नेपाल में उठ रही राजतंत्र की मांग, साल 2001 जब चलीं धड़ाधड़ गोलियां और खत्म हो गया पूरा शाही परिवार

  •  अभिनय आकाश
  •  दिसंबर 8, 2020   16:21
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नेपाल में उठ रही राजतंत्र की मांग, साल 2001 जब चलीं धड़ाधड़ गोलियां और खत्म हो गया पूरा  शाही परिवार

नेपाल के कई शहरों में प्रजातंत्र को खत्म करने की मांग लिए युवा सड़कों पर उतरे हैं। राजतंत्र की फिर से बहाली और हिंदू राज की पुर्नस्थापना की मांग लोगों द्वारा किया जा रहा है।

दिसंबर के महीने में देश की संसद पर हमला। साल के शुरुआत में गुजरात के भुज में भूकंप आता है। बहुत बड़ी बर्बादी होती है। गुजरात के भूंकप से लोग उबरे नहीं थे कि नेपाल से एक बड़ी खबर आती है। पूरे राजशाही परिवार के लोगों के एक साथ हुए कत्लेआम की। इस कत्लेआम की कहानी के बहुत सारे रहस्य आज भी जिंदा हैं। नेपाल के लोग आज भी इस मामले को यकीन नहीं करते हैं। लेकिन वर्तमान दौर में नेपाल में राजतंत्र की वापसी के लिए आंदोलन हो रहा है। 

नेपाल नरेश बीरेंद्र विक्रम और उनकी पत्नी महारानी ऐश्वर्य इनके दो बेटे और एक बेटी थी। एक बेटा दीपेंद्र और दूसरा निरंजन। वहीं एक बेटी। नेपाल नरेश ने दीपेंद्र को क्राउन प्रिंस बना दिया था। मतलब उनके बाद अगला राजा वही होगा। इसी दौरान क्राउन प्रिंस दीपेंद्र को दिव्यानी नाम की लड़की से इश्क हो जाता है। दिव्यानी जिस परिवार से आती थी उसे महारानी ऐश्वर्य पसंद नहीं करती थी और वो चाहती थी कि दीपेंद्र शाही परिवार के ही एक रिश्तेदार सुप्रिया शाह से शादी करे। इसको लेकर मां-बेटे में काफी बहस चली। ऐश्वर्य ने फिर इनकार करते हुए कहा कि उसके लिए दुल्हन उन्होंने चुन ली थी। इस बार प्रिंस दीपेंद्र नाराज़ हो गए और यह कहकर वहां से निकल गए कि वो शादी दिव्यानी से ही करेंगे। इसी दौरान दीपेंद्र ने नेपाल के सुरक्षा विभाग के लिए हथियारों और अन्य उपकरणों की डील का एक प्रस्ताव रखा और अपना सुझाव भी दिया। लेकिन प्रिंस दीपेंद्र के इस प्रस्ताव से उनके पिता और नेपाल नरेश ने किनारा करते हुए अपने फैसले को वरीयता दी। वहीं दूसरी तरफ दीपेंद्र की शादी को लेकर परिवार में लगातार मतभेदों का दौर जारी थी।

जहां एक तरफ दीपेंद्र ने दिव्यानी से ही शादी करने की बात पर अड़े थे वहीं उनकी मां ऐश्वर्य को यह नागवार था और जिसके पीछे उनकी दलील थी कि दिव्यानी जिस सिंधिया खानदान से आती हैं वो पेशवाओं की नौकरी किया करते थे और उनका शाही खानदार से कोई मुकाबला नहीं है। साल 2001 के जून के महीने की पहली तारीख। राजमहल में परिवारिक डिनर का आयोजन किया गया था। शाम ढलते ही दीपेंद्र ने नशा करना आरंभ कर दिया था और रात होते-होते महल का माहौल एकदम से बदल गया जब दीपेंद्र ने हाथों में बंदूक लिए गुस्से में अपने परिवार के लोगों को गोलियों का निशाना बनाने लगा। एक-एक कर राजकुमार दीपेंद्र ने अपने पिता राजा बीरेंद्र, मां ऐश्वर्य समेत नौ लोगों की हत्या कर दी और फिर खुद को भी गोली मार ली। 

