जिगरी दोस्त रूस के सामने भारत को खड़ा करने की थी प्लानिंग, लेकिन मोदी...ट्रंप ने क्या खुलासा कर दिया

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस चाहते थे कि यूक्रेन में युद्ध विराम की निगरानी के लिए यूरोप की बजाय भारत और सऊदी अरब जैसे देशों की सेना तैनात की जाए। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सुझाव को तुरंत खारिज कर दिया था। यह दावा 23 जून को रिलीज हुई किताब रिजीम चेंज में किया गया है।
भारत लंबे वक्त से चले आ रहे रशिया यूक्रेन वॉर को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है और सबसे बड़ी बात इस दावे में भारत का भी नाम सामने आ रहा है। दावा यह है कि अमेरिका में इस बात की चर्चा थी कि संभावित रशिया यूक्रेन सीजफायर के बाद यूक्रेन में भारतीय सैनिकों को भेजा जाएगा। दावा यह है कि अमेरिका के अंदर एक चर्चा के दौरान यूक्रेन में संभावित सीज फायर की निगरानी के लिए भारत के सैनिकों की तैनाती का सुझाव दिया गया था। किसने भारतीय सैनिकों को लेकर सुझाव दिया और अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कुछ कहा। दरअसल यूक्रेन युद्ध को लेकर एक नई किताब सामने आई है। जिसमें यह दावा किया गया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस चाहते थे कि यूक्रेन में युद्ध विराम की निगरानी के लिए यूरोप की बजाय भारत और सऊदी अरब जैसे देशों की सेना तैनात की जाए। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सुझाव को तुरंत खारिज कर दिया था। यह दावा 23 जून को रिलीज हुई किताब रिजीम चेंज में किया गया है। किताब के मुताबिक 30 जनवरी 2025 को वाइट हाउस में यूक्रेन युद्ध पर एक बैठक हो रही थी। बैठक में युद्ध खत्म करने और सीज फायर लागू कराने के तरीकों पर चर्चा चल रही थी। बैठक में एक प्रस्ताव रखा गया था कि अगर रशिया यूक्रेन के बीच सीजफायर होता है तो उसकी निगरानी के लिए कुछ विदेशी सैनिक वहां तैनात किए जा सकते हैं।
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शुरुआत में फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड जैसे देशों पर चर्चा हुई। यानी कि यूरोप के देशों को लेकर चर्चा हुई। लेकिन बाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने भारत और सऊदी का नाम आगे रखा। जेडी वेंस का कहना था कि अगर नेटो देशों के सैनिक यूक्रेन में पहुंचते हैं तो रशिया इसे उकसावे की कारवाई बांध सकता है। इससे तनाव और बढ़ जाएगा और युद्ध और ज्यादा फैल जाएगा। इसके बाद जेडी वेंस ने सुझाव दिया कि यूरोपीय देशों की जगह भारत और सऊदी अरब जैसे गैर यूरोपीय देशों के सैनिकों को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। उनका मानना था कि इन देशों के संबंध रशिया से अच्छे हैं और एक तरह से यह उकसावे की कारवाई भी नहीं होगी। लेकिन किताब के मुताबिक जेडी वेंस का यह सुझाव ट्रंप को सही नहीं लगा। ट्रंप ने भारत का नाम सुनते ही इस सुझाव को खारिज कर दिया। बताया गया कि ट्रंप हंसते हुए बोले कि भारत ऐसा नहीं करेगा और इस तरह के मिशन पर पैसा खर्च नहीं करेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत ऐसी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख साफ था। उनका कहना था कि अगर ब्रिटेन या फ्रांस अपने सैनिक भेजना चाहते हैं तो उनका यह फैसला है। लेकिन अमेरिका किसी नए सैन या आर्थिक बोझ में नहीं पड़ना चाहता।
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