CBI डायरेक्टर चुने जाने की पूरी कहानी, जानें सबसे बड़ी जांच एजेंसी का इतिहास और इससे जुड़ी अनसुनी बातें

CBI डायरेक्टर चुने जाने की पूरी कहानी, जानें सबसे बड़ी जांच एजेंसी का इतिहास और इससे जुड़ी अनसुनी बातें

सीबीआई चीफ पद से ऋिषि कुमार शुक्त के रिटायर होने के बाद से ही सीबीआई को अपने नए बॉस की तलाश थी। सीबीआई में सीनियर मोस्ट एडिशनल डायरेक्टर प्रवीण सिन्हा फुल टाइम चीफ की नियुक्ति तक सीबीआई डायरेक्टर का कार्यभार संभाल रहे हैं।

2013 में आई नीरज पांडे की बेहतरीन फिल्म ‘स्पेशल 26’ में रेड मारने गए सीबीआई इंस्पेक्टर वसीम खान का रोल निभा रहे मनोज बाजपेयी कहते हैं, ‘हम सीबीआई से हैं…सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी सीबीआई देशभर में होने वाले अपराधों जैसे हत्या, घोटालों और भ्रष्टाचार की भारत सरकार की तरफ से जांच करती है। लेकिन देश की सबसे ताकतवर जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख का पद मार्च महीने से ही रिक्त पड़ा था। सीबीआई चीफ पद से ऋिषि कुमार शुक्त के रिटायर होने के बाद से ही सीबीआई को अपने नए बॉस की तलाश थी। सीबीआई में सीनियर मोस्ट एडिशनल डायरेक्टर प्रवीण सिन्हा फुल टाइम चीफ की नियुक्ति तक सीबीआई डायरेक्टर का कार्यभार संभाल रहे हैं। सीबीआई का नया बॉस चुनने के लिए पीएम मोदी, सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई एनवी रमना और लोकसभा में नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी की मौजूदगी में बैठक हुई। बैठक में तीन नामों पर चर्चा हुई, जिनमें एच सी अवस्थी , आर के चंद्रा और  वीएसके जिन्हें संभावित माना जा रहा है।

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ऐसे आज आपको बताएंगे कि सीबीआई की स्थापना कैसे हुई, इसका इतिहास क्या रहा है और इससे जुड़ी वे कौन सी बातें हैं जो बहुत से लोगों को पता नहीं हैं। 

सीबीआई की स्थापना

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भ्रष्टाचार और घूसखोरी की जांच के लिए भारत की ब्रिटिश सरकार ने 1941 में स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट की स्थापना की। युद्ध के बाद दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट ऐक्ट, 1946 के प्रावधानों के तहत इस एजेंसी का संचालन होता रहा। अभी भी सीबीआई का संचालन इसी कानून के तहत होता है। शुरू में तो इसके जिम्मे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच थी लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया।

एक बढ़ती हुई जरूरत को महसूस करते हुए एक केंद्रीय पुलिस एजेंसी की जरूरत महसूस की गई जो केंद्रीय सरकार के अधिकार क्षेत्र में हो जो न केवल रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करे, अपितु केंद्रीय राजकोषीय घाटा नियम, बड़े धोखाधड़ी के मामले जो केंद्रीय सरकार के विभागों, लोक संयुक्त स्टॉक कंपनियों, पासपोर्ट, समुद्री अपराध, एयरलाइन्स से संबंधित और संगठित गैंग तथा पेशेवर अपराधियों द्वारा किए गए अपराधों की जांच कर सके। इसलिए भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 1963 को एक संकल्प पारित कर निम्नलिखित प्रभागों के साथ केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो का गठन किया।

अन्वेषण तथा भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग (डीएसपीई)

तकनीकी प्रभाग

अपराध अभिलेख और सांख्यिकी प्रभाग

अनुसंधान प्रभाग

 विधि तथा सामान्य प्रभाग

प्रशासन प्रभाग

सीबीआई की भूमिका 

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन जिसे आप कह सकते हैं सर्वोच्च संस्था जिसे जांच एजेंसी के तौर पर अभी तक देश में देखा जाता है। उद्यमिता, निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा सीबीआई का आदर्श वाक्य है। अपने आदर्श वाक्य को सही साबित करते हुए इस जांच एजेंसी ने अपनी स्थापना के बाद से ही अलग पहचान बनाई है। सीबीआई गंभीर अपराधिक मामलों के साथ ही कानून लागू करने में अंतरराज्जीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नोडल एजेंसी के रुप में कार्य करती है। 1963 में गृह मंत्रालय ने एक प्रस्ताव के माध्यम से स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट का नाम बदलकर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी सीबीआई कर दिया।

