छठ पर्व में खास महत्व है पहले दिन की 'नहाय खाय' प्रथा का

  •  प्रज्ञा पाण्डेय
  •  नवंबर 18, 2020   15:13
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छठ पर्व में खास महत्व है पहले दिन की 'नहाय खाय' प्रथा का

नहाय खाय के दिन से घर की साफ-सफाई होती है। आज के दिन घर में छठ करने वाला व्रती सात्विक भोजन करता है। उस दिन से घर में भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता है। इस दिन व्रती केवल एक बार भोजन करता है।

आस्था तथा सूर्योपासना का पर्व छठ आज से शुरू हो गया है। आज छठ का पहला दिन नहाय खाय है। इस दिन का छठ पर्व में खास महत्व है तो आइए हम आपको नहाय खाय के बारे में बताते हैं। 

नहाय खाय क्या है

चारदिवसीय छठ पर्व की शुरूआत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से होता है। इस दिन व्रत पूर्ण रूप से शुद्ध होकर व्रत से शुरूआत करता है इसलिए छठ के पहले दिन नहाय खाय का खास महत्व होता है।

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नहाय खाय नाम क्यों पड़ा

इस दिन छठ करने वाले श्रद्धालु अर्थात व्रती शुद्धता पूर्वक स्नान कर सात्विक भोजन करता है। उसके बाद वह छठ सम्पन्न होने के बाद ही भोजन करता है इसलिए इसे नहाय खाय कहा जाता है। इसके अलावा इस दिन छठ में चढ़ने वाला खास प्रसाद जिसे ठेकुआ कहते हैं उसके अनाज को धोकर सुखाया भी जाता है। 

नहाय खाय में व्रती खाते हैं सात्विक भोजन

नहाय खाय के दिन से घर की साफ-सफाई होती है। आज के दिन घर में छठ करने वाला व्रती सात्विक भोजन करता है। उस दिन से घर में भोजन में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं होता है। इस दिन व्रती केवल एक बार भोजन करता है। नहाय खाय के दिन व्रती तैलीय चीजें जैसी पूरी और पराठे का सेवन नहीं करता है। साथ ही घर के अन्य सदस्य व्रत करने वाले को भोजन करने के बाद ही अन्न ग्रहण करते हैं। इसके अलावा आमतौर पर घर में बिस्तर पर नहीं सोता बल्कि वह चार दिन तक जमीन पर सोता है। 

नहाय खाय के दिन खासतौर से लौकी से सब्जी बनती है। इसे पीछे मान्यता है हिन्दू धर्म में लौकी को बहुत पवित्र माना जाता है। इसके अलावा लौकी में पर्याप्त मात्रा में जल रहता है। इसमें लगभग 96 फीसदी पानी होता है जो व्रत को आगे आने वाले दिनों में ताकत देता है। इसके अलावा लौकी खाने से बहुत से बीमारियां भी दूर हो जाती हैं। इसके अलावा खाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही इस दिन चने की दाल खाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि चने की दाल बाकी दालों में सबसे अधिक शुद्ध होती है तथा वह व्रती को ताकत भी देती है।

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नदियों और तालाब के किनारे शुरू होती है पूजा

नहाय खाय के दिन व्रती तालाब या नदी के किनारे के स्नान करते हैं इसलिए नदियों के किनारों बहुत भीड़ होती है। स्नान से पहले वह पवित्र लकड़ी के दातुन से मुंह धोकर नदी में स्नान करते हैं। उसके बाद पवित्र नदी का जल लेकर घर आते हैं और उससे छठ का प्रसाद बनता है। लेकिन शहरों में तालाब तथा नदी की कमी के कारण लोग अपने घर में ही पवित्रता पूर्वक स्नान कर लेते हैं।

