10000 करोड़ की नई स्कीम, चीन को सीधी टक्कर देगा भारत

कंटेनर निर्माण में चीन के एकाधिकार को तोड़ने के लिए कैबिनेट ने 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में स्वीकृत यह 13 वर्षीय योजना भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाएगी। इससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी और माल ढुलाई के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी।
वैश्विक अर्थशास्त्र की दुनिया में एक पुरानी कहावत है कि जो समंदर के रास्तों पर नियंत्रण रखता है वही दुनिया के व्यापार की दिशा तय करता है। लेकिन 21वीं सदी में इस कहावत में एक छोटा सा बदलाव आ चुका है। आज समंदर पर राज सिर्फ जहाजों का नहीं बल्कि उन लोहे के बक्सों का है जिन्हें हम शिपिंग कंटेनर कहते हैं। दुनिया का 90% से ज्यादा व्यापार समंदर के रास्ते होता है। आप जो कपड़े पहनते हैं, गाड़ियों के कलपुर्जे या कारखानों का कच्चा माल सब कुछ इन्हीं कंटेनरों में सफर करता है। लेकिन इस पूरी वैश्विक जीवन रेखा की सबसे कमजोर कड़ी क्या है? वो यह है कि पूरी दुनिया एक ही देश की मोहताज है और उसका नाम है चीन। दुनिया के 80 से 85 से 90% शिपिंग कंटेनरों का निर्माण अकेले चीन करता है। जब चीन चाहे कंटेनरों की कृत्रिम किल्लत पैदा हो सकती है। जब चीन चाहे माल भाड़ा आसमान छूने लगता है। लेकिन अब 28 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कमेटी ने इस एकाधिकार की रीड पर वार करने का फैसला किया है। योजना का नाम है कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम यानी सीएमपीएस।
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भारत जब भी अपने सामान का निर्यात बढ़ाता है हमारे निर्यातकों को खाली कंटेनरों की तलाश में भटकना पड़ता है। हमें विदेशी शिपिंग लाइनों और चीनी निर्माताओं की शर्तों पर कंटेनर किराए पर लेने पड़ते हैं और संकट के दौर में 41 40 फुट कंटेनर का किराया $500 से बढ़कर $8000 तक पहुंच गया है। इस अप्रत्याशित उछाल से भारतीय छोटे और मझिले उद्योगों यानी एमएसएमईस बर्बाद होने की कगार पर आ जाते हैं क्योंकि उनकी शिपिंग लागत बहुत ज्यादा यानी कि उसका उत्पादन की कीमत से ज्यादा हो जाता है। अब उसी को तोड़ने के लिए भारत ने एक बड़ा ऐलान किया है। कंटेनर की मैन्युफैक्चरिंग का प्रोग्राम कैबिनेट में अप्रूव हुआ। प्रधानमंत्री ने स्पोर्ट्स गुड मैन्युफैक्चरिंग की स्कीम भी अप्रूव की। ग्रामीण क्षेत्रों में किस तरह से कैपेसिटी बिल्डिंग हो और किस तरह से लोकल प्लानिंग, लोकल समस्याएं, लोकल रिसोर्सेज उनको लेके डेवलपमेंट हो। वो एक हमेशा से ड्रीम रहा है कि स्कीमें दिल्ली से बन जाए या स्टेट के कैपिटल से बन जाए या डिस्ट्रिक्ट से हो जाए तय। ऐसा नहीं। स्कीमें एक्चुअल में ग्रास रूट लेवल पर जो जरूरत हो उसके हिसाब से यह स्कीम है प्रधानमंत्री विकसित ग्राम योजना और केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों को और 68 लाख पेंशनर्स को डीए डीआर का माननीय प्रधानमंत्री जी का दीपावली का तोहफा यह चार आज के बड़े फैसले प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में कैबिनेट में हुए। सबसे पहले फैसले पर आता हूं मैं कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम आप सब जानते हो कि कंटेनर्स भारत के और दुनिया के व्यापार का एक प्रमुख फलक्रम है। जो भी सामान जाता है, एक्सपोर्ट होता है, इंपोर्ट होता है, बल्क कमोडिटीज को छोड़ दें तो एक्सेप्ट द बल्क कमोडिटीज एवरीथिंग एल्स इज़ बेसिकली ट्रांसपोर्टेड बाय कंटेनर्स। कंटेनर्स में दुनिया में कंसंट्रेशन है मैन्युफैक्चरिंग का।
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95% मैन्युफैक्चरिंग एक ही देश में होती है। इतना हैवी कंसंट्रेशन तो जितनी भी शिपिंग लाइंस, जितनी भी शिपिंग कंपनीज़ वो सब के सब रिक्वेस्ट करते हैं कि कोई तो दूसरा देश उभरे जो कंटेनर की मैन्युफैक्चरिंग में अपनी पोजीशन बनाए। आज का जो स्कीम प्रधानमंत्री जी ने कैबिनेट में अप्रूव किया है कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग स्कीम इस स्कीम में इस तरह के एलिमेंट्स हैं कि आने वाले समय में आने वाले कुछ वर्षों में कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग का भारत एक नया डेस्टिनेशन बनके उभरेगा। यह 13 इयर्स की स्कीम है। लॉन्ग टर्म स्कीम है। लॉन्ग टर्म इसलिए है कि मैन्युफैक्चरिंग में कोई भी चीज एकदम इमीडिएट रिजल्ट की नहीं होती है। मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़ा पर्सेंस चाहिए होता है। बहुत ही केयरफुल एफर्ट चाहिए होता है। बहुत ही एक सस्टेंड वे में एक-एक स्टेप बाय स्टेप आगे जाना होता है। जैसे मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में आपने देखा ब्लूमबर्ग के लोगों को शायद समझ में नहीं आया कि अब हमने कंपोनेंट एक्सपोर्ट करने भी चालू कर दिए हैं। तो वैसे ही कंटेनर में भी स्टेप बाय स्टेप फाइनल प्रोडक्ट कंपोनेंट्स कंपोनेंट्स के आगे रॉ मटेरियल वो सारी मैन्युफैक्चरिंग भारत में करेंगे। टोटल स्कीम का लेआउट 10,000 करोड़ है और इसके चार कंपोनेंट्स हैं। सबसे पहला जो कैपिटल इन्वेस्टमेंट होगा उस पे जो इंटरेस्ट लगता है उस इंटरेस्ट के ऊपर सब्वेंशन 3% का सबवेंशन।
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