Prabhasakshi
सोमवार, अक्तूबर 22 2018 | समय 20:40 Hrs(IST)

साहित्य जगत

ज़िन्दगी का हर एक पहलू सँवार (ग़ज़ल)

By शशांक शेखर त्रिपाठी | Publish Date: Jun 11 2018 4:20PM

ज़िन्दगी का हर एक पहलू सँवार (ग़ज़ल)
Image Source: Google

हिन्दी काव्य संगम से जुड़े शशांक शेखर जी कि रचना (ग़ज़ल) 'जिन्दगी का हर पहलू सँवार' में जीवन के संघर्ष और छोटी छोटी आरजुओं को पूरा करने की जद्दोजहद पर प्रकाश डाला गया है।

ज़िन्दगी का हर एक पहलू सँवार..
पर ख्वाहिशें मत कर दरकिनार..
 
गर है ज़िन्दगी तो मसले हैं हज़ार..
यहाँ हर दिन नहीं आती है बहार..
 
खुद के सिवा वज़ूद सारे नकार..
किसी सेहरा से खुद को पुकार..
 
कर आरज़ूओं से छोटा सा करार..
एक बार तो खुद से जा भी हार..
 
भूल फ़िक्र सारी भीग ज़ार ज़ार..
बारिश की जो पड़े ठंडी फुहार..
 
जिसको तू अपना कहता है यार..
ले उसका हाथ थाम बस एक बार..
 
अब छोड़ खुदी तू कर ले प्यार..
जीने के फक़त हैं दिन ही चार..
 
-शशांक शेखर त्रिपाठी
सोनभद्र, उत्तर प्रदेश

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप



Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.

शेयर करें: