संसद में है केवल एक सीट फिर भी श्रीलंका के प्रधानमंत्री बने विक्रमसिंघे, कर्ज, हिंसा और आर्थिक संकट झेल रहे देश को उबारने की होगी बड़ी चुनौती

संसद में है केवल एक सीट फिर भी श्रीलंका के प्रधानमंत्री बने विक्रमसिंघे, कर्ज, हिंसा और आर्थिक संकट झेल रहे देश को उबारने की होगी बड़ी चुनौती
ANI

नए प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे 1994 से यूनाइटेड नेशनल पार्टी के सर्वोसर्वा हैं। अनुभवी राजनेता माने जानेवाले विक्रमसिंघे चार बार श्रीलंका के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

श्रीलंका में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पूरी कैबिनेट के साथ इस्तीफा दे चुके हैं। देश में आर्थिक संकट और प्रदर्शन के बीच यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के प्रधान मंत्री के रूप में शपथ ली। नए प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे 1994 से यूनाइटेड नेशनल पार्टी के सर्वोसर्वा हैं। अनुभवी राजनेता माने जानेवाले विक्रमसिंघे चार  बार श्रीलंका के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। हालांकि साल 2019 में आंतरिक कलह व अन्य कारणों से उनको प्रधानंत्री पद छोड़ना पड़ा था। विक्रमसिंघे राजपक्षे परिवार के करीबी माने जाते हैं। 

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कर्ज, हिंसा और आर्थिक संकट की मार झेल रहे श्रीलंका में पिछले दो दिनों से कोई सरकार ही नहीं था। हालांकि राष्ट्रपति ने बुधवार को देर रात देश के नाम संबोधन में इस्तीफा देने से इनकार कर दिया, लेकिन इस सप्ताह एक नए प्रधानमंत्री और नए मंत्रिमंडल की नियुक्ति करने का वादा किया, जो संवैधानिक सुधार पेश करेगा। पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को अंतरिम सरकार का नया प्रधानमंत्री बनाए जाने की अटकले शुरू हो गई थीं। देश की सबसे पुरानी पार्टी यूएनपी ने 2020 में पिछले संसदीय चुनाव में केवल एक सीट जीती थी। 

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 नए प्रधानमंत्री के सामने कई चुनौतियां

श्रीलंका को ऐसे नेतृतव की तलाश है जो खस्ता अर्थव्यवस्था और तंगहाली झेल रहे देश की स्थिति में कोई चमत्कारिक परिवर्तन ला सके। ऐसे में अनुभवी राजनेता रहे विक्रमसिंघे के हाथों में देश की कमान के साथ ही उनके सामने कई सारी चुनौतियां खड़ी हैं। हालांकि श्रीलंका में नए सरकार के गठन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोस से उन्हें सहायता मिलने की उम्मीद है। जैसा कि आईएमएफ मे कहा है कि जैसे ही श्रीलंका में नई सरकार का गठन हो जाता है तो उसे आर्थिक सहायता देने के लिए नीतिगत मसलों पर चर्चा शुरू की जाएगी। गौरतलब है कि आईएमएफ ने श्रीलंका के साथ अपनी अंतिम मीटिंग में देश को 300 से 600 मिलियन डॉलर की सहायता देने का भरोसा दिया था।