मिट्टी के चूल्हे पर बनता है खाना 

इसके अलावा नहाय खाय के दिन खाना आम दिनों की तरह रसोई के चूल्हे पर नहीं बल्कि हमेशा लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि चूल्हे में केवल आम की लकड़ी से का इस्तेमाल किया जाता है। इस दिन खाना बनाकर पूजा की जाती है उसके बाद सूर्य भगवान को भोग लगाया जाता है। इस प्रकार पूजा के बाद व्रत सबसे पहले व्रत करने वाला व्यक्ति खाता है फिर परिवार के दूसरे सदस्य खाते हैं।

- प्रज्ञा पाण्डेय







श्री हनुमान चालीसा के पाठ से 'ऐसे सुधारें' अपना जीवन

  •  विंध्यवासिनी सिंह
  •  जनवरी 20, 2021   17:03
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श्री हनुमान चालीसा के पाठ से 'ऐसे सुधारें' अपना जीवन

मनुष्य के जीवन में तमाम तरीके की कठिनाइयां और समस्याएं समय-समय पर आती रहती हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मनुष्य के जीवन में आने वाली तमाम समस्याओं का समाधान आपको हनुमान चालीसा में मिलेगा।

रामचरित्र मानस की रचना के बाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी की लीलाओं के वर्णन के लिए हनुमान चालीसा की रचना की। गोस्वामी तुलसीदास ने इस चालीसा में 40 छंदों के द्वारा भगवान बजरंग बली के चरित्र और उनके गुणों का बखान किया है। कहते हैं कि जो भी मनुष्य अपने जीवन में श्री हनुमान चालीसा का पाठ करता है वह हर तरीके से सुखमय और मालामाल हो जाता है। मालामाल से तात्पर्य केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि निरोगी काया, सुंदर मन, सुंदर शरीर और गुणवान होने से है।

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हनुमान चालीसा पढ़ने के लाभ

मनुष्य के जीवन में तमाम तरीके की कठिनाइयां और समस्याएं समय-समय पर आती रहती हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मनुष्य के जीवन में आने वाली तमाम समस्याओं का समाधान आपको हनुमान चालीसा में मिलेगा। आज हम आपको जीवन से जुड़ी कुछ कठिनाइयों और हनुमान चालीसा द्वारा उससे छुटकारा पाने के बारे में बात करेंगे।

मनोकामना को पूर्ण करने वाला

इंसान के मन में तमाम चीजों को पाने की इच्छा रहती है और उसकी मनोकामना रहती है कि वह किसी भी प्रकार से अपने जीवन में इस मनोकामना को पूर्ण कर पाए। हनुमान चालीसा में इसका वर्णन मिलता है, जिसके पाठ से आप अपनी मनोकामना को पूर्ण कर सकते हैं।

'और मनोरथ जो कोई लावे, सोई अमित जीवन फल पावे' 

अनचाहे डर और भय से मुक्ति पाने के लिए

आपको कोई अनजाना डर सता रहा है या फिर भूत- पिशाच से डर लगता हो तो आप हनुमान चालीसा में वर्णित इस छंद का पाठ कर इससे मुक्ति पा सकते हैं।

'भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे'

शारीरिक बीमारी से मुक्ति

लंबे समय से जूझ रहे शारीरिक बीमारी से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा के इस छंद का पाठ करें

'नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा'

संकट के समय रक्षा के लिए

अगर आप किसी बड़ी समस्या यह संकट में फंस गए हैं और आपके सामने कोई रास्ता नहीं दिख रहा हो तो आप हनुमान चालीसा में वर्णित इस छंद का पाठ कर सकते हैं।

'संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा

संकट ते हनुमान छोड़ावे मन क्रम वचन ध्यान जो लावे'

बुरी संगत से बचने के लिए

अगर आप किसी बुरी संगत में पड़ गए हैं और उससे छुटकारा चाहते हैं, लेकिन लाख प्रयास के बाद भी अगर आप छुटकारा नहीं पा रहे हैं, तो आप हनुमान चालीसा में वर्णित इस छंद का पाठ रोज करें।

'महावीर विक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी'

विद्यार्थी करें इसका पाठ

अगर आप विद्यार्थी हैं और पढ़ाई में आपका मन नहीं लग रहा है तो आप इस छंद का रोज जाप करें।

'बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार'

लंबे समय से कार्य अटका पड़ा हो...

