदद किसने दी थी और ट्रंप की मुहिम की इसमें क्या संलिप्तता थी, तो उसने इन संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया। इस रैली में हजारों लोग शामिल हुए थे। ट्रंप की प्रचार मुहिम ने एक बयान में कहा कि उसने ‘‘समारोह आयोजित नहीं किया या उसे वित्तीय मदद नहीं दी’’ तथा मुहिम का कोई भी सदस्य रैली के आयोजन में शामिल नहीं था। बयान में कहा गया है कि यदि किसी पूर्व कर्मी या मुहिम से स्वतंत्र रूप से जुड़े किसी व्यक्ति ने रैली में भाग लिया, तो उसने ‘‘ट्रंप मुहिम के निर्देश पर ऐसा नहीं किया’’।

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मेगन पावर्स छह जनवरी को हुए कार्यक्रम के प्रबंधकों में शामिल थी। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह जनवरी 2021 में ट्रंप की मुहिम से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने इस संबंध में किए गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। एपी की समीक्षा के अनुसार, रैली के लिए दी गई मंजूरी में ट्रंप की मुहिम से जुड़े कम से कम तीन ऐसे लोगों का जिक्र है, जिन्होंने प्रदर्शन से स्वयं को अलग करने की कोशिश की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल लॉक कर दिए हैं या बंद कर दिए हैं और रैली संबंधी ट्वीट हटा दिए हैं।





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