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भारत सरकार के 29 जनवरी 1964 में आर्थिक अपराधों को जोड़कर सीबीआई को और ज्यादा मजबूत बनाया। इस समय सीबीआई के पास दो अन्वेषण विंग है, एक को सामान्य अपराध विंग कहा जाना है जो केन्द्रीय सरकार/सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों के रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों को देखता है और दूसरा आर्थिक अपराध विंग है जो राजकोषीय नियमों के उल्लंघन के मामलों को देखता है। सितंबर, 1964 में जमाखोरी, कालाबाजारी, खाद्यानों में मुनाफाखोरी से संबंधित जानकारी इकट्ठा करने से संबंधित खाद्यान अपराध विंग बनाया गया और यह ऐसे मामले भी लेता है जो उस समय मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए अंतर्राज्य शाखा बनाने से संबंधित मामले। इसे 1968 में आर्थिक अपराध विंग में मिला दिया गया।

1. भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग

2. आर्थिक अपराध प्रभाग

3. विशेष अपराध प्रभाग

4. अभियोजन निदेशालय

5. प्रशासन प्रभाग

6. नीति और समन्वय प्रभाग

7. केंद्रीय आपराधिक विज्ञान प्रयोगशाला

सीबीआई जांच 

अगर कोई राज्य सरकार किसी आपराधिक मामले की जांच का सीबीआई से आग्रह करती है तो सीबीआई को पहले केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT)द्वारा एक अधिसूचना जारी किया जाता है। जिसके बाद सीबीआई द्वारा तफ्तीश शुरू की जाती है। वहीं भारत का सुप्रीम कोर्ट या राज्यों के हाई कोर्ट भी मामले की जांच का सीबीआई को आदेश दे सकते हैं। 

CBI के डायरेक्टर की सैलेरी 

सीबीआई के डायरेक्टर की सैलरी कितनी होती है इसका पता बेहद कम ही लोगों को होगा। आपको बता दें कि सीबीआई के डायरेक्टर की सैलरी हाईकोर्ट के न्यायधीश की तनख्वाह जितनी होती है। सीबीआई डायरेक्टर की फिक्स बेसिक सैलरी 80 हजार रुपये प्रति माह होती है। इसके अलावा बेसिक सैलरी पर कई तरह के अलाउंस मिलते हैं। डियरनेस अलाउंस बेसिक सैलरी का 120 फीसदी होता है। स्पेशल इंसेटिव अलाउंस 15 फीसदी मिलता है। इसके अलावा डीए भी जोड़ा जाता है। जिसके बाद सीबीआई डायरेक्टर की सैलरी 1.60 लाख से 2.20 रुपये प्रति माह तक हो जाती है। 

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साल 1963 से लेकर अब तक सीबीआई में 28 निदेशक रह चुके हैं

नाम कार्यावधि

डी पी कोहली 1963-1968

एफ वी अरुल 1968-1971

डी सेन               1971-1977

एस एन माथुर 1977

सी वी नरसिम्हन 1977

जॉन लोब            1977-1979

आर डी सिंह 1979-1980

जे एस बाजवा 1980-1985

एम जी कातरे 1985-1989

ए पी मुखर्जी 1989-1990

आर सेखर 1990

विजय करण 1991-1992

एस के दत्ता 1992-1993

के वी आर राव 1993-1996

जोगिंदर सिंह 1996-1997

आर सी शर्मा 1997-1998

डी आर कार्तिकेयन 1998

टी एन मिश्रा 1998-1999

आर के राघवन 1999 -2001

पी सी शर्मा 2001-2003

यू एस मिश्रा 2003-2005

विजय शंकर तिवारी 2005-2008

अश्विनी कुमार 2008-2010

ए पी सिंह 2010-2012

रंजीत सिन्हा 2012-2014

अनिल सिन्हा 2014-2016

राकेश अस्थाना (2016-2017) कार्यवाहक निदेशक

आलोक वर्मा 2017- जनवरी 2019

ऋषि कुमार शुक्ला 2019- फरवरी 2021

सीबीआई डायरेक्टर का कार्यकाल

सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति एक कमिटी के द्वारा किया जाता है। इस कमेटी में प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या उनके सिफारिश किया गया कोई जज शामिल होते हैं। साल 1977 से पहले तक सरकार के द्वारा सीबीआई डायरेक्टर को सीधे हटाया जा सकता था। लेकिन विनीत नारायण केस के बाद अब ऐसा संभव नहीं है। सीबीआई डायरेक्टर का कार्यकाल कम से कम दो साल का होता है। ताकि कोई भी डायरेक्टर बिना दबाव के स्वतंत्र रूप से काम कर सके। सीबीआई को किसी भी केस की जांच करने के लिए पहले केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होती है। अगर कोई राज्य सरकार किसू आपराधिक मामले की जांच का सीबीआई से आग्रह करती है तो भी केंद्र की अनुमति आवश्यक होती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट भी सीबीआई को किसी केस की जांच का आदेश दे सकते हैं। -अभिनय आकाश






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