Sakat Chauth Vrat: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय ये 5 Mistakes पड़ सकती हैं भारी, जानें सही Puja Vidhi

Sakat Chauth Vrat
Unspalsh

सकट चौथ 2026 का व्रत संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है, जो चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना अधूरा माना जाता है। जानें चंद्र दर्शन का सही समय, अर्घ्य देने की संपूर्ण विधि और उन सामान्य गलतियों के बारे में जिनसे व्रत का फल कम हो सकता है।

हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी सकट चौथ का व्रत संतान की लंबी आयु और खुशहाली के लिए रखा जाता है। इस साल 6 जनवरी यानी कल इस व्रत को रखा जाएगा। सकट चौथ का व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता है, जब तक रात में चंद्रमा को अर्घ्य न दिया जाए। अर्घ्य देने का मतलब केवल जल चढ़ाना नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक उपाय है। कई बार अनजाने में हम अर्घ्य देते समय कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिससे व्रत सकट चौथ का फल पूरा प्राप्त नहीं होता है। आइए जानते हैं अर्घ्य देते समय सही नियम और वे गलतियां जिनसे बचना चाहिए।

- चंद्र दर्शन समय - चंद्रोदय रात 09 बजे पर होगा।

अर्घ्य देते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

- अर्घ्य देते समय अक्सर लोग यह गलती कर बैठते हैं कि जल की धार सीधे पैरों पर गिर जाती है, जिसे अशुभ माना जाता है। इसलिए अर्घ्य हमेशा थोड़ी ऊंचाई पर खड़े होकर देना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो, तो नीचे गमला या थाली रख लें, जिससे जल पैरों को न छुए। अर्घ्य के बाद उस जल को किसी पौधे में डाल देना शुभ माना जाता है।

- शास्त्रों में माना जाता है कि तांबे के बर्तन में दूध डालकर अर्घ्य नहीं देना चाहिए। यदि आप जल में दूध मिला रहे हैं, तो चांदी, पीतल या कांसे के लोटे का प्रयोग करें। तांबे के पात्र में सिर्फ शुद्ध जल और तिल ही डालें।

- अर्घ्य देते समय सीधे जमीन पर न खड़े हों।

- अपने पैरों की नीचे आसन जरुर रखें।

- जूते-चप्पल पहनकर अर्घ्य गलती से भी न दें।

- केवल जल अर्पित न करें।

- अर्घ्य के जल में सफेद तिल, अक्षत, सफेद फूल और थोड़ा सा दूध जरुर मिलाएं।

- सकट चौथ में तिल का विशेष महत्व है, इसलिए पूजा में तिल का शामिल होना भी जरुरी है।

- चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल की गिरती हुई धार के बीच से चंद्रमा के दर्शन करने चाहिए।

अर्घ्य देने का सही नियम

- चंद्रमा के उदय होने के बाद ही अर्घ्य दें।

- अर्घ्य देते समय 'सोमाय नमः' या 'चंद्रमसे नमः' मंत्र का जाप करें। इसके साथ ही अपनी संतान की सुरक्षा के लिए गणेश जी से प्रार्थना करें।

- अर्घ्य को तीन बार में थोड़ा-थोड़ा करके अर्पित करना चाहिए।

- अर्घ्य देने के बाद अपने ही स्थान पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा लगाएं।

सकट चौथ व्रत का महत्व

सकट चौथ को 'संकट हारिणी चतुर्थी' कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को मन का कारक माना गया है और गणेश जी को बुद्धि का देवता हैं। जब हम चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, तो हमारे मन के विकार दूर हो जाते हैं और परिवार में आने वाली संकट टल जाती है। वहीं, संतान सुख की प्राप्ति होती है। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़