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रोहिंग्याओं को जल्दबाजी में म्यामां लौटाने की योजना रोके बांग्लादेश: विशेषज्ञ

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Nov 9 2018 2:01PM

रोहिंग्याओं को जल्दबाजी में म्यामां लौटाने की योजना रोके बांग्लादेश: विशेषज्ञ
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संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने बांग्लादेश से अनुरोध किया है कि वह रोहिंग्या शरणार्थियों को जल्दबाजी में सीमा पार वापस उनके देश में संकटग्रस्त रखाइन प्रांत भेजने की योजना पर विराम लगाये, क्योंकि आशंका है कि म्यामां की ओर से सुरक्षा की गारंटी के बिना वहां फिर से उत्पीड़न और भयावह हिंसा शुरू हो सकती है।
 
म्यामां में मानवाधिकारों की स्थिति पर विशेष प्रतिवेदक यांघी ली ने कहा, ‘‘जवाबदेही के अभाव में रोहिंग्या को वर्ष 2016 और 2017 में सुरक्षा बलों के हाथों ना सिर्फ भयावह हिंसा झेलनी पड़ी बल्कि उन्होंने म्यामां में दशकों तक नियमित भेदभाव और उत्पीड़न का दंश झेला।’’ यांघी ली ने कहा, ‘‘मैं बांग्लादेश और म्यामां की सरकारों से अनुरोध करती हूं कि वे रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उन्हें उनके देश जल्दबाजी में वापस भेजने की योजना पर रोक लगायें। रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित, टिकाऊ, स्वैच्छिक और सम्मान के साथ देश वापसी सुनिश्चित करने के लिये वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों एवं शरणार्थी कानून के दायित्वों का पालन करें।’’
 
अगस्त 2017 में सेना के नेतृत्व वाली कार्रवाई में चौतरफा हत्या, बलात्कार और गांवों को जलाये जाने के बाद रोहिंग्याओं की 10 लाख आबादी में करीब तीन चौथाई म्यामां के रखाइन प्रांत से पलायन कर गये और उन्होंने पड़ोसी बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में शरण ली। दिसंबर 2017 में बांग्लादेश और म्यामां दोनों रोहिंग्याओं की देशवापसी की योजना पर सहमत हुए थे, जिसके तहत मध्य नवंबर में शिविरों से सैकड़ों रोहिंग्याओं को वापस भेजने की शुरूआत होगी।

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