टेरर फंडिंग के लिए Cryptocurrency की चोरी, दिल्ली में हुआ फ्रॉड और आतंकी संगठन HAMAS के पास पहुंच गया

टेरर फंडिंग के लिए Cryptocurrency की चोरी, दिल्ली  में हुआ फ्रॉड और आतंकी संगठन HAMAS के पास पहुंच गया

इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की लीड के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने क्रिप्टोकरेंसी की इस चोरी का पर्दाफाश कर दिया। स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट का दावा है कि पश्चिम विहार के एक कारोबारी के मोबाइल वॉलेट पर 'हमास' के आतंकियों ने साइबर अटैक करके करीब 31 लाख क्रिप्टोकरंसी (6.2 बिटक्वाइन, 9.79 एथैरम और 2.44 बिटक्वाइन कैश) पार कर दी।

इजरायल की नाक में दम करने वाले आतंकी संगठन हमास ने दिल्ली के एक शख्स के क्रिप्टोकरेंसी अकांउट से 31 लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी की चोरी कर दी। लेकिन इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की लीड के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने क्रिप्टोकरेंसी की इस चोरी का पर्दाफाश कर दिया। स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट का दावा है कि पश्चिम विहार के एक कारोबारी के मोबाइल वॉलेट पर 'हमास' के आतंकियों ने साइबर अटैक करके करीब 31 लाख क्रिप्टोकरंसी (6.2 बिटक्वाइन, 9.79 एथैरम और 2.44 बिटक्वाइन कैश) पार कर दी। क्रिप्टोकरंसी की कीमत चार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। कैसे अपने गुर्गों का इस्तेमाल कर हमास क्रिप्टोकरेंसी की चोरी करता है और फिर आतंकी गतिविधियों के लिए रकम का इस्तेमाल करता है। 

 क्या है पूरा मामला?

आतंकी संगठन हमास ने दिल्ली के एक शख्स की क्रिप्टोकरेंसी जिसका खुलासा दिल्ली पुलिस ने कर सभी को चौंका दिया।  दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा ने बताया कि दिल्ली के एक व्यवसायी की ‘क्रिप्टोकरेंसी’ कथित रूप से चोरी कर उसे फलस्तीनी संगठन हमास की सैन्य शाखा अल-कासम ब्रिगेड के खाते में अंतरित की गई। उन्होंने बताया कि व्यवसायी ने 2019 में पश्चिम विहार थाने में शिकायत दर्ज करायी थी कि कुछ अज्ञात लोगों ने फर्जीवाड़ा करके उसके ‘वॉलेट’ से ‘क्रिप्टोकरेंसी’ कहीं और भेज दी है। साइबर प्रकोष्ठ के पुलिस उपायुक्त के. पी. एस. मल्होत्रा ने बताया, ‘‘जांच के दौरान सामने आया कि क्रिप्टोकरेंसी फलस्तीनी संगठन हमास की सैन्य शाखा अल-कासम ब्रिगेड के खाते में अंतरित की गई। जब्त किया गया वॉलेट मोहम्मद नसीर इब्राहिम अब्दुल्ला का था। दूसरा वॉलेट जिसमें क्रिप्टोकरेंसी का एक बड़ा हिस्सा ट्रांसफर किया गया था जो मिस्र के गीजा से ऑपरेट किया जा रहा था। दूसरा वॉलेट अहमद मर्जुक का था। जबकि तीसरा वॉलेट जिसमें क्रिप्टोकरेंसी को ट्रांसफर किया गया था वो फिलीस्तीन के अहमद क्यूएच सफी का था। 

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हमास का डिजिटल करेंसी कनेक्शन

