Shakahola केस में 190 बच्चों की मौत के जिम्मेदार Paul Mackenzie को मिली 200 साल की जेल

केन्या की एक अदालत ने पंथ प्रमुख पॉल नथेंगे मैकेंजी को 200 साल जेल की सजा सुनाई है। मैकेंजी पर ईसा मसीह से मिलने के नाम पर अनुयायियों को भूखा रखने के लिए मजबूर करने का आरोप है। साल 2023 के शाकाहोला मामले में जंगल से 429 शव बरामद किए गए थे, जिनमें 190 बच्चे भी शामिल थे।
अंधविश्वास और धर्म के नाम पर लोगों को मौत के रास्ते पर धकेलने के मामले में केन्या की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पॉल नथेंगे मैकेंजी नाम के एक पंथ के प्रमुख को कुल 200 साल जेल की सजा सुनाई है। उस पर अपने अनुयायियों को भूखा रहने के लिए मजबूर करने और इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौत का जिम्मेदार होने का आरोप है। मरने वालों में 190 बच्चे भी शामिल थे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मैकेंजी ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि भूखे रहने से वे सीधे ईसा मसीह से मिल सकेंगे।
यह मामला साल 2023 में सामने आए शाकाहोला सामूहिक मौत मामले से जुड़ा है। केन्या के तटीय इलाके में स्थित शाकाहोला जंगल से जांच के दौरान कुल 429 शव बरामद किए गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मैकेंजी खुद को पादरी बताता था और गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च नाम से एक धार्मिक संगठन चलाता था। आरोप है कि उसने अपने अनुयायियों को बताया था कि दुनिया का अंत करीब है और उससे पहले ईसा मसीह से मिलने के लिए उन्हें खाना-पीना छोड़ना होगा।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मैकेंजी और उसके साथियों ने किलिफी काउंटी के शाकाहोला जंगल में लोगों के लिए एक बेहद खतरनाक उपवास कार्यक्रम चलाया था। इसमें अनुयायियों को भोजन और पानी दोनों छोड़ने के निर्देश दिए गए थे। कथित तौर पर इस प्रक्रिया में सबसे पहले बच्चों को भूखा रखा गया, इसके बाद महिलाओं और फिर पुरुषों को ऐसा करने के लिए कहा गया। लंबे समय तक भोजन-पानी नहीं मिलने के कारण कई लोगों की जान चली गई।
जांच के दौरान सामने आया कि यह सब केवल धार्मिक उपवास तक सीमित नहीं था, बल्कि लोगों पर दबाव और हिंसा का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप है कि जो लोग उपवास करने से इनकार करते थे या वहां से भागने की कोशिश करते थे, उन्हें पीटा जाता था, बांधकर रखा जाता था या बाहर जाने से रोका जाता था। शवों की जांच में भी भूख को मौत का एक बड़ा कारण पाया गया। कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान भी मिले, जो उनके साथ मारपीट किए जाने की ओर इशारा करते थे।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि ये मौतें लोगों की अपनी इच्छा से किए गए धार्मिक उपवास का नतीजा नहीं थीं, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित योजना थी। केन्या की संसद की एक समिति की रिपोर्ट में भी मैकेंजी के काम करने के तरीके को लेकर कई गंभीर बातें सामने आई थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, मैकेंजी ने 2020 में कोरोना महामारी के दौरान अपने अनुयायियों की संख्या बढ़ाने पर खास ध्यान दिया था। इसके लिए उसने लोगों को जोड़ने वाले एजेंटों की मदद ली। आरोप है कि कमजोर आर्थिक और सामाजिक स्थिति वाले लोगों को जमीन देने का लालच दिया गया और उन्हें अपनी संपत्ति बेचकर पैसे संगठन को सौंपने के लिए कहा गया।
संसदीय समिति के मुताबिक, शाकाहोला के दूरदराज जंगल को इसलिए चुना गया था, ताकि अनुयायियों का बाहरी दुनिया से संपर्क खत्म किया जा सके। वहां लोगों को शिक्षा, इलाज और सरकारी पहचान पत्र छोड़ने के लिए भी कहा गया था। रिपोर्ट में एक हथियारबंद समूह का जिक्र भी है, जिस पर उपवास के आदेशों का पालन करवाने और विरोध करने वालों को हिंसा के जरिए रोकने का आरोप है। इस मामले ने धार्मिक विश्वास की आड़ में लोगों के शोषण और उनकी सुरक्षा को लेकर केन्या में गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अन्य न्यूज़














