भारत से सटे इलाकों में ईसाई राज्य बनाने का अमेरिकी प्लान, RAW और KGB के धुरंधर ऑपरेशन ने कैसे CIA को दी मात

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अभिनय आकाश । Mar 20 2026 1:08PM

एनआईए ने छापेमारी करते हुए छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। यह लोग वो थे जो सीआईए के एजेंट बताए जा रहे हैं और भारत को तोड़ने की कोशिश रच रहे थे। ऐसे आरोप लग रहे हैं। खुलासा यह हो रहा है कि यह चीन और म्यांमार के विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहे थे, हथियार दे रहे थे और भारत के विद्रोही गुटों से मिले हुए थे। आखिर सीआईए का मिशन क्या है और भारत के खिलाफ कितनी बड़ी साजिश रची जा रही थी जिसको एनआईए ने कुचल कर रख दिया।

13 मार्च 2026 कोलकाता का नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट शाम का वक्त था। नॉर्थ ईस्ट से लौटा एक अमेरिकी नागरिक वापसी की फ्लाइट पकड़ने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जैसे ही काउंटर पर उसके डॉक्यूमेंट्स स्कैन होते हैं तो इमीग्रेशन अधिकारी को कुछ ऐसा दिखता है कि उसे तुरंत हिरासत में ले लिया जाता है और गिरफ्तारी के बाद उसे एनआईए नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के हवाले कर दिया जाता है। लेकिन उस शाम वो इकलौता शख्स नहीं था जिसे एनआईए ने गिरफ्तार किया था। लखनऊ और दिल्ली एयरपोर्ट पर छह और लोगों को कस्टडी में लिया गया था और हैरान करने वाली बात यह थी कि यह सभी लोग विदेशी नागरिक थे। जिनमें से एक अमेरिकी और छह यूक्रेन के सिटीजन थे। लेकिन ये गिरफ्तारियां हुई क्यों? इसका जवाब मिला 15 मार्च को। जब एनआईए ने इन सभी पकड़े गए सातों विदेशी नागरिकों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। पकड़े गए इन सातों लोगों में एक अमीरकी शख्स ऐसा है जिसकी पहचान उजागर होते ही जांच एजेंसियों में खलबली मच गई है। एक ऐसा शख्स जो दुनिया के हर कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन में नजर आता है। फिर चाहे वो लीबिया से लेकर सीरिया में चल रहा गृह युद्ध हो या यूक्रेन में हो रही जंग हो। यहां तक कि वेनेजुएला में भी यह शख्स दिखाई दिया था। यानी यह शख्स हर उस जगह मौजूद रहता है जहां कोई ना कोई जंग चल रही हो। इस अमेरिकी नागरिक का नाम है मैथ्य बेंडिक जिसे कोई सीआईए का आदमी बताता है तो कोई भाड़े का सैनिक। लेकिन सवाल यह है कि यह शख्स आखिर है कौन? जिस वक्त ईरान, इजराइल में जंग छिड़ी हुई है, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आपस में भिड़े हुए हैं। उस बीच भारत से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आती है। खबर ये कि एनआईए ने छापेमारी करते हुए छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। यह लोग वो थे जो सीआईए के एजेंट बताए जा रहे हैं और भारत को तोड़ने की कोशिश रच रहे थे। ऐसे आरोप लग रहे हैं। खुलासा यह हो रहा है कि यह चीन और म्यांमार के विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहे थे, हथियार दे रहे थे और भारत के विद्रोही गुटों से मिले हुए थे। आखिर सीआईए का मिशन क्या है और भारत के खिलाफ कितनी बड़ी साजिश रची जा रही थी जिसको एनआईए ने कुचल कर रख दिया।

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रूस का इंटेल और एनआईए का एक्शन

13 मार्च को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए ने छह यूक्रेनियन सिटीजन को और एक यूएसए के सिटीजन को गिरफ्तार किया है और उनके ऊपर आरोप है कि वो इंडिया के मिजोरम स्टेट के रिस्ट्रिक्टेड एरिया से क्रॉस कर म्यांमार गए थे और वहां पर इंसर्जेंट ग्रुप्स के साथ उन्होंने इंगेज किया। उनके ऊपर आरोप यह भी है कि वह ऐसी एक्टिविटीज को प्लान करने वाले थे जिससे टेररिज्म को बढ़ावा मिले। ड्रोंस की सप्लाई करने वाले थे, वेपंस की सप्लाई करने वाले थे और इन्हीं सारे आरोपों के आधार पर एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक रूस का नया एंगल आ रहा है कि ये सारे जो भी इनपुट्स आए हैं इंडिया को वो रूस की तरफ से आए हैं। यानी रूस ने ये इंफॉर्मेशन साझा की थी। उसके बाद भारत ने गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किया।  इन्हें लखनऊ, दिल्ली और कोलकाता के एयरपोर्ट से इन्हें गिरफ्तार किया गया था और फिर इन्हें दिल्ली के कोर्ट में पेश किया गया। वहां से 27 मार्च तक की कस्टडी मिल गई है। तो रूस का एंगल यही है कि जानकारी यह है कि रूस ने यह इंटल भारत को दी थी। 

