US के B1 Bomber Jets ने संभाला मोर्चा, Iran में अब तबाही का सबसे बड़ा दौर शुरू करेंगे Trump

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने पुष्टि की है कि ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ सीमित रक्षात्मक सैन्य अभियानों के लिये अपने दो ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। इस तैनाती से अमेरिकी विमानों को ईरान के लक्ष्यों तक पहुंचने में लगने वाला समय लगभग आधा रह गया है।
पश्चिम एशिया में भड़क चुके युद्ध के बीच अमेरिका ने जबरदस्त सैन्य आक्रमण का नया अध्याय खोल दिया है। इंग्लैंड के रॉफ फेयरफोर्ड सैन्य ठिकाने से अमेरिकी वायु सेना के दो बी-वन बमवर्षक विमानों के उड़ान भरते ही युद्ध का स्वर और भी आक्रामक हो गया। इसी दौरान अमेरिका ने फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के बेहद महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर भारी बमबारी की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि इस द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकाने पूरी तरह ध्वस्त कर दिये गये। हम आपको बता दें कि खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि इसी द्वीप से देश के करीब नब्बे प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है।
दरअसल ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच छिड़ा यह युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। 28 फरवरी को अमेरिकी और इजराइली सेनाओं ने ईरान में समन्वित हवाई हमले किये थे जिनमें देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आग फैल गई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी।
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अमेरिका ने युद्ध के पंद्रहवें दिन अपनी रणनीति को और तेज करते हुए ब्रिटेन के राफ फेयरफोर्ड ठिकाने से बी-वन बमवर्षकों को मिशन पर भेजा। इन विमानों को टेक्सॉस और एल्सवर्थ स्थित अमेरिकी वायुसेना अड्डों से यहां तैनात किया गया था। इन बमवर्षकों का इस्तेमाल ईरान के मिसाइल अड्डों और सैन्य कमान केंद्रों को निशाना बनाने के लिये किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक ये विमान अत्याधुनिक निर्देशित बमों और लंबी दूरी की मारक मिसाइलों से लैस हैं।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने पुष्टि की है कि ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ सीमित रक्षात्मक सैन्य अभियानों के लिये अपने दो ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। इस तैनाती से अमेरिकी विमानों को ईरान के लक्ष्यों तक पहुंचने में लगने वाला समय लगभग आधा रह गया है। छह मार्च को पहला बमवर्षक यहां पहुंचा था जबकि कुछ अन्य विमान खराब मौसम के कारण जर्मनी के रामस्टाइन ठिकाने की ओर मोड़ दिये गये थे।
इस बीच, अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर भी जबरदस्त बमबारी की। ट्रम्प ने दावा किया है कि यह पश्चिम एशिया के इतिहास की सबसे ताकतवर बमबारी में से एक थी। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक द्वीप की तेल संरचनाओं को निशाना नहीं बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस द्वीप की तेल संरचनाएं नष्ट कर दी जाती हैं तो ईरान के तेल निर्यात का करीब नब्बे प्रतिशत हिस्सा ठप हो सकता है और कच्चे तेल की कीमतें एक सौ पचास डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
उधर, ईरान ने इन हमलों के बाद बेहद कड़ा रुख अपनाया है। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि यह युद्ध ईरान पर थोपा गया है और देश अपनी स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिये आखिरी सांस तक लड़ेगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपने दुश्मनों के सामने झुकेगा नहीं और इस युद्ध के अंत तक मजबूती से डटा रहेगा।
वहीं ईरान की सेना और इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड ने भी मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे अमेरिका और जियोनिस्ट ताकतों के खिलाफ एकजुट हों। सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकर्ची ने कहा कि इस्लामी दुनिया को एकजुट होकर इस संघर्ष का सामना करना चाहिए।
दूसरी ओर, युद्ध का असर अब पूरे क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी को निशाना बनाया है जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति संकट में घिर गई है। दुनिया के करीब बीस प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। इसके बाधित होने से वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और कई देशों को अपने रणनीतिक भंडार खोलने पड़े हैं।
इसके साथ ही संघर्ष का दायरा खाड़ी देशों में और भीतर तक फैल गया है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा तेल टर्मिनल पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद वहां भीषण आग लग गई। इसी दौरान कतर की राजधानी दोहा में दो मिसाइलों को मार गिराया गया जबकि कई इलाकों को खाली करवा लिया गया। सऊदी अरब ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे दर्जनों ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। वहीं दुबई में एक शक्तिशाली विस्फोट से इमारतें हिल गईं और पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया।
युद्ध के समुद्री मोर्चे पर भी तनाव चरम पर है। ईरान की नौसेना ने दावा किया कि उसकी मिसाइलों ने अमेरिकी विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन को निशाना बनाया जिससे उसे भारी नुकसान हुआ और उसे खाड़ी क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा। हालांकि अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसका युद्धपोत पूरी तरह सक्रिय है।
इसी बीच, सऊदी अरब के प्रिंस सलमान वायु अड्डे पर खड़े अमेरिकी ईंधन टैंकर विमानों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर दिया गया। वहीं इराक में एक ईंधन भरने वाले सैन्य विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से उसके सभी छह सैनिकों की मौत हो गई। साथ ही युद्ध की आग लेबनान को भी तेजी से झुलसा रही है। इजराइल ने बेरूत के एक अपार्टमेंट पर लगातार दूसरे दिन हमला किया जबकि हिजबुल्लाह के प्रमुख नईम कासिम ने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष लंबा और निर्णायक होगा।
देखा जाये तो पश्चिम एशिया में तेजी से भड़कता यह युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिये सबसे बड़ा खतरा बनता जा रहा है। खार्ग द्वीप, होरमुज जलडमरूमध्य और खाड़ी के तेल ठिकानों पर मंडराते खतरे ने दुनिया को आशंका में डाल दिया है कि अगर यह संघर्ष और फैला तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी हो सकता है।
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