फिर शुरू होगा 'कैश' वाला जमाना! UPI पेमेंट पर आपको नहीं देना होगा चार्ज, लेकिन क्या मर्चेंट ट्रांजैक्शन का असर ग्राहकों पर पड़ सकता है?

UPI
AI Image
अभिनय आकाश । Aug 10 2026 2:38PM

मंत्रालय ने कहा कि हकीकत में यह संशोधन इस बात का प्रावधान करने के लिए है, जिससे यूपीआई लंबे समय तक चलता रहे, टेक्नॉलजी बेहतर हो सके और जो भी जोखिम उभरे, उनका अच्छी तरह से सामना किया जा सके। मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई से बढ़ते लेनदेन को देखते हुए साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही, ज्यादा कंपनिया अपना कामकाज बढ़ा सकें, इसके लिए प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने की जरूरत भी है। इसके लिए आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल की जरूरत है।

चाय की टपरी पर 5 रुपये की कटिंग से लेकर बड़े-बड़े मॉल्स में हज़ारों का सामान खरीदने तक'स्कैन किया और पे किया'ये अब हमारे आम दिन चर्या का हिस्सा बन चुका है। आज सब्जी की रेहड़ी वाला भी छुट्टे पैसे मांगने की जगह सीधा क्यूआर कोड (QR Code) आगे बढ़ा देता है। डिजिटल इंडिया ने हमारी जेब से कैश का झंझट तो खत्म कर दिया, लेकिन क्या यह आराम अब ज़्यादा दिन का मेहमान नहीं है? भारत फिर से कैश वाले ज़माने में लौट रहा है! भारत-पे के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया पर ऐसा ही कुछ दावा करके पूरे देश में खलबली मचा दी है। सुनने में अजीब ज़रूर लगेगा, पर जिस रफ्तार से नियम बदल रहे हैं और पेमेंट्स पर पेंच फंस रहे हैं, वो दिन दूर नहीं जब आपको अपनी जेब में फिर से गांधी जी के नोटों की गड्डी सजानी पड़ जाए! क्या सच में मुफ़्त यूपीआई का ज़माना जाने वाला है? क्या आपके गूगल पे, फोनपे और पेटीएम से अब पैसे कटने वाले हैं या फिर यह सिर्फ दुकानदारों का नया सिरदर्द है? आइए, यूपीआई पर चार्ज के इस पूरे गणित का पर्दाफाश करते हैं!

एमडीआर आखिर होता क्या है? 

जब आप किसी दुकान पर कार्ड या डिजीटल पेमेंट से पैसा देते हैं तो पेमेंट सिस्टम को चलाने वाली कंपनियों और बैंकों को एक फीस मिलती है। इसी फीस को एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट कहा जाता है। फिलहाल यूपीआई पूरी तरह फ्री है। इसका मतलब है कि बैंकों और कंपनियों को इसे चलाने के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ता है। इस पूरे विवाद की जड़ में है टैक्सेशन एंड अदर लॉ अमेंडमेंट बिल 2026। 6 अगस्त 2026 को लोकसभा में हंगामे के बीच बगैर चर्चा ध्वनि मत से इस बिल को पारित किया गया। यह बिल पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 में संशोधन करता है। अब तक कानून यह था कि यूपीआई और रुपए डेबिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान पर कोई भी बैंक या सर्विस प्रोवाइडर कोई शुल्क माने एमडीआर नहीं वसूल कर सकता है। पुराने कानून की धारा 10 ए स्पष्ट रूप से बैंकों को ऐसे चार्ज लगाने से रोकती थी। लेकिन नए संशोधन ने सरकार को यह अधिकार दे दिया है कि वह भविष्य में नोटिफिकेशन के जरिए यह तय कर सकें कि किन डिजिटल पेमेंट मोड पर शुल्क लगाया जा सकता है और किन्हें मुफ्त रखा जाना चाहिए। आसान भाषा में कहें तो अब तक जो कानूनी गारंटी थी कि यूपीआई मुफ्त रहेगा वो खत्म हो गई है।  

लोकसभा पास कर चुकी है बिल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज ( अमेंडमेंट) बिल 2026 पेश किया था, जिसे लोकसभा पास कर चुकी है। यह बिल सरकार को UPI और रूपे कार्ड से होने वाले ट्रांजैक्शंस पर जीरो MDR की व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी आधार देता है। अभी बैंक और पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियां यूपीआईऔर रूपे डेबिट कार्ड के जरिए पेमेंट के लिए यूजर्स से कोई चार्ज नहीं ले सकती हैं। मंत्रालय ने बयान में कहा, 'इस बिल के संसद से पास होने के बाद UPI और अन्य सेवाओं पर NPCI की अध्यक्षता वाली कमिटी तय करेगी कि कोई एमडीआर लगेगा या नहीं। 

सरकार ने साफ की तस्वीर

सरकार यह स्पष्ट रूप से बताना चाहती है कि यूजर्स के लिए कोई चार्ज नहीं होगा। पेमेंट करने वाले उपभोक्ताओं पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगेगा। सभी पर्सन टु पर्सन ट्रांजैक्शन भी बिना किसी चार्ज के होते रहेंगे। मर्चेंट्स के बारे में मंत्रालय ने कहा कि एमडीआर चार्जेज जब भी लागू होंगे, ये कुछ ही मर्चेट ट्रांजैक्शंस पर लगेंगे। 

संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?