यूक्रेन ने पूरे मामले पर क्या कहा

जाहिर तौर पर यूक्रेन का यही चिंता है। इसके अलावा यूक्रेन ने इन आरोपों को सीधे तौर पर खारिज किया है कि उसके नागरिक आतंकी गतिविधियों में इंडल्स थे।  यूक्रेन का कहना है कि वो खुद आतंकवाद से पीड़ित है तो वो कैसे आतंकवाद का साथ दे सकता है ये कहना है। इसके अलावा यूक्रेन ने पीएम मोदी की अगस्त 204 में जब वो यूक्रेन गए थे उस यात्रा का भी हवाला दिया है और कहा है कि तब दोनों देशों के बीच संयुक्त बयान में ये कहा गया था आतंकवाद की निंदा की गई थी। आतंकवाद के खिलाफ बयान दिया गया था। तो हम कैसे ये कर सकते हैं? इसके बाद यूक्रेन ने जो है मांग की है कि इस पूरे मामले की जो है निष्पक्ष तरीके से जांच हो। ट्रांसपेरेंट तरीके से जांच हो। वहीं इस पूरे मामले पर यूक्रेन ने रूस पर आरोप लगाया है। यूक्रेन का कहना है कि रूस जो है भारत और यूक्रेन के बीच दरार डालने की कोशिश कर रहा है। ये ऐसी प्लांट कर रहा है। यह इंटल दे रहा है। जिससे जो भारत और यूक्रेन के संबंध है आगे बढ़ रहे हैं। दोस्ती आगे बढ़ रही है। वो खराब हो जाए। उसमें दरार पैदा हो जाए। यानी यूक्रेन एक तरह से इसे साजिश कहना चाह रहा है। रूस पर इस साजिश का आरोप लगा रहा है और साथ ही यह भी कहा है कि हम इस जांच में भारत का सहयोग करने के लिए तैयार हैं। लेकिन निष्पक्ष होनी चाहिए और दोनों देशों के सहयोग से होनी चाहिए। यानी यूक्रेन का सीधा-सीधा यह कहना है कि ये रूस की साजिश है। भारत और यूक्रेन के संबंधों को तोड़ने के लिए, यूक्रेन को बदनाम करने के लिए और यूक्रेन के नागरिक आतंकी गतिविधि में नहीं है और यूक्रेन निष्पक्ष जांच चाहता है और उसमें सहयोग करने के लिए तैयार है।

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भारत से सटे इलाकों में ईसाई राज्य बनाने का अमेरिकी प्लान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना जब सत्ता में थी तब भी उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया था कि वह भारत से सटे इलाकों में एक ईसाई राज्य बनाना चाहता है। नॉर्थ ईस्ट में पहले से ही काफी इंसजेंसी थी जिस पर भारत सरकार ने वक्त के साथ काबू पाया है। आज भी मणिपुर, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों में अपस्पा आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट लागू है। इसलिए यहां होने वाली सारी गतिविधियों पर एजेंसियां पैनी नजर रखती हैं। अमेरिकी नागरिक मैथ्य वेंडिक पहले से ही एक विवादित कैरेक्टर रहा है जिसकी इंसलजेंसी और युद्धग्रस्त क्षेत्र से विवादित नाता है। ऐसे में इसके देश में एंट्री के साथ ही एजेंसियां मॉनिटरिंग कर रही होंगी। जिसके चलते पूरा जाल बिछाकर इन्हें एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। रेडिट और एक्स पर चल रही चर्चा में कुछ मैथ्यू को भाड़े का फौजी बताते हैं कुछ सीआईए का एजेंट। अपनी वेबसाइट में मैथ्य वेंडिक ने खुद को डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर, डिफेंस एक्सपर्ट, वॉर रिपोर्टर और फ्रीडम फाइटर बता रखा है। उम्र करीब 46 साल है। अमेरिका के बाल्टीमोर में जन्मा पॉलिटिकल साइंस में बैचलर्स किया और जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी से सिक्योरिटीज स्टडी में मास्टर्स। अपनी वेबसाइट में मैथ्यू दावा करता है कि इस कोर्स में एडमिशन पाने वाला वो सबसे कम उम्र का शख्स है। उसके मास्टर्स कोर्स का थीसिस था ओबामा बिन लादेन की लीडरशिप वाला अलकायदा अमेरिका को क्यों निशाना बनाता है। साल 2007 में अरब में हो रही उठापटक से प्रभावित होकर मैथ्य ने अफ्रीका से मिडिल ईस्ट तक बाइक राइड की थी। उसने कावासाकी के एलआर 650 बाइक से 3 साल तक टूर किया। जिसमें मोरक्को, मोरिटेनिया, ट्यूनेशिया, लीबिया, इजिप्ट, जॉर्डन, सीरिया, तुर्की को कवर करते हुए इराक में अपना सफर खत्म किया था। मैथ्यू की वेबसाइट के मुताबिक उसने साल 2009 में वॉर रिपोर्टर के तौर पर काम करना शुरू किया। 