अगर आपका कोई कार्य बहुत दिनों से अटका पड़ा हो या फिर लाख प्रयत्न के बावजूद आपका कार्य पूर्ण नहीं हो रहा है, तो आप यह छंद बार-बार दोहराएं।  

'भीम रूप धरि असुर संहारे रामचंद्र के काज सँवारे'

मन व्याकुल हो तो?

अगर आपका मन विचलित हो रहा है और किसी भी चीज में नहीं लग रहा है तो यह छंद दोहरा सकते हैं।

'सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना'

अगर आप लगातार ध्यान पूर्वक हनुमान चालीसा का पठन-पाठन करेंगे तो पाएंगे कि इस चालीसा के 40 छंद आप के जीवन से जुड़ी तमाम समस्याओं के निवारण में मददगार साबित होंगे।

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कब करें हनुमान चालीसा का पाठ?

वैसे तो हनुमान चालीसा का पाठ शुरू करने के लिए किसी विशेष समय की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि भगवान महावीर पवन पुत्र हैं और पवन के वेग से ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड में विचरण करते रहते हैं। इसीलिए जब भी आपको लगे कि आप हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते हैं तो स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन से हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर सकते हैं। इतना ही नहीं, हनुमान चालीसा को लेकर कहा जाता है कि अगर कोई मनुष्य अपने जीवन में नियमित ढंग से हनुमान चालीसा का पाठ करता है तो वह इस भवसागर से मुक्त हो जाएगा और बैकुंठ में श्री राम के चरणों में उसे स्थान मिल जायेगा।

शास्त्रों में हनुमान चालीसा पढ़ने के नियम

हालांकि शास्त्रों में हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए नियम का वर्णन किया गया है। इसके अनुसार हनुमान चालीसा को मंगलवार या शनिवार के दिन शुरू करना चाहिए और अगले 40 दिन तक इसका नियमित पाठ करना चाहिए। यह कार्य सुबह सूर्योदय के पूर्व यानि कि सुबह 4 बजे शुरू करना होता है। इसके बाद जब हनुमान चालीसा का संपूर्ण पाठ हो जाये तो अपने घर में ही छोटा सा हवन अवश्य करें और भगवान हनुमान को बूंदी और चूरमा का भोग लगाएं। 

भगवान को लगा भोग बंदरों को अवश्य खिलाएं। इसके बाद इस प्रसाद को आप अपने परिवारजनों और मित्रों तथा पड़ोसियों को दे सकते हैं। 

।।  अथ श्री हनुमान चालीसा  ।।


।। दोहा।।

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन–कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।


।। चौपाई।।

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।

राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।


महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।


हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मुँज जनेऊ साजै।।

शंकर सुवन केसरी नन्दन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।।


विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।


सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे।।


लाय संजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।।


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।


तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।


राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हरी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।।


आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।


नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।


सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।।


चारों जुग परताप तुम्हारा।। है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।


तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दु:ख बिसरावै।।

अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि–भक्त कहाई।।


और देवता चित्त न धरई। हनुमत् सेई सर्व सुख करई।।

संकट कटै मिटे सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।


जय जय जय हनुमान गौसाईं। वृपा करहु गुरुदेव की नाईं।

जो त बार पाठ कर कोई। छुटहि बंदि महासुख होई।


जो यह पढ़ै हनुमान् चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।


।।। दोहा।।

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

- विंध्यवासिनी सिंह







मकर संक्रांति के दिन नदियों में स्नान का है खास महत्व

  •  प्रज्ञा पाण्डेय
  •  जनवरी 14, 2021   10:52
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मकर संक्रांति के दिन नदियों में स्नान का है खास महत्व

हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का कई कारणों से विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान आशुतोष ने श्री विष्णु को आत्मज्ञान दिया था। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन सूर्य जब उत्तरायण होते हैं तब देवताओं का दिन शुरू होता है उससे पहले रात रहती है।

सूर्य देवता के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाए जाने वाला मकर संक्रांति पर्व भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। देश के हर हिस्से में मनाए जाने के कारण मकर संक्रांति को सामाजिक समरसता तथा एकता का प्रतीक भी माना जाता है। 

मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व 

हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का कई कारणों से विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान आशुतोष ने श्री विष्णु को आत्मज्ञान दिया था। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन सूर्य जब उत्तरायण होते हैं तब देवताओं का दिन शुरू होता है उससे पहले रात रहती है। साथ ही भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही अपनी देह त्यागी थी। साथ ही मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे चलते हुए सागर में जाकर मिल गयी थीं। इसलिए इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान का खास महत्व है। इन्हीं कारणों से हिन्दू धर्म में इस दिन गंगा स्नान या पवित्र नदियों में स्नान तथा दान का खास महत्व है। 

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मकर संक्रांति पर इन कार्यों से होगा लाभ 

मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान का खास महत्व है। लोग इस दिन गंगा नदी या अन्य पवित्र नदियों में स्नान अवश्य करते हैं। लेकिन अगर आप नदी में स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो गंगा जल को घर में नहाने के पानी में मिला लें और उससे स्नान करें इससे आपको लाभ मिलेगा। स्नान करने के पश्चात पवित्र मन से भगवान सूर्य को जल अर्पित करें इससे सूर्य देव आपको आर्शीवाद देंगे। इसके बाद अपने घर का मंदिर साफ कर शिव जी, विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की पूजा करे। अपनी शक्ति अनुसार गरीबों को दान दें। दान में तिल और गुड़ से बने सामान, कपड़े और अन्न जरूरतमंद लोगों को दे सकते हैं। मकर संक्रांति के दिन झाड़ू खरीदें इससे घर में लक्ष्मी का वास होता है। घर के बड़े लोगों का आर्शीवाद लें। तिजोरी में रखें आभूषणों को बाहर निकाल गंगा जल से धोएं और उन पर हल्दी लगाकर रखें। इसके अलावा घर में खिचड़ी बनाएं और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। इन कार्यों से आपके जीवन में सुख तथा समृद्धि आएगी।

इन कामों से करें परहेज 

मकर संक्रांति का दिन बहुत खास होता है इसलिए किसी प्रकार के अनुचित कार्य आपके भविष्य में आने वाली सुख-समृद्धि पर प्रभाव डाल सकते हैं। इस दिन आपने तन को स्वच्छ रखने के साथ मन को साफ रखें। किसी के प्रति भेदभाव न रखें और किसी का बुरा न करने का संकल्प करें। इसके अलावा फूलों तथा पत्तों को नुकसान न पहुंचाएं। तुलसी के पत्तों को बिल्कुल न तोड़ें। घर के बुजुर्ग लोगों का अपमान न करें इससे सूर्य तथा शनि देव नाराज हो सकते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन काले कपड़े न पहनें। घर में तामसिक भोजन न बनाएं और खाने में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रयोग न करें। यदि शराब पीते हों तो मकर संक्रांति के दिन इससे परहेज करें। किसी गरीब के मन को दुखी न करें तथा उन्हें बासी भोजन न खिलाएं।

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अलग-अलग नामों से भी मनायी जाती है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति को हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा में माघी, असम में भोगाली बिहु, कर्नाटक में मकर संक्रमण, पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में ताइ पोंगल, कश्मीर में शिशुर सेंक्रात, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में खिचड़ी के नाम से मनाया जाता है। 