मंत्रालय ने कहा कि हकीकत में यह संशोधन इस बात का प्रावधान करने के लिए है, जिससे यूपीआई लंबे समय तक चलता रहे, टेक्नॉलजी बेहतर हो सके और जो भी जोखिम उभरे, उनका अच्छी तरह से सामना किया जा सके। मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई से बढ़ते लेनदेन को देखते हुए साइबर सिक्योरिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही, ज्यादा कंपनिया अपना कामकाज बढ़ा सकें, इसके लिए प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने की जरूरत भी है। इसके लिए आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल की जरूरत है। 

 आरबीआई गवर्नर ने भी दिलाया भरोसा

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा पेमेंट जैसे पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जरूरी है और इसके लिए किसी ना किसी को तो पेमेंट करना ही होगा। हमारे सामने आसान विकल्प है। या तो आम जनता टैक्स के जरिए इसके लिए पेमेंट करें या फिर यूजर पे मॉडल को अपनाते हुए मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर लागू करें। अभी सरकार हमारे लिए संशोधन ला रही है। लागत का पेमेंट तो किसी ना किसी को करना ही होगा। द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सरकारी आंकड़े कहते हैं कि सरकार ने पेमेंट कंपनियों को नुकसान से बचाने के लिए अब तक लगभग 11349 करोड़ की सब्सिडी दी है। लेकिन यूपीआई का दायरा इतना बढ़ गया है कि अब सरकार के लिए हर साल हजारों करोड़ की सब्सिडी देना मुश्किल हो रहा है। जुलाई 2026 में ही यूपीआई ने 23.6 अरब ट्रांजैक्शन किए जिनकी कीमत 29.9 ट्रिलियन थी। इतनी बड़ी व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। 

बाहरी दबाव वाला दावा कितना सही?

इस पूरे फैसले पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। 6 अगस्त को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक लंबा चौड़ा ट्वीट किया जिसमें दावा किया कि मोदी सरकार द्वारा लाया गया 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 उस वैधानिक गारंटी को समाप्त कर देता है जो अब तक यूपीआई लेने देन को शुल्क मुफ्त बनाए हुए था। उन्होंने कहा था कि 'यह कदम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें यूपीआई और RuPay के शुल्क-मुक्त होने की आलोचना की गई थी और आरोप लगाया गया था कि उन्होंने Visa और मास्टरकार्ड जैसे अमेरिकी पेमेंट प्लेटफॉर्मों को बाजार से बाहर कर दिया है। क्या सरकार अपने अच्छे मित्र डॉनल्ड ट्रंप के दबाव में डिजिटल भुगतान क्षेत्र को अमेरिकी कपनियों के लिए खोलना चाहती है? इस आरोप पर मंत्रालय ने कहा यह आधारहीन, पूरी तरह झूठ और गुमराह करने वाली बात है। वित्त मंत्री ने कहा कि एमडीआर का पैसा ग्राहकों से नहीं बल्कि मर्चेंट से लिया जाता है। इससे बैंक और फिनटेक कंपनियां यूपीआई की तकनीक, सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निवेश कर सकेंगी जिसका फायदा सभी यूपीआई यूज़र्स को मिलेगा। 

मर्चेंट ट्रांजक्शन का असर आखिरकार ग्राहकों पर पड़ सकता है? 

जयराम रमेश ने इसका जवाब दिया। उनका कहना है कि सरकार भले ही यह कह रही हो कि एमडीआर दुकानदार से लिया जाएगा। ग्राहक से नहीं लेकिन इसका असर आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनका तर्क है कि दुकानदार अपनी लागत निकालने के लिए सामान की कीमत बढ़ा सकते हैं या अलग-अलग पेमेंट तरीकों के लिए अलग-अलग कीमत रख सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मर्चेंट सिर्फ बड़े कारोबारी नहीं होते। इसमें छोटे दुकानदार, किराना स्टोर और रे पटरी वाले भी शामिल हैं। यानी अगर कोई चार्ज आया तो उसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है। यानी सरकार और विपक्ष के बीच असली सवाल यही है कि अगर भविष्य में यूपीआई और एमडीआर आता है तो उसका बोझ आखिर किस पर पड़ेगा? 

All the updates here:

अन्य न्यूज़