Prabhasakshi NewsRoom: Trump के हमले से बौखलाये Iran ने Bahrain से Jordan तक कर दी मिसाइलों की बारिश

US Iran War
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इस भड़कते संकट की शुरुआत उस वक्त हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकाप्टर को मार गिराया। ट्रंप ने इसे अमेरिका की सैन्य ताकत पर सीधी चोट बताते हुए तुरंत जवाबी कार्रवाई का एलान कर दिया।

पश्चिम एशिया की धरती पर बारूद का ऐसा तूफान उठा है जिसने पूरी दुनिया की सांसें रोक दी हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिडी यह आग अब उस महाविस्फोट की चेतावनी बन चुकी है जो पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है। होरमुज जलडमरूमध्य से लेकर बहरीन, जॉर्डन और दक्षिणी लेबनान तक मिसाइलों, ड्रोन और हवाई हमलों की गूंज ने यह साफ कर दिया है कि अब हालात नियंत्रण से बाहर जाने की कगार पर पहुंच चुके हैं।

इस भड़कते संकट की शुरुआत उस वक्त हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकाप्टर को मार गिराया। ट्रंप ने इसे अमेरिका की सैन्य ताकत पर सीधी चोट बताते हुए तुरंत जवाबी कार्रवाई का एलान कर दिया। अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटों बाद ईरान के दक्षिणी इलाकों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। बंदर अब्बास, किश्म, सिरिक, मिनाब और जास्क जैसे रणनीतिक इलाकों में जोरदार धमाके सुनाई दिए। अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरानी राडार और संचार ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में जल ढांचा और नागरिक सुविधाएं तबाह हुई हैं।

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ईरान ने भी पीछे हटने की बजाय सीधी चुनौती देने का रास्ता चुना। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें बेडे को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए। बहरीन में मिसाइल चेतावनी सायरन बज उठे और पूरा इलाका दहशत में डूब गया। ईरान ने साफ शब्दों में कहा कि अगर अमेरिका ने एक और हमला किया तो जवाब “कुचल देने वाला और निर्णायक” होगा। ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर और कमांड सेंटर को निशाना बनाया है।

इतना ही नहीं, ईरान ने जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी हमला बोल दिया। जॉर्डन ने दावा किया कि उसने अमेरिकी ठिकानों की ओर बढ़ रही पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। वहीं कुवैत में भी हवाई सुरक्षा तंत्र सक्रिय करना पड़ा। इन हमलों ने यह साफ कर दिया कि अब यह संघर्ष केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरा पश्चिम एशिया युद्ध के मुहाने पर खड़ा है।

दूसरी ओर इजरायल ने भी मोर्चा संभाल लिया है। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के टायर क्षेत्र समेत कई इलाकों में हिजबुल्लाह के ड्रोन और मिसाइल लांच ठिकानों पर जबरदस्त हवाई हमले किए। इजरायल का दावा है कि उसने छह महत्वपूर्ण ठिकानों को तबाह कर दिया है। सेना ने धुंधले हवाई वीडियो जारी कर यह दिखाने की कोशिश की कि कैसे लेबनान के गांवों और घरों पर बम बरसाए गए। लेकिन इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने भी हमला तेज कर दिया।

हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों और सैन्य कमांड ठिकानों पर चौदह हमले किए हैं। बिय्यादा, रशफ, अल कवजा और कंतारा जैसे इलाकों में रॉकेट और ड्रोन हमलों की खबरों ने इजरायल की चिंता बढ़ा दी है। हिजबुल्लाह ने यह भी दावा किया कि उसने इजरायली हर्मीस-450 ड्रोन को मार भगाया और समुद्री ठिकानों पर विस्फोटक ड्रोन दागे।

हालांकि इस भीषण तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि उसकी हालिया सैन्य कार्रवाई फिलहाल पूरी हो चुकी है और वह आगे तत्काल युद्ध नहीं चाहता। दूसरी तरफ ईरान ने भी औपचारिक रूप से युद्धविराम की घोषणा नहीं की, लेकिन उसके बयानों में यह संकेत जरूर मिला कि वह फिलहाल पूर्ण युद्ध से बचना चाहता है। इसके बावजूद जमीन पर जारी हमले और जवाबी हमले यह बता रहे हैं कि हालात किसी भी क्षण विस्फोटक मोड़ में जा सकते हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संकट को और भड़का दिया जब उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य कोई अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह ईरान और ओमान की साझा संप्रभुता के तहत आता है। उनका यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि यहां तनाव और बढ़ा तो पूरी दुनिया में तेल संकट और आर्थिक भूचाल आ सकता है।

इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका ईरान के ताजा हमलों को सहकर पीछे हटेगा या फिर एक और विनाशकारी जवाब देगा। देखा जाये तो पश्चिम एशिया की धरती पर फैल चुकी यह आग अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रही, बल्कि यह तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक जैसी दिखाई देने लगी है। मिसाइलों की गूंज, ड्रोन की तबाही और युद्ध के खुले ऐलान ने दुनिया को उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां एक गलत फैसला पूरी मानवता को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकता है।

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