पश्चिमी बिहार के जिस कारोबारी ने पुलिस को कंप्लेंट दी थी। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सीधे कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के निर्देश पर अगर ये केस दर्ज ना हुआ होता तो क्रिप्टोकरेंसी का इतना बड़ा खुलासा कभी ना होता। 2019 में कारोबारी के पास 6.2 बिटकॉइन 9.79 ऐथरम और 2.44 बिटकॉइन ब्लॉकचेन मोबाइल वॉलेट थे। यह तब सेंधमारी हुई थी। आई एफ एस ओ के करीब 6 महीने तक चली जांच में मोसाद की सबसे बड़ी भूमिका रही। सूत्रों का कहना है कि क्रिप्टोकरंसी चोरी करने के बाद पुलिस जांच में जुटी थी। इस दौरान इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने हैकिंग के इनपुट दिए थे। इसका अलर्ट मिलते ही भारतीय सुरक्षा एजेंसियां तफ्तीश में जुट गई। दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सबसे पहले सभी वॉलेट के नंबर लोकेशन का पता लगाया। खुफिया एजेंसियों को पता चला क्रिप्टोकरंसी हमास के मिलिट्री विंग अल किस्साम बिग्रेड के पास पहुंची है। वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग के लिए रुपयों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी वजह से हम आज के इस मिलिट्री विंग के वॉलेट को इजरायल की नेशनल ब्यूरो ऑफ काउंटर टेरर फाइनेंसिंग विंग टेरर फंडिंग करने के आरोप में सीज कर दिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक कई साल पहले अल किस्साम बिग्रेड ने अपने सोशल मीडिया पेज को आतंकी अभियान की फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया था उन्होंने सीधे अपने पेज पर बिटकॉइन डोनेशन में देने की मांग की थी।

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मोसाद की भूमिका

जुलाई 2021 में इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने हमास से संबंधित कई डिजिटल वॉलेट जब्त करने को लेकर घोषणा की थी। क्रिप्टो ट्रैकिंग एजेंसी के साथ एक संयुक्त ऑपरेशन में हमास द्वारा नकदी इकट्ठा करने के लिए उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट का एक नेटवर्क मिलाl जिसके बाद मंत्रालय ने खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया। खातों की सूची भारत सहित कई अन्य देशों को वितरित की गई है। डिजिटल वॉलेट के नियमन और अभियोजन की मांग के बीच यह खबर आई है। इसका उपयोग हैकर्स द्वारा ऑनलाइन अपराधों के माध्यम से प्राप्त धन को लूटने के लिए किया जाता है। भारत में, क्रिप्टो करेंसी का व्यापार करना और क्रिप्टो एक्सचेंज स्थापित करना दोनों की अनुमति है। हालांकि, वर्तमान में कोई कानून नहीं है जो क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग को नियंत्रित करे।

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी ?

क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है, जो दिखता तो नहीं है, लेकिन डिजिटली यूज किया जा सकता है। पिछले कुछ सालों से क्रिप्टोकरेंसी की लोकप्रियता बढ़ी है। ये डिजिटल मुद्रा इनक्रिप्टेड यानी कोडेड होती हैं। इसमें हर लेन-देन का डिजिटल सिग्नेचर द्वारा वेरिफिकेशन होता है। क्रिप्टोग्राफी की मदद से इसका रिकॉर्ड रखा जाता है।

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अल कासिम ब्रिगेड क्या है?

क्रिप्टोकरेंसी चोरी के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में अल-कस्साम ब्रिगेड की संलिप्तता का पता चला है। जिसका पूरा नाम इज़्ज़ एड-दीन अल-क़सम ब्रिगेड हमास की सैन्य शाखा का फ़िलिस्तीनी इस्लामवादी राजनीतिक संगठन है। मरवान इस्सा वर्तमान में समूह का लीडर है। समूह की स्थापना 1992 में याह्या अय्यश के नेतृत्व में हमास के लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए एक एकजुट सैन्य संगठन बनाने के प्राथमिक लक्ष्य के साथ की गई थी, जिसमें उस समय ओस्लो समझौते को लागू होने से रोकना शामिल था। इज़्ज़ एड-दीन अल-क़सम ब्रिगेड ने 1994 और 2000 के बीच कथित तौर पर इजरायली सैनिकों और नागरिकों दोनों पर हमले किए। इज़्ज़ एड-दीन अल-क़सम ब्रिगेड के वेस्ट बैंक में कई सेल थे, लेकिन क्षेत्र में आईडीएफ के संचालन के परिणामस्वरूप उनमें से अधिकांश को 2004 तक नष्ट कर दिया गया था। दूसरी ओर, हमास ने गाजा में एक मजबूत उपस्थिति बनाए रखी, जिसे अक्सर इसका गढ़ माना जाता है। यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम ने इज़्ज़ एड-दीन अल-क़सम ब्रिगेड को एक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है। इज़ अल-दीन अल-क़सम ब्रिगेड हमास की ही एक विंग है जो उसके व्यापक राजनीतिक और वैचारिक लक्ष्यों के अधीन हैं, हालांकि इस बिग्रेड को महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वायत्तता प्राप्त है।

-अभिनय आकाश  






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