भारत से बाहर भी धूमधाम से मनायी जाती है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति के साथ एक रोचक बात यह है कि इसे न केवल भारत में धूमधाम से मनाया जाता है बल्कि विदेशों में भी इसकी झलक दिखाई देती है। बांग्लादेश में पौष संक्रांति, नेपाल में माघी संक्रांति, कम्बोडिया में मोहा संगक्रान, म्यांमार में थिंयान तथा श्रीलंका में पोंगल के नाम से मनाया जाता है।

- प्रज्ञा पाण्डेय







मीन राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

  •  अनीष व्यास
  •  दिसंबर 30, 2020   17:28
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मीन राशि के जातकों का वर्ष 2021 में कैसा रहेगा भविष्यफल, जानिए

वर्ष 2021 मीन राशि के जातकों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि इस दौरान आपके करियर के भाव के स्वामी गुरु बृहस्पति, आपकी राशि के एकादश भाव में उपस्थित होंगे, जहाँ वो शनि के साथ युति करेंगे। इसके परिणामस्वरूप, आपको अपनी मेहनत का भरपूर लाभ मिल सकेगा

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष पर आधारित भविष्यफल पढ़ने के बाद आप साल 2021 में होने वाली सभी प्रकार के घटना-दुर्घटना से पूर्व में ही परिचित हो जाएंगे और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप नए वर्ष की पूरी योजना बनाने में सफल रहेंगे। यह भविष्यवाणी चन्द्र राशि, लग्न तथा वैदिक ज्योतिष के आधार पर किया गया है। इस वार्षिक राशिफल को छह अलग-अलग विषयों में बाँटकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें कॅरियर, आर्थिक स्थिति, परिवार, प्रेम-रोमांस, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल है।

आइये विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास से जानते है कि नववर्ष 2021 में मीन राशि का राशिफल कैसा रहेगा।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि मीन राशि के जातकों को वर्ष 2021 कॅरियर के मामले में मन के अनुकूल ही परिणाम प्राप्त होंगे। मीन राशि के जातक इस दौरान अपने कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे, आपको अपने सहकर्मियों का साथ मिलेगा और वो अपनी उच्च अवस्था में होते हुए आपको सहयोग करते दिखाई देंगे। आपको इस समय अपने वरिष्ठ अधिकारियों और अपने सहकर्मियों से अच्छे संबंध बनाकर चलने की ज़रूरत होगी। तभी आपके वरिष्ठ अधिकारी आपकी मेहनत को देख पाएंगे। नौकरी पेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में भाग्य का साथ मिलेगा और उनकी उन्नति और प्रमोशन होगा, मीन राशि के जातक प्रयास और अपनी मेहनत जारी रखें। इस वर्ष ना केवल आपको अपने कार्य में तरक्की मिलेगी बल्कि काम के इस वजह से ही आपका सम्मान भी बढ़ेगा। आपके भाई बहनों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। परिवार के बुजुर्गों तथा समाज के सम्मानित व्यक्तियों का आपको सानिध्य मिलेगा और उनके संरक्षण में आप काफी बेहतर कार्य करेंगे, जिसके कारण ना केवल आपके सम्मान में वृद्धि होगी आपको उन्नति प्राप्त होगी। स्वास्थ्य के लिहाज से समय सामान्य से बेहतर रहने वाला है क्योंकि वर्ष 2021 में ग्रह स्थिति अनुकूल रहेगी, लेकिन आपको अप्रैल से सितंबर तक के मध्य थोड़ा ध्यान देने की ज़रूरत होगी।

