ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए अमेरिका में 60 बार लगाई थी गुहार, पाकिस्तान पर अमेरिका का सबसे बड़ा खुलासा

भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि संपर्क बढ़ाने के लिए अमेरिका में विभिन्न दूतावास, प्राइवेट कंपनियां और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों और कन्सलटेंट्स का सहारा लेते हैं। भारतीय दूतावास भी 1950 के बाद से ही आवश्यकता के अनुसार ऐसी फर्मों के साथ अनुबंध करता रहा है।
पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान भारत की ओर से तय सैन्य कार्रवाई की सोच से कांप रहा था। वह किसी भी तरह से भारत का ऑपरेशन सिंदूर रोकना चाहता था। इसके लिए उसने लॉबिंग के तहत अपने राजनयिकों के जरिए अमेरिका में शीर्ष प्रशासिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अफसरों के साथ करीब 60 बार संपर्क किया था। अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (फारा) के तहत दाखिल दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने ईमेल, फोन कॉल, वनटूवन बैठकों के जरिए अप्रैल अंत से लेकर चार दिनी ऑपरेशन सिंदूर के बाद तक संघर्ष विराम के लिए बैठकें जारी रखीं। वह किसी भी तरह से भारत पर वॉशिंगटन का दबाव बनाकर युद्ध रुकवाना चाहता था। उसने ट्रंप प्रशासन तक तेजी से पहुंच बनाने और व्यापार व कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए छह लॉबिंग फमों पर करीब 45 करोड़ रु. खर्च किए थे। अप्रैल और मई के दौरान पाकिस्तान का लॉबिंग खर्च भारत की तुलना में कहीं अधिक बताया गया।
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अमेरिकी लॉबिंग फर्म का इस्तेमाल
दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि संपर्क बढ़ाने के लिए अमेरिका में विभिन्न दूतावास, प्राइवेट कंपनियां और व्यावसायिक संगठन लॉबिंग फर्मों और कन्सलटेंट्स का सहारा लेते हैं। भारतीय दूतावास भी 1950 के बाद से ही आवश्यकता के अनुसार ऐसी फर्मों के साथ अनुबंध करता रहा है। अमेरिका में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस में फरिन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत विदेशी सरकारों के साथ लॉबिंग करना कानूनी और स्थापित प्रथा है। जस्टिस विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसका पूरा रिकॉर्ड है कि कब-कब, किसने किन लॉबिंग फर्मों के साथ संपर्क किया। इसे किसी प्रकार की मध्यस्थता के तौर पर देखना एकदम गलत है। भारत द्वारा नियुक्त एक अमेरिकी लॉबिंग फर्म ने एक सार्वजनिक दस्तावेज में खुलासा किया कि उसने 10 मई को ट्रंप प्रशासन के चार अधिकारियों से संपर्क करने में अमेरिकी दूतावास की सहायता की थी। हालांकि, भारतीय दूतावास ने कहा कि फर्म को नियुक्त करना स्थानीय प्रथाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप था।
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जेसन मिलर के नेतृत्व वाली एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी को भारतीय दूतावास ने अप्रैल में कथित तौर पर एक वर्ष के लिए 1.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर में नियुक्त किया था। यह भारतीय दूतावास द्वारा नियुक्त की गई दूसरी लॉबिंग फर्म थी। अगस्त 2025 में, भारतीय दूतावास ने अमेरिका को भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू होने से कुछ ही दिन पहले रणनीतिक संचार सेवाएं प्रदान करने के लिए एक और लॉबिंग फर्म को नियुक्त किया था। उस समय के विदेशी एजेंट पंजीकरण दस्तावेजों के अनुसार, दूतावास ने 15 अगस्त से शुरू होने वाले तीन महीने के अनुबंध पर मर्करी पब्लिक अफेयर्स के साथ हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 75,000 डॉलर का मासिक शुल्क दिया जा रहा था।
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