असद के खिलाफ विद्रोहियों के साथ

बाल्टीमोर एग्जामिनर नाम के एक अखबार के लिए उसने इराक में वॉर कवर किया और इस दौरान अमेरिकी सेना के साथ लंबा वक्त बिताया। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में वेंडेट एक कथित प्रोजेक्ट के लिए अफगानिस्तान गया। जहां उसने लंबे वक्त तक अमेरिकी सेना के साथ वक्त बिताया। इस दौरान उसने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के सबसे इंटीरियर ठिकाने फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस्ड डायलॉग में भी वक्त बिताया था। मैथ्यू दावा करता है कि वो ओसीडी से पीड़ित है। ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर से। एक ऐसा मेंटल स्टेट जिसमें किसी इंसान को बार-बार अवांछित विचार आते हैं। एक तरीके से ऑब्सेशन की तरह वो उस इंसान को किसी चीज को बार-बार करने के लिए मजबूर करता है। 2010 में वेंडिक्ट ने अरब देशों में दूसरी बार मोटरसाइकिल जर्नी की थी। इस बार वेंडिक्ट मशहूर फोटोग्राफर डेनियल ब्रिट के साथ इराक से अफगानिस्तान होते हुए ईरान तक बाइक के जरिए यात्रा की। साल 2011 में वेंडिक्ट पहली बार बड़े स्तर पर चर्चा में आए। जब लीबियन वॉर में उनकी एंट्री हुई थी। 2011 में वेंडिक्ट लीबिया चले गए और वहां के लीडर मुअमर गद्दाफी के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ विदेशी लड़ाके के तौर पर लड़ाई करने लगे। हालांकि उन्हें जून में गिरफ्तार कर लिया गया और त्रिपोली के कुख्यात अबू सलीम जेल में सॉलिटरी कनफाइनमेंट में रखा गया। बाद में विद्रोहियों ने जब त्रिपोली पर कब्जा किया तो वेंडिक्ट जेल से छूट गए और वापस से लड़ाई में शामिल हो गए। साल 2012 में वेंडिक्ट की सीरिया सिविल वॉर में भी एंट्री हुई। वो बशर अल असद के खिलाफ विद्रोहियों के साथ देने लगा। उन्हें ट्रेनिंग देने लगा। जिन पर वेंडिक्ट ने बकायदा एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बना रखी है। इस दौरान असद रिजीम ने वेंडिक्ट को आतंकी घोषित कर दिया था।

वैनडाइक है मास्टरमाइंड, लीबिया में विद्रोही लड़ाकों का मददगार

वैनडाइक खुद को सुरक्षा विश्लेषक, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता और युद्ध संवाददाता बताता है। उसका जन्म बाल्टीमोर में हुआ और उसने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से सिक्योरिटी स्टडीज में ग्रेजुएशन किया है। युद्ध के अनुभवों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन किया है।

सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल नामक संगठन के जरिए उन समूहों को सैन्य प्रशिक्षण और रणनीतिक सहायता प्रदान करता है जो तानाशाह के खिलाफ लड़ रहे हैं।

2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान वहां के विद्रोही लड़ाकों के साथ शामिल रहा। इस दौरान उसे बंदी बना लिया गया था।

प्रशिक्षण मॉड्यूल में मुख्य रूप से गुरिल्ला युद्ध कौशल, ड्रोन संचालन और आधुनिक युद्ध रणनीतियां शामिल हैं।

उग्रवादी गुटों तक पहुंचा रहे हथियार

मिजोरम म्यांमार सीमा पर लंबे समय से अस्थिरता बनी है। यहां चिन स्टेट (म्यांमार का हिस्सा, जो मिजोरम से सटा है), अराकान आर्मी (राखाइन में) और अन्य सशस्त्र जातीय संगठन जैसे चिन नेशनल आर्मी, चिन नेशनल फ्रंट आदि सैन्य जुटा के खिलाफ लड़ रहे हैं। भारत के लिए चिंता चिंता इसलिए है कि इनमें से कई गुट भारत के उग्रवादी संगठनों जैसे उल्फा (आई), एनएससीएन के कुछ गुटों, कुकी नेशनल आर्मी आदि से जुड़े हुए हैं। ये ग्रुप्स हथियार, ड्रग्स और अब ड्रोन टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान करते हैं। आरोपी कई बार ट्रेनिंग देने आ चुके हैं। इस बार वे गुवाहाटी पहुंचे और फिर मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में घुसे, जहां ट्रेनिंग दी। भारत लौटने पर एनआईए ने 13 मार्च 2026 को उन्हें पकड़ा।3 यूक्रेनी नई दिल्ली एयरपोर्ट और अन्य 3 लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पकड़े गए। जबकि अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से पकड़ा। अब इनकी डिजिटल फुटप्रिंट और पिछले महीनों की गतिविधियां ट्रैक की जा रही हैं।

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