• वन नेशन वन राशन कार्ड, इससे जुड़ा राजनीतिक विवाद और कैसे करेगा काम

अभिनय आकाश Jul 12, 2021 17:18

जैसा कि नाम से ही जाहिर है एक ही राशन कार्ड पर देश के किसी भी हिस्से में राशन लिया जा सकता है। ONORC योजना का उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत देश में कहीं भी किसी भी उचित मूल्य की दुकान से रियायती राशन खरीदने में सक्षम बनाना है।

आपको सबसे पहले एक तस्वीर दिखाते हैं, 13 मई 2020 की बात है कटिहार स्टेशन पर पहुंची एक विशेष ट्रेन से उतरे प्रवासियों के बीच बिस्कुट पैकेट को लेकर छीनाझपटी हुई। दरअसल, मजदूरों को लेकर चले स्पेशल ट्रेन कटिहार जंक्शन पर रूकी तो रेल प्रशासन ने बिस्कुट के पैकेट देने का इंतजाम किया। पूरे रास्ते भूखे मजदूरों को ये पैकेट दिखे तो वे एक साथ इसपर टूट पड़े। भूख ये सबका आखिरी अभ्यरणी होता है। ये सबसे बड़ी शर्त होती है। ये सबसे बड़ी छूट होती है। मानवीय गरिमा बनी रहे इसके लिए जरूरी है कि इसका समाधान होता रहे। वन नेशन वन राशन कार्ड यानी की अगर आपके पास राशन कार्ड है तो आप देश में कहीं भी उचित मूल्य की दुकान से राशन ले सकते हैं। प्रवास में रह रहे मजदूरों को जो दिक्कते लॉकडाउ के दौरान आई वो हम सबने देखी। वन नेशन वन राशन कार्ड के दुरुस्त काम करने से ये दिक्कते नहीं आएंगी। महामारी की दूसरी लहर में प्रवासी मजदूरों को लेकर समाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाते हुए मांग की थी कि अदालत मजदूरों को लेकर कल्याण के लिए कदम उठाने को लेकर केंद्र को आदेश दे। इस याचिका पर 11 जून को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 30 जून 2021 को इस पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस अशोक भूषण औऱ जस्टिस एमआर शाह की खंडपीठ ने कहा कि जब असंगठित क्षेत्र के मजदूर जब पंजीयन के साथ-साथ केंद्र और राज्य द्वारा चलाई जा रही गई योजना से मिलने वाले फायदे के इंतजार में है केंद्रीय श्रम मंत्रालय उदासीनता और ढुलमुल रवैया दिखा रहा है। सख्त टिप्पणियों के साथ ही अदालत ने दूरगामी असर वाले आदेश भी दिए। अब सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों को 31 जुलाई तक वन नेशन वन राशन कार्ड योजना को लागू करना होगा। 

क्या है वन नेशन वन राशन कार्ड

जैसा कि नाम से ही जाहिर है एक ही राशन कार्ड पर देश के किसी भी हिस्से में राशन लिया जा सकता है। ONORC योजना का उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत देश में कहीं भी किसी भी उचित मूल्य की दुकान से रियायती राशन खरीदने में सक्षम बनाना है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का एक प्रवासी श्रमिक मुंबई में पीडीएस लाभ प्राप्त करने में सक्षम होगा, जहां वह काम की तलाश में गया होगा। अब राशन कार्ड को पोर्टेबल बना दिया गया है। पहले कि अवस्था में पात्र व्यक्ति केवल अपने ही इलाके की राशन दुकान से जहां पर उसका राशन कार्ड बना है जो अमूमन उसका स्थायी पता होता है। वहीं से राशन ले पाता था। इससे प्रवासी मजदूरों को बहुत तकलीफ होती थी क्योंकि वो अपने स्थायी पते से दूर काम करते हुए इसका लाभ नहीं ले पाते थे। वन नेशन वन राशन कार्ड का संबंध केवल मजदूरों के कल्याण से ही नहीं है। एक देश एक राशन कार्ड को देश के 17 राज्यों में लागू कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा इन सभी राज्य जिन्होंने एक देश एक राशन कार्ड लागू किया है उन्हें 37600(जीडीपी का अतिरिक्त 2%) करोड़ रुपए तक की अतिरिक्त उधार लेने की अनुमति दी जाएगी। 

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वन नेशन वन राशन कार्ड से किन्हें मिलेगा लाभ

मजदूर 

दैनिक भत्ता लेने वाले श्रमिक

कूड़ा हटाने वाले

सड़क पर रहने वाले 

संगठित और असंगठित क्षेत्रों में रहने वाले अस्थायी कामगार

घरेलू श्रमिक

कैसे करता है काम ? 

