इस बार हमारी सरकार (व्यंग्य)

दिग्गज दिमाग सरकार बना चुके हैं। मंत्रालयों से किस किस की गोद भराई होगी यह तय है। जिन अफसरान का तबादला होना है वे मानसिक व शारीरिक स्तर पर पूरी तरह तैयार हैं। उनके जाने के बाद हम अपनी टीम लाएंगे और वायदों के मुताबिक विकास करेंगे जिनमें आशा जगाऊ, ख़्वाब दिखाऊ शैली हमेशा की तरह समाहित की जाएगी।
‘इस बार आपकी सरकार’ कहना अब सिर्फ नारा नहीं रहा। अब तो हमारी पार्टी की सरकार बन चुकी है अरे नहीं आप सब की सरकार आ गई है। हमने तो पहले ही योजनाबद्ध व्यवसायिक तरीकों से कयासों के रंग बिरंगे बाग़ लगवा दिए गए थे जिनमें समझदार जनता को खूब सैर करा दी गई थी। हमने सरकार बनाने के लिए यानी चुनाव जीतने के लिए बहुत मेहनत की। विवादवार में राजनीति का निम्न स्तर बनाए रखा। खूब वायदे बांटे जिनपर आम आदमी हर बार की तरह इस बार भी मुग्ध रहा। गज, फुट और इंच जैसे नेताओं के वायदे हज़म करने का अनुभव तो अब देश के हर व्यक्ति को है।
दिग्गज दिमाग सरकार बना चुके हैं। मंत्रालयों से किस किस की गोद भराई होगी यह तय है। जिन अफसरान का तबादला होना है वे मानसिक व शारीरिक स्तर पर पूरी तरह तैयार हैं। उनके जाने के बाद हम अपनी टीम लाएंगे और वायदों के मुताबिक विकास करेंगे जिनमें आशा जगाऊ, ख़्वाब दिखाऊ शैली हमेशा की तरह समाहित की जाएगी। इस चुनाव में जिनकी जमानतें ज़ब्त हुई उनके लिए हमारी संवेदनाएं हैं। विपक्षी राजनीति की चारित्रिक विशेषता और घोर आवश्यकताएं अभी भी बदली नहीं हैं। हमने तो हमेशा पार्टी और विकास, किसान और गरीबों के किए बढ़िया स्वादिष्ट योजनाएं पकाकर पेश की हैं।
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हमारी सरकार तो बन गई है लेकिन इस बार भी काफी लोगों ने पता नहीं हर किसी को वोट दिया। अब उन्हें मलाल रहेगा कि अच्छी आफर के बावजूद वे हमारे दल में शामिल क्यूं नहीं हुए। अभी भी कुछ नासमझ नागरिक बार बार लालच देने, आग्रह करने और उपहार देने के बावजूद वोट नहीं देते। शायद उन्हें किसी भी राजनीतिक पार्टी पर विश्वास नहीं रहा। कई हारे हुए घिसेपिटे, पुराने, धोखा खाए, पैसा लुटाए और साथसाथ शरीर तुड़वाए पूर्व राजनीतिज्ञ भी मानते हैं कि जिन नक्षत्रों में कुछ वोटरों ने जन्म लिया और जिन निम्न स्तरीय, नारकीय जीवन परिस्थितियों में जी रहे हैं, से उन्हें भगवान के सामने दिन रात की गई लाखों प्रार्थनाएं नहीं निकाल सकीं, विपक्ष में बैठे दिल के मैले व्यक्ति उनका भला कैसे सोच सकते हैं।
अब हमारी सरकार है इसलिए हम सीना ठोककर कहते हैं कि इस बार फिर लोकतंत्र की जीत हुई क्यूंकि लोकतंत्र कभी नहीं हारता। हममें से ज़रूर कुछ लोग मिल कर लोकतंत्र को हराने में लगे रहते हैं। हम विशवास के साथ कहते हैं कि देश के हर चुनाव में आशा, विश्वास, मानवता, धर्म की भी जीत होती है। इस बारे स्वतंत्र भारत के नए स्वर्णिम इतिहास पर विश्वास किया जा सकता है। हमारी सरकार झूठ साबित कर देगी कि अधिकतर नेताओं द्वारा भाग्य तो अपना, अपना, अपना, अपने वफादारों या सरमाएदारों का ही बदला जा सकता है। हम सबकी तकदीर बदल डालेंगे और बता देंगे कि असली भाग्य विधाता हमेशा की तरह ताक़त और पैसा ही नहीं है। हमारी सरकार में वक़्त और स्थितियों से लड़ने की हिम्मत है। हमारी, माफ़ करें आपकी अपनी सरकार के निर्माता जानते हैं कि उन्होंने विपक्ष की सभी प्रकार की धारणाओं को कैसे ध्वस्त करना है।
- संतोष उत्सुक
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