जवाब जिनका नहीं (व्यंग्य)

इस दौरान यह कह देना ज़रूरी होता है कि जिस सम्बन्ध में सवाल पूछे जा रहे हैं उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। साथ साथ यह भी कह देना चाहिए कि जो लोग गलत करते हैं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उनसे ऐसा करने की उम्मीद नहीं थी। अच्छी राजनीतिक जलवायु हो तो यह एक उम्दा जवाब माना जाता है और समाज में प्रसिद्ध भी है।
ऐसी खबर का जलवा कई दिन तक बरकरार रहता है जिसमें सामाजिक स्तर पर प्रसिद्ध, बहुत ज्यादा पहुंच वाला, खूब प्रभाव पैदा कर सकने वाला व्यक्ति किसी भी मुश्किल सवाल का जवाब संयम और मुस्कुराते हुए देता रहे। इससे देश के काफी बड़े हिस्से की तबीयत ठीक रहती है। वैसी खबर का जलवा एक दम बिखरा सा रहता है जब उसी तरह का व्यक्ति एक ही साक्षात्कार में कई सवालों के जवाब न दे पाए।
ऐसा होना स्वाभाविक है जब परीक्षा से पहले सम्बंधित विषय की भरपूर तैयारी न की जाए। अपने गुरुओं और वरिष्ठ जनों की बातों को ठीक से सुना और समझा न हो। कक्षा या ज़िंदगी की कक्षा में बैठे हों लेकिन ध्यान कहीं और हो और नोट्स न लिए हों। अभ्यास करने के दौरान संजीदगी न बनाए रखो तो उचित समय पर सवालों के जवाब भूल ही जाते हैं, जिसे जवाब देते नहीं बना भी कहते हैं।
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इम्तिहान से पहले व्यक्ति सोचता है कि मुझे सब कुछ पता है, सब याद है, मुझसे ज्यादा चतुर कोई नहीं। कोई कैसा, ऐसा या वैसा सवाल आएगा तो हल कर लूंगा।
कई बार ऐसा हो जाता है कि परीक्षा की घड़ी बिना बताए मुख्य दरवाज़े पर आन खड़ी होती है। सुना है, तब याद किया सब कुछ भूल जाता है। कई सवाल सामने बैठ जाते हैं, एक दो सवाल को तो खड़े रहना पड़ता है इसलिए वे नाराज़ भी हो जाते हैं।
जब जवाब सूझता नहीं तो बंदा सोचता है कि मुझे जवाब देने की तैयारी निरंतर रखनी चाहिए थी। अभ्यास करते रहना चाहिए था। दूसरे अनुभवी लोगों से पूछ लेना चाहिए था। परीक्षा में तो कुछ भी प्रत्याशित या अप्रत्याशित पूछा जा सकता है इसलिए यह पता होना चाहिए कि अगर सवाल का रंग लाल या नीला हो तो जवाब कौन से रंग का देना है। कई सवाल ऐसे होते हैं कि पोल खोल दें जिससे तबीयत अविलंब खराब हो जाती है। अस्पताल का सहारा लेना पड़ता है। सवाल घबराहट का माहौल बन देते हैं।
इस दौरान यह कह देना ज़रूरी होता है कि जिस सम्बन्ध में सवाल पूछे जा रहे हैं उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। साथ साथ यह भी कह देना चाहिए कि जो लोग गलत करते हैं उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उनसे ऐसा करने की उम्मीद नहीं थी। अच्छी राजनीतिक जलवायु हो तो यह एक उम्दा जवाब माना जाता है और समाज में प्रसिद्ध भी है। यह हमारे सामाजिक जीवन का आधार कार्ड भी है। असल में सवाल तो वही असली सवाल माने जाते हैं जिनका जवाब न दिया जा सके। बड़ों बड़ों की बोलती बंद कर दें। सवाल ऐसे होते हैं तो जवाब भी ऐसे होते हैं या हो सकते हैं जो बड़ी से बड़ी बोलती बंद कर दें।
सवालों ने अपने बीच से हमेशा कई ऐसे सवाल खड़े किए जिन्हें कोई जवाब बिठा न सका। कितने सवाल अपने जवाब ढूंढते रहे अभी भी ढूंढ रहे होंगे। पुलिस की मदद ली, सुप्रसिद्ध समझदारों, सिद्धहस्त महात्माओं और जाने माने ज्योतिशिओं की सलाह ली लेकिन न असली जवाब मिले न नकली। आखिर में यही मानना पडेगा कि जवाब जिनका नहीं, वो सवाल होते हैं असली सवाल।
- संतोष उत्सुक
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