US Midterm Elections में Democrats को बढ़त, Suhas Subramanyam और Piya Dandiya जीते

अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने जॉर्जिया गवर्नर पद सहित अहम सीटों पर बढ़त बनाकर मजबूत स्थिति हासिल की है। भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया और पिया डांडिया ने फ्लोरिडा से प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीता। वहीं ओहायो में ट्रंप समर्थित विवेक रामास्वामी को हार का सामना करना पड़ा है।
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, चार नवंबर अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स ने महत्वपूर्ण बढ़त हासिल करते हुए जॉर्जिया में गवर्नर पद का चुनाव जीत लिया और सीनेट की प्रमुख सीट पर रिपब्लिकन पार्टी से कब्जा छीनने की मजबूत स्थिति में पहुंच गए। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार सुहास सुब्रमण्यम (40) और पिया डांडिया (39) ने क्रमशः वर्जीनिया और फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है, जबकि अरुणा मिलर (61) मैरीलैंड के लेफ्टिनेंट गवर्नर पद पर पुनः निर्वाचित हुई हैं।
हाई-स्कूल प्रिंसिपल रहीं पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें संसदीय क्षेत्र में रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकार को हराया। इसके साथ ही डांडिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मौजूद भारतीय-अमेरिकियों में सबसे नयी सदस्य बन गई हैं। वहीं, सुब्रमण्यम वर्जीनिया के 10वें संसदीय क्षेत्र से दोबारा चुने गए हैं।
उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस के गृह राज्य ओहायो में ट्रंप के पसंदीदा भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को तीखे चुनाव प्रचार के बावजूद डेमोक्रेट एमी एक्टन के हाथों हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, केरलम में जन्मीं डेमोक्रेट नित्या रमन लॉस एंजिलिस के महापौर पद के लिए अपनी पूर्व बॉस करेन बास के साथ कड़े मुकाबले में हैं। भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना, अमी बेरा और प्रमिला जयपाल फिर से चुनाव मैदान में हैं, जबकि डेमोक्रेट अमिषा शाह पहली बार प्रतिनिधि सभा में पहुंचने के लिए प्रतिस्पर्धा में हैं।
डेमोक्रेट रॉय कूपर ने नॉर्थ कैरोलिना में सीनेट की सीट पर जीत हासिल की है, जबकि एनी एंड्रूज ने दक्षिण कैरोलिना में ट्रंप समर्थित डार्लिन ग्राहम को हराकर सीट पर कब्जा जमाया। जॉर्जिया में कीशा लांस बॉटम्स इतिहास रचते हुए राज्य की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनीं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार रिक जैक्सन को हराया।
रिपब्लिकन का गढ़ माने जाने वाले टेक्सास में डेमोक्रेट जेम्स टेलरिको सीनेट चुनाव में ट्रंप समर्थित केन पैक्सटन से आगे हैं। यदि टेलरिको यह चुनाव जीतते हैं, तो वह 38 वर्षों में टेक्सास से पहले डेमोक्रेट सीनेटर होंगे। जॉर्जिया से डेमोक्रेट सीनेटर जॉन ओसॉफ पुन: चुने गए हैं जिन्हें 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।
मिशिगन के 13वें जिले में समाजवादियों के समर्थन वाले डेमोक्रेट डोनावन मैकिनी ने रिपब्लिकन टी. पी. निकोरियाक को हराकर प्रतिनिधि सभा की सीट जीती। मैकिनी ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में भारतीय-अमेरिकी श्री थानेदार को हराया था। मंगलवार को स्थानीय समयानुसार सुबह छह बजे अमेरिका में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीट, सीनेट की 37 सीट, 36 राज्यों में गर्वनर पदों और कई स्थानीय निकायों के लिए मतदान हुआ।
‘सीएनएन’ के शुरुआती सर्वेक्षण के अनुसार, मतदाता देश की मौजूदा स्थिति, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप के कामकाज से असंतुष्ट नजर आए। मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के कतारों में खड़े होने के बीच ट्रंप पूरे दिन ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) में अपने सलाहकारों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने मंगलवार दोपहर ‘एक्स’ पर कई संदेश साझा कर रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया।
प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हकीम जेफरीस ने चुनाव प्रचार कर रहे कार्यकर्ताओं को वाशिंगटन में फोन के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी बदलाव लाते हुए निचले सदन में फिर से बहुमत हासिल करने जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसी संसद देने जा रहे हैं जो वास्तव में अमेरिकी जनता के हितों को प्राथमिकता देगी।’’ मतदान के दिन ट्रंप ने इजराइल को दी जाने वाली चार अरब डॉलर की सहायता अगले वर्ष से बंद करने की अचानक घोषणा कर सबको चौंका दिया। डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने इसे डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर को रोकने की एक हताश कोशिश करार दिया।
इन चुनावों से तय होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण बरकरार रख पाती है या डेमोक्रेटिक पार्टी कम से कम प्रतिनिधि सभा अथवा सीनेट में बहुमत हासिल कर ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में उनके फैसलों पर अंकुश लगाती है। यदि मतदान पूर्व अनुमान सही साबित होते हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी संसद पर नियंत्रण हासिल कर लेती है, तो ट्रंप प्रशासन के कामकाज पर कड़ी संसदीय निगरानी संभव हो सकेगी। इससे राष्ट्रपति के नीतिगत एजेंडे को झटका लग सकता है।
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