ईरान का रौद्र रूप देख ट्रंप-नेतन्याहू झल्लाए, खोज लिया बलि का बकरा, मोसाद चीफ से क्यों खफा?

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अभिनय आकाश । Mar 25 2026 10:29AM

ट्रंप वो कर कर हार गए हैं और ईरान जिस तरह से तन कर खड़ा हुआ है। एक कदम भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। अब वो सीधे तौर पर अपने डिफेंस सेक्रेटरी अपने डिफेंस मिनिस्टर जिसको कहते हैं उन पर आरोप मर रहे हैं। पीट हेक्कत पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने कहा था कि ईरान पर हमला करके देख लेते हैं।

बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से निकले हम। कुछ यही स्थिति इसराइल और अमेरिका की हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स तो कुछ इसी तरह के दावे कर रही हैं। स्थिति यह है कि प्रेसिडेंट ट्रंप और पीएम नेतन्याहू अब किसी और का कंधा ढूंढ रहे हैं जिस पर उन्होंने रखकर बंदूक चलाई थी, या वो सर ढूंढ रहे हैं जिस पर कि ठीकरा फोड़ा जाए।  ये कवायद भी शुरू हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि अमेरिका और इसराइल इतने ज्यादा झुंझुला गए हैं कि समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें। इस ईरान जहां पर टस से मस नहीं हुआ है। जंग का 25वां दिन है  इधर प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने डिफेंस सेक्रेटरी यानी अमेरिका के जो डिफेंस मिनिस्टर हैं पीट हेक्सेथ उन पर ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया है। एक प्रोग्राम में उन्होंने सीधे लफ्जों में कहा साफ तौर पर कहा कि इन्होंने यानी पीट हेक्सेथ ने हमें बरगलाया। हमें गुमराह किया और इन्होंने ही कहा था कि एक बार ईरान पर सैन्य कारवाई करके देख लेते हैं। आप देखिए किस तरह से अपना दामन छुड़ाने अपना दामन बचाने की कोशिश कर रहे है।

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ट्रंप वो कर कर हार गए हैं और ईरान जिस तरह से तन कर खड़ा हुआ है। एक कदम भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। अब वो सीधे तौर पर अपने डिफेंस सेक्रेटरी अपने डिफेंस मिनिस्टर जिसको कहते हैं उन पर आरोप मर रहे हैं। पीट हेक्कत पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने कहा था कि ईरान पर हमला करके देख लेते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट यह भी बताती हैं कि इजराइल ने हमला किया या इजराइल हमला करना चाह रहा था इसलिए अमेरिका बीच में कूद गया। यानी अमेरिका को यह पता ही नहीं था कि करना क्या है या प्रेसिडेंट ट्रंप को यह पता नहीं था कि करना क्या है ईरान के खिलाफ और अब वो फंस गए हैं। मोसाद के चीफ से जो कि इजराइल की खुफिया एजेंसी है और जिसका दुनिया भर में बड़ा नाम है कि मोसाद ऐसी है, मोसाद वैसी है तो मोसाद किसी भी देश में एक्शन ले सकती है। मोसाद कहीं भी ढूंढ करके अपने शिकार को मार देती है। टारगेट किलिंग में माहिर है और तमाम तरह के बातें पिछले 60-70 सालों से मोसाद को लेकर बनाए जा रहे हैं। ब्रांड मोसाद बनाया जा रहा है। अब वही पीएम नेतन्याहू मोसाद के चीफ से नाराज हैं। जिनका नाम है मोसाद के जो चीफ हैं उनसे वो नाराज चल रहे हैं। डेविड बर्निया। 

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डेविड बर्निया पर आरोप लगाते हुए वो कह रहे हैं कि डेविड बर्निया ने जो प्रोग्राम दिया था ईरान के हवाले से कि हम एक से दो दिन जबरदस्त हमले ईरान में करेंगे। उसके बाद आवाम बागी हो जाएगी। और जैसे ही बमबारी रुकेगी, जनता सड़कों पर आ जाएगी। बगावत कर देगी अपनी रिजीम के खिलाफ, इस्लामिक रेवोल्यूशन के खिलाफ। बड़े पैमाने पर ईरान में दंगे होंगे और इस बीच हम तख्ता पलट करवा देंगे, सरकार बदला देंगे। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। किसी भी तरह का आंदोलन नहीं हुआ। जिस तरह का आंदोलन जनवरी 2026 की शुरुआत में हुआ था जो महंगाई विरोधी आंदोलन था और बाद में हिंसक हो गया और जिसको देखते हुए ही अमेरिका और इसराइल ने ये एक्शन लिया कि ये सही मौका है लेकिन वो मौका उनके लिए गलत साबित हुआ। अब एक भी शख्स सरकार के खिलाफ सड़क पर नहीं निकला या उसने जुर्रत नहीं की या अगर कुछ इस तरह के लोग हैं भी तो वो अपने घरों पे बैठे हुए हैं क्योंकि उन्हें अभी तक भरोसा नहीं है कि उनकी मदद हो पाएगी कि नहीं। लेकिन सड़कों पर जो निकले वो इमाम आयतुल्लाह अली खामनेई के समर्थक थे। 

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