कौन जीत रहा है फ्रांस का राष्ट्रपति चुनाव, इस पद के मुख्य उम्मीदवारों के बारे में कितना जानते हैं आप?

फ्रांस में 24 अप्रैल को दूसरे दौर का मतदान होना है जिसमें मैक्रों का मुकाबला दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी मरीन ले पेन से होने वाला है। जबकि मेलेनचॉन सहित 10 अन्य उम्मीवार पहले दौर के मतदान में बाहर हो गए थे।
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए दूसरे राउंड की वोटिंग 24 अप्रैल को होगी। पहले राउंड की वोटिंग 10 अप्रैल को हो चुकी है। इस बार भी इमैनुएल मैक्रों के सत्ता संभालने की संभावना सबसे ज्यादा है। लेकिन दक्षिणपंथी राष्ट्रपति उम्मीदवार मरीन ल पेन ने उन्हें कड़ी टक्कर दी है। इस बार राष्ट्रपति पद की दौर में 12 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। जो कई मायनों में अहम है। मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दोबारा राष्ट्रपति की कुर्सी पर काबिज होने के लिए मैदान में उतरे है। वहीं उन्हें सबसे बड़ी टक्कर दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाली राष्ट्रपति पद की उम्दीदवार मरीन ल पेन से मिल रही है।
फ्रांस के वोटर
फ्रांस की कुल आबादी 6 करोड 68 लाख है। जिसमें से चार करोड़ 70 लाख रजिस्टर्ड वोटर है। पिछले चुनाव में 3 करोड़ 50 लाख लोगों ने वोट डाला था। जिसमें से मैक्रों को 2 करोड़ वोट मिले थे जबकि ले पेन को 1 करोड़ वोट मिले थे। खाली वैलेट पेपर 30 लाख छोड़े गए थे जबकि 10 लाख विरोध में फाड़ दिए गए थे।
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फ्रांस के राष्ट्रपति पद के मुख्य उम्मीदवार
इमैनुएल मैक्रों- इमैनुएल मैक्रों को उदारवादी नेता माना जाता है। वो यूरोप के साथ फ्रांस के संबंधों को मजबूत बनाना चाहते हैं। उनका सारा ध्यान देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने पर है। अप्रैल 2016 में मैक्रों ने 'एन माशेर्' नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी बनाई। मैक्रों को 27.84 फीसद वोट मिले हैं और उन्हें पहले राउंड में जीत दर्ज की है।
मरीन ले पेन- मरीन ल पेन खुद को राष्ट्रवादी बताती हैं और उन्होंने यह वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आती है तो सबसे पहले फ्रांस में इमीग्रेशन से जुड़े नियमों को सख्त बनाएंगे। शरणार्थियों की संख्या में कमी करेंगे। कट्टर इस्लामिक तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे और फ्रांस को यूरोपीय यूनियन से निकालने पर भी विचार किया जाएगा। मरिन ले पेन हैं को पहले राउंड के चुनाव में कुल 23.15 फीसद वोट मिले हैं।
जीन ल्यूक मेलनचोन- वामपंथी उम्मीदार जीन-ल्यूक मेलेनचॉन भी राष्ट्रपति चुनाव में अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। लेकिन, जीन-ल्यूक मेलेनचॉन पहले राउंड में तीसरे नंबर पर रहे। इस राउंड में शां लू मेलेनकॉन को 21.95 फीसद वोट मिले हैं। मेलेनचोन काफी आक्रामक बयान देने के लिए जाने जाते हैं।
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एरिक जमोर- टीवी स्टार से राजनेता बने एरिक ज़ेमोर जिन्हें फ्रेंच डोनाल्ड ट्रंप भी कहा जाता है। इस्लाम विरोधी और आप्रवास विरोधी विचारों की वजह से जेमोर की छवि एक फायर ब्रांड नेता के रूप में है। उनका मानना है कि सिर्फ महान शख्स ही फ्रेंच की जनता को बचा सकते हैं।
वैलेरी पेक्रेसी- रिपब्लिकन पार्टी की वैलेरी पेक्रेस भी उम्मीदवारों को अपने पक्ष में मोड़ने में असफल नजर आई हैं।
24 अप्रैल को मैक्रों और ल पेन के बीच मुकाबला
फ्रांस में 24 अप्रैल को दूसरे दौर का मतदान होना है जिसमें मैक्रों का मुकाबला दक्षिणपंथी प्रतिद्वंद्वी मरीन ले पेन से होने वाला है। जबकि मेलेनचॉन सहित 10 अन्य उम्मीवार पहले दौर के मतदान में बाहर हो गए थे।
हिजाब बना बड़ा मुद्दा
फ्रांस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अभियान में मुस्लिमों का हिजाब (हेडस्कार्फ) केंद्रीय मुद्दा बनकर उभरा है। दक्षिणपंथी उम्मीदवार मरिन ले पेन ने देश में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया है, जहां पश्चिमी यूरोप की सर्वाधिक मुस्लिम आबादी रहती है। हालांकि, इन दोनों नेताओं को हिजाब लगाने वाली महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ा है, जिन्होंने इन दोनों से पूछा है कि उनकी परिधान संबंधी पसंद को राजनीति का मुद्दा क्यों बनाया जाना चाहिये। मैक्रों धार्मिक परिधानों पर रोक नहीं लगाएंगे, लेकिन उन्होंने कई मस्जिदों को बंद कराने और इस्लामिक समूहों पर निगरानी रखने का काम किया है। बहुत से मुस्लिमों को लगता है कि राष्ट्रपति पद को लेकर चुनाव अभियान अनुचित रूप से उनकी आस्था को कलंकित कर रहा है। दक्षिणी कस्बे पर्टुइस के एक किसान बजार में सिर ढके हुए एक महिला ले पेन के पास पहुंची और उनसे पूछा, राजनीति में हिजाब क्या कर रहा है? इसके जवाब में पेन ने कहा कि हिजाब एक ऐसा परिधान है, जिसे इस्लाम के कट्टर विचारधारा वाले लोगों द्वारा थोपा गया है। मैक्रों ने ले पेन से खुद को अलग करते हुए कहा कि वह किसी नियम में कोई बदलाव नहीं करेंगे, लेकिन स्कूलों में हिजाब पर मौजूदा प्रतिबंध का उन्होंने फ्रांस के धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का हवाला देकर बचाव किया।
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— Prabhasakshi (@prabhasakshi) April 19, 2022
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