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कॅरियर 

वर्ष 2021 मीन राशि के जातकों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि इस दौरान आपके करियर के भाव के स्वामी गुरु बृहस्पति, आपकी राशि के एकादश भाव में उपस्थित होंगे, जहाँ वो शनि के साथ युति करेंगे। इसके परिणामस्वरूप, आपको अपनी मेहनत का भरपूर लाभ मिल सकेगा। भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि साल की शुरुआत में जहाँ आपको मनचाही नौकरी मिलने के भी योग बनेंगे। वहीं अगर आप प्रशासनिक सेवाओं या सरकारी नौकरियों में अपनी किस्मत आज़माना चाहते हैं तो यह समय अवधि आपके लिए बेहद अनुकूल रहने वाली है। जहां तक व्यापारी जातकों की बात हैं तो, व्यापार के भाव के स्वामी बुध देव सूर्य के साथ मिलकर इस दौरान "बुधादित्य योग" का निर्माण करेंगे। इसलिए साल 2021 आपके बिज़नेस के लिए सबसे बेहतर सिद्ध हो सकता है। परंतु वर्ष 2021 में इस राशि के जातक सब जांच करने के बाद ही लोगों पर भरोसा करें अन्यथा उन्हें व्यापार में हानि हो सकती है। भोजन, रत्न और कपड़ों के बिजनेस से जुड़े लोगों को वर्ष 2021 में बहुत लाभ मिलेगा। नवंबर माह के दौरान कुछ मीन राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र से संबंधित किसी विदेश यात्रा पर जाने का अवसर भी मिल सकता है। 

आर्थिक स्थिति 

वर्ष 2021 में आपको धन संबंधी मामलों में अच्छे परिणामों की प्राप्ति होगी। साल 2021 की शुरुआत में ही गुरु बृहस्पति और शनि की आपके एकादश भाव में युति आपको निरंतर धन का प्रवाह प्रदान करने में मदद करेगी। जिसके कारण आप अपना धन को जोड़ते हुए अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत कर सकेंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि मंगल ग्रह धन और परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, और उनकी कृपा भी आपको आर्थिक लाभ देने में मदद करेगी। इससे आपकी हर प्रकार की आर्थिक समस्याओं का बहुत ही जल्द अंत हो सकेगा। वर्ष 2021 के दौरान शनि आपके एकादश भाव में उपस्थित होंगे, जो आपके ख़र्चों के भाव के स्वामी भी होते हैं। ऐसे में आप अपने संसाधनों और रुपए का ज्यादा खर्च, अपनी विलासिता, विदेश यात्राओं व अन्य सुख-सुविधाओं पर करेंगे। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों पर आपका धन कम ख़र्च होगा। घर-परिवार में हो रहे किसी शुभ कार्यक्रम पर भी आपको कुछ ख़र्चा करना पड़ सकता है। हालांकि मध्य सितंबर के बाद, आपको अपने लंबे समय से अटके हुए किसी धन की प्राप्ति होने से अचानक लाभ मिलने के योग भी बनते नज़र आ रहे हैं।

परिवार 

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि वर्ष 2021 में मीन राशि के लोगों को अपने पारिवारिक जीवन में मन के अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि आपके और परिवार के सदस्यों के बीच चल रहा हर मतभेद समाप्त होगा, जिससे आपको एक दूसरे के साथ संबंध बेहतर करने में मदद मिलेगी। साल 2021 की शुरुआत में पारिवारिक जीवन सुखी और समृद्ध बनेगा, और इससे आपको घर में शांति की अनुभूति होगी। फरवरी माह के दौरान वृषभ राशि में मंगल का गोचर, आपके और परिवार के सदस्यों के रिश्तों में मजबूती और निकटता लाएगा। परिणामस्वरूप, इस दौरान आप जो भी काम करेंगे उसमें आपको भाई-बहन, विशेष रूप से अपने छोटे भाई का पूरा सहयोग मिलेगा। कई ग्रहों के शुभ प्रभाव से आप परिवार के सदस्यों या अपनी मेहनत के कारण, अगस्त और नवंबर के महीने में नया मकान खरीदने का प्लान भी कर सकते हैं। साल के मध्य में आपके और जीवनसाथी के बीच कुछ झगड़े और ग़लतफहमी पैदा होने की आशंका रहेगी। ऐसे में आपको इस दौरान एक-दूसरे पर, पूर्ण विश्वास रखने की सलाह दी जाती है। मीन राशि के जातकों के जीवन में किसी नन्हें मेहमान का आगमन भी संभव है।

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प्रेम-रोमांस 

प्रेम संबंध में वर्ष 2021 मीन राशि के जातकों को मिश्रित परिणाम मिलेंगे। क्योंकि प्रेम और रोमांस के पंचम भाव पर शनि की दृष्टि का प्रभाव, इस वर्ष प्रेमी जातकों के रिश्ते में कई चुनौतियाँ लेकर आएगा। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस दौरान आप पर गुरु बृहस्पति की कृपा भी होगी। विशेष रूप से इस साल के शुरुआती महीने, प्रेम में पड़े जातकों के लिए सामान्य से कम ही अच्छे रहेंगे। ऐसे में आपको सलाह दी जाती है कि, अपने गुस्से पर नियंत्रण रखते हुए, अपने प्रियतम पर बेवजह शक करने से बचें, अन्यथा आपको इसके लिए बाद में पछताना भी पड़ सकता है। जुलाई के माह के दौरान बुध का कर्क राशि में होने वाला गोचर, प्रेमी संग आपके रोमांस को पुनः जागृत करने का अवसर देगा। खासतौर पर अगर आप, लंबे समय से किसी प्रेम संबंध में हैं तो, आपके रिश्ते में इस दौरान नयापन आने की संभावना है। सितंबर के महीने में आपके और प्रेमी के बीच कुछ चुनौतियाँ भी आ सकती हैं। 

शिक्षा

वर्ष 2021 में मीन राशि के जातक छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण करने का फैसला भी ले सकते हैं। परंतु आपके पंचम भाव पर शनि देव की दृष्टि कुछ छात्रों की, पढ़ाई में रुकावटें उत्पन्न करने का मुख्य कारण बनेगी। इसलिए आपको शुरुआत से ही खुद को अपनी पढ़ाई-लिखाई के प्रति, केंद्रित रहने और अपनी मेहनत जारी रखने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि अप्रैल तक आपके पंचम भाव पर गुरु बृहस्पति की सकारात्मक दृष्टि, विधार्थियों को हर परीक्षा में सफलता प्रदान करेगी। वो जातक जो अभी तक बेरोज़गार हैं, उन्हें सितंबर के बाद नौकरी मिलने के योग बन रहे हैं। खुद पर आत्मविश्वास रखने की ज़रूरत होगी। परंतु आपको ये सलाह भी दी जाती है कि इस दौरान खुद पर ज़रूरत से ज्यादा आत्मविश्वास न करें, अन्यथा ऐसा करना आपके लिए बहुत हानिकारक साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य 

वर्ष 2021 में मीन राशि के जातकों को अपने स्वास्थ्य के अनुकूल परिणाम मिलेंगे। क्योंकि ग्रहों की स्थिति वर्ष 2021 की शुरुआत में आपके स्वास्थ्य जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। इसलिए मीन राशि के जातक वर्ष शुरुआत में मानसिक रूप से संतुष्ट रहते हुए, हर कार्य को योजना अनुसार सफलता के साथ पूरा करते दिखाई देंगे। कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि यदि आप पहले से किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं तो इस वर्ष 2021 में आप बेहतर स्वस्थ्य जीवन का आनंद उठा सकेंगे। हालांकि, अप्रैल में आपके द्वादश भाव में गुरु बृहस्पति के गोचर से, कुछ छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी संभव है। इसलिए आपको सेहत के लिहाज़ से अगस्त माह तक, सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अपने अच्छे स्वास्थ्य के लिए, सही और स्थिर दैनिक दिनचर्या के साथ-साथ अच्छी भोजन की आदतों को अपनाने की कोशिश करें। इस वर्ष आपको मौसम जनित रोग विकसित होने की आशंका भी है।

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ज्योतिष उपाय

कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि घर से निकलते हुए सदैव अपनी जेब में एक पीला साफ़ रुमाल ज़रूर रखें। हनुमान जी की आराधना और बजरंग बाण का पाठ करें। शनिवार के दिन छाया दान करें।

- अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक







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