कुदरत की बैठक में इंसान (व्यंग्य)

कुदरत की बैठक में इंसान (व्यंग्य)

इंसान अभी झूठे ख़्वाब दिखा रहा हैं कि प्रकृति का पूरा ध्यान रखेंगे, खाना बर्बाद नहीं करेंगे, व्यायाम करेंगे, विलासिता के सामान पर कम खर्च, स्वच्छ पर्यावरण के प्रति ज्यादा सवेदनशील बनेंगे, परिवार के साथ वक़्त बिताएंगे, किताबें पढेंगे, किचन गार्डन बनाएंगें, ठोस नीति रचाएंगे।

आपको पता नहीं होगा कि बरसों बाद कुदरत के बच्चों ने बैठक आयोजित की। इंसान ने अपनी बैठकों में कुदरत बारे सिर्फ बातें ही की लेकिन इस बैठक में इंसान के बारे सही फैसले लिए गए। सबसे पहले सभी ने चहककर ख़ुशी का इज़हार किया, हमारे हिरण, मोर नाच रहे हैं, आसमान नीला, पानी स्वच्छ, चिडियां गा रही हैं। हरिद्वार जैसी प्रसिद्ध जगह पर हमारा हाथी नहाकर आया है। सृष्टि रचयिता भी बहुत समय बाद संतुष्ट दिख रहे हैं। वृक्ष ने कहा, एक बार फिर प्रकृति का साम्राज्य स्थापित हो रहा है। इंसान को सख्त अनुशासन सिखाया जा रहा है, यह एक इंजेक्शन की तरह है जिससे इंसान बिलबिला रहा, लेकिन मां प्रकृति और मानवता का बहुत फायदा हो रहा है। परिस्थितियों के कारण इन्सान अब बदलता दिख रहा है। 

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हवा ने कहा, मुझे बिल्कुल विशवास नहीं है, इंसान को यह बदलाव मजबूरन करना पड़ रहा है क्यूंकि उसकी जान आफत में है। उसके उदास और तनाव भरे चेहरे से यही लगता है। हां, आजकल इंसानी पत्नियां संतुष्ट हैं क्यूंकि वह कपड़े धो, फैला कर, सुखा रहा है और बिना इस्त्री किए भी पहन रहा है। उसे खाना पकाना भी सिखा दिया गया है। आकाश ने कहा, प्रकृति में आया बदलाव पूरी दुनिया पसंद कर रही है, हज़ारों बंदे तो कवि हो गए हैं। 

इंसान अभी झूठे ख़्वाब दिखा रहा हैं कि प्रकृति का पूरा ध्यान रखेंगे, खाना बर्बाद नहीं करेंगे, व्यायाम करेंगे, विलासिता के सामान पर कम खर्च, स्वच्छ पर्यावरण के प्रति ज्यादा सवेदनशील बनेंगे, परिवार के साथ वक़्त बिताएंगे, किताबें पढेंगे, किचन गार्डन बनाएंगें, ठोस नीति रचाएंगे। कतई विश्वास नहीं हो रहा हमेशा धोखा देने वाले इस इंसान पर। प्रकृति परम शक्तिशाली है लेकिन लगता है इंसान बेकरार है अपने पुराने फार्मेट में लौटने को, क्यूंकि भौतिकवाद कसमसा रहा है, परेशान बाज़ार उसे बुला रहा है। यह एक रहस्य है कि स्वार्थी इंसान कितना सीखेगा और जीवन में कितना लागू करेगा या पहले की तरह भूल जाएगा। 

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अग्नि ने कहा इंसान इसी तरह डरा रहेगा तो सब ठीक रहेगा। कुदरत की सारी शक्तियां जिनको इंसान मनमाना नुक्सान पहुंचा चुका है एक हो जाएं तो उसका भौतिक दुनिया में लौटना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इंसान तो इंसान है उसकी हरकतों से सब वाकिफ हैं। उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह श्वान नहीं है जिसके स्वामी भक्ति के गुण अभी भी बचे हुए हों। मेरे विचार से कोरोना को पूरी तरह से वापिस नहीं जाना चाहिए नहीं तो इंसान प्रकृति को फिर नुक्सान पहुंचाएगा। पानी ने कहा, हमें फिलहाल ज्यादा खुश होने की ज़रूरत नहीं है, नई जगह घरौंदे बनाने चाहिएं और पुराने भी संभाल कर रखने चाहिए। सामूहिक निर्णय लिया गया, क्यूंकि अभी तक इंसान का चारित्रिक रिकार्ड प्रशंसनीय नहीं रहा है, aankh आंख खोलकर भी उस पर भरोसा न किया जाए। 

- संतोष उत्सुक