इस योजना के अंतर्गत यह राशन आपके मोबाइल नंबर की तरह ही काम करेगा। जैसे की आपको देश के किसी भी कोने में जाकर अपना मोबाइल नंबर नहीं बदलना पड़ता है वह हर जगह काम करते है उसी प्रकार वन नेशन वन राशन कार्ड का उपयोग भी आप किसी भी राज्य में इस्तेमाल कर सकते है। वन नेशन वन राशन कार्ड तकनीक पर आधारित है जिसमें लाभार्थियों के राशन कार्ड, आधार संख्या और इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ़ सेल (ePoS) का विवरण शामिल है। यह प्रणाली उचित मूल्य की दुकानों पर ईपीओएस उपकरणों पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से लाभार्थी की पहचान करती है। सिस्टम दो पोर्टलों के समर्थन से चलता है - सार्वजनिक वितरण प्रणाली का एकीकृत प्रबंधन (IM-PDS) (impds.nic.in) और अन्नवितरण (annavitran.nic.in), जो सभी प्रासंगिक डेटा को होस्ट करता है। अगर कोई राशन कार्ड धारक दूसरे शहर जा रहा है तो वह 'मेरा राशन ऐप' पर खुद रजिस्टर कर के जानकारी दे सकता है। रजिस्ट्रेशन करने बाद उसे वहीं राशन मिल जाएगा. इसके साथ ही प्रवासी लाभार्थियों को इस ऐप के जरिए पता करना आसान होगा कि उनके आसपास पीडीएस के तहत संचालित राशन की कितनी दुकानें हैं। कौन सी दुकान उनके सबसे ज्यादा करीब है। जब कोई राशन कार्ड धारक उचित मूल्य की दुकान पर जाकर ईपीओएस पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से अपनी पहचान करवाता है जो कि पोर्टल पर दर्ज विवरण से मेल खाती हो, राशन कार्ड के विवरण सत्यापित होने के बाद, डीलर लाभार्थी को उपलब्ध करायी गई साम्रगी-सुविधा सुपुर्द कर देगा। 

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इससे कितने लोगों को फायदा होगा?

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत लगभग 81 करोड़ लोग रियायती दर पर खाद्यान्न खरीदने के हकदार हैं- जिसके तहत उचित मूल्य की दिकानों से चावल 3 रुपये प्रति किलो, गेहूं 2 रुपये किलो, और मोटा अनाज 1 रुपये किलो प्राप्त किया जा सकता है। 28 जून 2021 तक देश भर में करीब 5.46 लाख उचित मूल्य की दुकानें और 23.63 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं। प्रत्येक एनएफएसए राशन कार्ड धारक को उस स्थान के पास एक उचित मूल्य की दुकान को सौंपा जाता है जहां उसका राशन कार्ड पंजीकृत हैं। 

इसे लेकर राजनीति भी हुई खूब

वन नेशन वन राशन कार्ड को लेकर दिल्ली से लेकर बंगाल तक में खूब राजनीति देखने को मिली। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा राशन की डोर स्टेप डिलीवरी शुरू करने का प्लान है लेकिन फाइल एलजी के दफ्तर में अटकी है। केंद्र की तरफ से तर्क दिया गया कि नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट राशन की डोर स्टेप डिलीवरी की इजाजत नहीं देता। दिल्ली सरकार वन नेशन वन राशन कार्ड को ही लागू कर दे। जब इस मामले का अदालत में जिक्र हुआ तो केंद्र के वकील तुषार मेहता ने कहा था कि दिल्ली उन चार राज्यों में से एक है जहां वन नेशन वन राशन कार्ड लागू नहीं है। तब दिल्ली सरकार के वकील चिराग श्राफ ने अदालत से कहा था कि ये गलत है दिल्ली में योजना चल रही है। इसके साथ ही दिल्ली की केजरीवाल सरकार डोर स्टेप राशन डिलीवरी के लिए हर स्तर पर कैंपेन चला रही थी और पत्रकार वार्ता के जरिए दिल्ली के लोगों को राशन पहुंचाने में बाधक के रूप में केंद्र सरकार को प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही थी। दिल्ली के अलावा और तीन राज्य पश्चिम बंगाल, असम और छत्तीसगढ़ में भी वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लागू नहीं है। अदालत के आदेश के बाद इन राज्यों को भी 31 जुलाई तक अपने यहां वन नेशन वन राशन कार्ड लागू करना होगा। -अभिनय आकाश