संपत्ति, सेहत और रिश्ते (व्यंग्य)

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संतोष उत्सुक । Feb 15 2025 3:45PM

हमको यह सदियों से पता है, शायद इस बारे उन्हें पता नहीं, तभी अध्ययन में हमारे यहां से कोई प्रतिनिधि नहीं लिया। हमारे यहां तो पैसा कमाने के लिए, संपत्ति हथियाने के लिए लोग क्या क्या करते हैं। रिश्ते पैसे के कारण बनते हैं।

विदेशी विश्वविद्यालयों के अध्ययन करने के विषय चयन और तरीकों ने मुझे हमेशा हैरान किया है। हर हाल में खुश रहने जैसी सामान्य सी बात बारे बचपन से बुजुर्गों से सुना है, अनेक भाषाओँ में लाखों किताबें हैं, प्रवचन हैं। लेकिन विदेशी लोग ऐसे छोटे मोटे विषयों पर ही लगातार अध्ययन, सर्वेक्षण और अनुसंधान करते रहते हैं। पिछले दिनों पता लगा कि छियासी साल तक अध्ययन करने के बाद हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने निष्कर्ष निकाला कि खुशियों के लिए संपत्ति और सेहत से ज्यादा जरूरी हैं रिश्ते। 

हमको यह सदियों से पता है, शायद इस बारे उन्हें पता नहीं, तभी अध्ययन में हमारे यहां से कोई प्रतिनिधि नहीं लिया। हमारे यहां तो पैसा कमाने के लिए, संपत्ति हथियाने के लिए लोग क्या क्या करते हैं। रिश्ते पैसे के कारण बनते हैं। जब टूटते हैं तो पैसों का ही हिसाब किताब होता है। जिसके पास पैसा नहीं हैं उस पर नज़र भी नहीं डालना चाहते। हमारी राजनीतिक संस्कृति यही है, पहले खाते में पैसे जमा किए जाते हैं फिर वोट का पवित्र रिश्ता कायम होता है। पता नहीं किन देशों के किन लोगों पर अध्ययन कर नतीजा निकाला। दुःख की बात है कि छियासी साल लगा दिए। बिगड़ते वक़्त और समाज में तत्काल विचार करना बेहद ज़रूरी है। इतने सालों में बढ़ते संचार के बहाव में रिश्तों ने अपनी रवानगी खो दी है।

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संदर्भित अध्ययन काल के दौरान मानवीय रिश्ते बहुत बदल चुके हैं। रिश्ते अब नैनो शिप में सवार हैं जिसे डेटिंग वेबसाईट द्वारा चलाया जा रहा है। इस शिप में फायदा यह है कि सम्बन्ध, कुछ मिनट या बातचीत भर का होता है जिसे आगे बढ़ाने का कोई दबाव नहीं। अगला फायदा, सम्बन्ध अनजान व्यक्ति के साथ हो सकता है जिसे आप अच्छी तरह से जानते भी नहीं। नैनो शिप में सवार सम्बन्धों का महत्त्व यही है कि कुछ वक़्त के लिए खुशी मिले। वन नाईट स्टैंड भी तो रिश्तों का ही रूप है। शादियों की भव्यता अति की तरफ जा रही है। कर्ज़ लेकर रिश्तों का निर्माण भव्य बनाया जा रहा है। आपसी विशवास और प्रेम की नैसर्गिकता, सौम्यता, सरलता खतरे में हैं। रिश्तों का हाल बेहाल हो गया है, ऐसे में हावर्ड का अध्ययन क्या करेगा।  

रिश्तों पर गहन और तकनीकी अध्ययन होता रहा जिससे इनकी सहजता, सम्मान, विशवास, ईमानदारी, उदारता की आधारभूत भावना को काफी नुकसान हुआ। विकास के साथ भौतिक जीवन को महत्ता मिलती रही और रिश्ते, रिसते, घिसते और पिसते रहे। अब हावर्ड जैसा नामी विश्वविद्यालय छियासी साल अध्ययन करने के बाद मानवीय सुझाव देते हुए बता रहा है कि रिश्ते, संपत्ति और सेहत से भी ज़रूरी हैं। यह तो ऐसा लग रहा है जैसे हिंसा जगाती, फैलाती, भड़काती फ़िल्में बरसों तक देखने के बाद मधुर संगीत से सजी पुरानी फिल्म चितचोर देखने के लिए कहा जाए। 

- संतोष उत्सुक

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