Pakistan Political Crisis: Zardari ने 19 जजों की नियुक्ति को दी मंजूरी, खत्म हुआ सप्ताहों से जारी Deadlock

पाकिस्तान के ज्यूडिशियल कमीशन ने पिछले महीने उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति के लिए 24 नामों की सिफ़ारिश की थी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मंज़ूरी के लिए यह प्रस्ताव ज़रदारी को भेजा था। यह मामला हफ़्तों तक लंबित रहा और पिछले हफ़्ते इस देरी को इस्लामाबाद हाई कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने मंगलवार को पांच हाई कोर्ट में 19 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंज़ूरी दी और पांच अन्य को स्थायी जज के तौर पर पक्का किया। इसके साथ ही, जजों की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय और संघीय सरकार के बीच हफ़्तों से चल रहा गतिरोध खत्म हो गया। पाकिस्तान के ज्यूडिशियल कमीशन ने पिछले महीने उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति के लिए 24 नामों की सिफ़ारिश की थी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मंज़ूरी के लिए यह प्रस्ताव ज़रदारी को भेजा था। यह मामला हफ़्तों तक लंबित रहा और पिछले हफ़्ते इस देरी को इस्लामाबाद हाई कोर्ट में चुनौती भी दी गई थी।
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प्रेसीडेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति ने लाहौर हाई कोर्ट (LHC), सिंध हाई कोर्ट (SHC), पेशावर हाई कोर्ट (PHC), इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) और बलूचिस्तान हाई कोर्ट (BHC) में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंज़ूरी दे दी है। इस मंज़ूरी में LHC के लिए 10 अतिरिक्त जज और IHC, SHC व BHC में से हर एक के लिए तीन-तीन अतिरिक्त जज शामिल हैं। PHC के चार अतिरिक्त जजों और LHC के एक अतिरिक्त जज को स्थायी जज के तौर पर पक्का किया गया। यह मंज़ूरी तब रुकी हुई थी जब ज़रदारी की कानूनी टीम ने कहा कि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) - जिसके वे को-चेयरमैन हैं - द्वारा सुझाए गए लगभग सभी नामों को ज्यूडिशियल कमीशन ने खारिज कर दिया था। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच अनौपचारिक बातचीत के बाद यह मंज़ूरी मिली, हालांकि यह तुरंत साफ़ नहीं हो पाया कि किस वजह से यह सफलता मिली।
इससे पहले, जजों के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख 27 जुलाई तय की गई थी, लेकिन ज़र्दारी ने न तो उस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी और न ही उसे दोबारा विचार के लिए वापस भेजा, जिसके बाद इसे अनिश्चित काल के लिए टाल दिया गया। इस देरी की वजह से राष्ट्रपति कार्यालय और सरकार के बीच विवाद पैदा हो गया था; सरकार की कानूनी टीम का तर्क था कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की सलाह पर काम करना होता है। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री शरीफ़ और उनके भाई नवाज़ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) और PPP के बीच मतभेदों के बीच सामने आया है। ये दोनों पार्टियां संघीय सरकार में गठबंधन सहयोगी हैं, लेकिन पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में हाल ही में हुए चुनावों में उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ़ चुनाव लड़ा था, जहाँ PPP ने PML-N पर धांधली का आरोप लगाया था। इस ताज़ा कदम से न्यायिक नियुक्तियों को लेकर बना तत्काल गतिरोध खत्म हो गया है।
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