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इस सनसीखेज हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। नेपाल की राजधानी काठमांडू के बादमती तट पर चंदन की लकड़ियों में राजा बीरेंद्र वीर विक्रम शाहदेव की चिता सजी थी। इसके साथ ही रानी ऐश्वर्य, राजकुमारी श्रुति, राजकुमार निरंजन और शाही परिवार के अन्य सदस्यों के शव थे। पूरा नेपाल रो रहा था साथ ही नारे लग रहे थे 'हाम्रौ राजा हाम्रो देख प्राण से भन्दा प्यारा छ' यानी की हमारे राजा और हमारा देश हमें जान से भी ज्यादा प्रिय है। 

नेपाल में नरेश को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। राजा बीरेंद्र की हत्या के बाद उनके भाई ज्ञानेंद्र को राजा घोषित किया जाता है। इस दौर में नेपाल नए राजा के अधीन तो रहा लेकिन अपने पूर्वजों और भाई बीरेंद्र जैसी लोकप्रियता ज्ञानेंद्र हासिल नहीं कर पाए। बाद में लोकतंत्र की मांग नेपाल में जोर पकड़ने लगी। वहीं माओवादियों का विद्रोह आंदोलन भी तेज हो गया। साल 2008 में मई के महीने में नेपाल में प्रजातंत्र की घोषणा हुई। जिसके साथ ही दो सौ सालों की राजशाही का भी अंत हो गया। कभी हिन्दू राष्ट्र कहा जाने वाले नेपाल धर्मनिरपेक्ष हो गया। लेकिन इसके बाद का दौर कुछ खास नहीं रहा। राजनीतिक अस्थिरता से गुजरते नेपाल ने इस दौरान पिछले 12 वर्षों में 11 सरकारें देखी। 

एक बार फिर उठी प्रजातंत्र की मांग

नेपाल के कई शहरों में प्रजातंत्र को खत्म करने की मांग लिए युवा सड़कों पर उतरे हैं। राजतंत्र की फिर से बहाली और हिंदू राज की पुर्नस्थापना की मांग लोगों द्वारा किया जा रहा है। काठमांडू में नेशनल सिविल मूवमेंट के बैनर तले हुए प्रदर्शन के बीच नेपाली संसद प्रतिनिधि सभा के सदस्य और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेता राजेंद्र लिंगदेन ने कहा है कि नेपाल के लोग अब राजशाही और हिंदू राष्ट्र की वापसी चाहते हैं। राजशाही समर्थकों को राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी, राष्ट्रीय शक्ति नेपाल, नेशनल सिविल मूवमेंट, वीर गोरखाली अभियान और करीब आधा दर्जन दूसरे संगठनों का समर्थन मिल रहा है। नेपाल में राजतंत्र की वापसी के लिए आंदोलन कर रही पार्टी का कहना है कि हम सर्वधर्म सम्भाव के साथ नेपाल को सनातन हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। साथ ही नेपाल को सिर्फ स्थानीय सरकार और केंद्र सरकार की जरूरत है। गौरतलब है कि नेपाल में साल 2015 में नया संविधान आया। जिसके बाद नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के केपी शर्मा ओली प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज हुए। साल 2017 में कम्युनिस्ट पार्टी की फिर से सरकार बनी। 

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी में लगातार उथल-पुथल चल रही  है और जब देश में सत्ता और विपक्ष दोनों असफल होते दिखने लगे हों, तब कुछ समूह तीसरी धारा बनाने की कोशिश करते हैं। नेपाल में 2015 के संविधान को भंग कर राजतंत्र की बहाली की मांग की जा रही है। ऐसे में क्या इसे ओली सरकार के प्रति निराशा और नाराजगी कहा जाए या फिर बदलाव की बयार। लेकिन इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि जिस राजशाही और राजा की खातिर नेपाल प्रदर्शन से दो-चार हो रहा है, वे आखिर हैं कहां? जी, हां हम बात कर रहे हैं 1769 से चली आ रही राजशाही के आखिरी राजा ज्ञानेंद्र की। साल 2008 में राज-तंत्र खत्म कर दिया गया और 28 मई को देश को फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक घोषित कर दिया गया। इसके तुरंत बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को राजमहल खाली करने को कहा गया। बदले में कुछ समय के लिए वे नागार्जुन पैलेस में रहे। इस पैलेस में पहले राजपरिवार गर्मी की छुट्टियां बिताने आया करता था। अब यहीं पर वे स्थाई तौर पर रहने लगे हैं। - अभिनय आकाश







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