ओडिशा में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,470 नए मामले, 12 और मरीजों की मौत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 31, 2020   13:08
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ओडिशा में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,470 नए मामले,  12 और मरीजों की मौत
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स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सभी 30 जिलों में सामने आए संक्रमण के नए मामलों में से 853, विभिन्न पृथक-वास केंद्रों के थे और बाकी स्थानीय तौर पर संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के थे।

भुवनेश्वर। ओडिशा में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,470 नए मामले सामने आए और कोविड-19 से 12 और मरीजों की मौत हो गई। इसके साथ ही संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 2,90,116 हो गई और मृतकों की संख्या 1,320 पर पहुंच गई। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सभी 30 जिलों में सामने आए संक्रमण के नए मामलों में से 853, विभिन्न पृथक-वास केंद्रों के थे और बाकी स्थानीय तौर पर संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों के थे।

अधिकारी ने बताया कि खुर्दा जिले में सर्वाधिक 170 मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि कटक में 126 और सुंदरगढ़ में 112 नए मामले सामने आए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ट्वीट किया, “अस्पताल में भर्ती कोविड-19 के 12 मरीजों की दुखद मौत हो गई है।” ओडिशा में अभी कोविड-19 के 14,905 मरीज उपचाराधीन हैं और अब तक 2,73,838 मरीज ठीक हो चुके हैं। अधिकारी ने बताया कि राज्य में संक्रमण की दर 6.37 प्रतिशत है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


डीजीपी ने लंबित विभागीय जाचों को अगले 45 दिन में निपटाने के दिए निर्देश

  •  दिनेश शुक्ल
  •  दिसंबर 1, 2020   22:07
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डीजीपी ने लंबित विभागीय जाचों को अगले 45 दिन में निपटाने के दिए निर्देश
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उल्लेखनीय है कि समीक्षा में पाया गया कि एक अक्टूतबर की स्थिति में पुलिस विभाग में 1256 विभागीय जाँच लंबित है, जिनमें से 584 विभागीय जाँच एक वर्ष से अधिक की अवधि से लंबित हैं। इन विभागीय जाँचों का शीघ्रता से निराकरण किया जाना विभाग की दक्षता बनाये रखने के लिए आवश्यक है।

भोपाल। मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने समस्त विशेष पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त  पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक तथा पुलिस इकाईयों को आदेशित किया है कि एक वर्ष से अधिक समय से लंबित विभागीय जांच प्रकरणों का निपटारा अगले 45 दिन में सुनिश्चित करें। इसके बाद भी प्रकरण लंबित रहे तो संबंधित जांचकर्ता अधिकारी/प्रस्तुतकर्ता अधिकारी का स्पष्टीकरण लिया जाकर उनके विरूद्ध जोन महानिरीक्षक कार्यवाही सुनिश्चित करें।

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उल्लेखनीय है कि समीक्षा में पाया गया कि एक अक्टूबर की स्थिति में पुलिस विभाग में 1256 विभागीय जाँच लंबित है, जिनमें से 584 विभागीय जाँच एक वर्ष से अधिक की अवधि से लंबित हैं। इन विभागीय जाँचों का शीघ्रता से निराकरण किया जाना विभाग की दक्षता बनाये रखने के लिए आवश्यक है। प्रथम चरण में एक नवंबर 2020 की स्थिति में एक वर्ष से अधिक अवधि से लंबित विभागीय जाँचों को आगामी 45 दिवस के अंदर निपटाने के लिए जारी आदेश अनुसार विभागीय जाँच में सम्मिलित पुलिस शासकीय सेवक यदि अन्य जिले/इकाई में स्थानांतरण पर या अन्य कारणों से पदस्थ हैं, तो इकाई प्रमुख ऐसे पुलिस शासकीय सेवक को विभागीय जाँचकर्ता कार्यालय के लिये तुरंत रवानगी देगें। इसकी सूचना पुलिस मुख्यालय को आवश्यक रूप से दी जाएगी। साथ ही राजपत्रित अपचारी अधिकारियों के रवानगी आदेश/रो. सा. की प्रति ईमेल [email protected] पर एवं अराजपत्रित अपचारी अधिकारी/कर्मचारियों के रवानगी आदेश/रो.सा. की प्रति ईमेल [email protected] पर प्रेषित की जाएगी।

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अपचारी शासकीय सेवक को रवानगी मिलने के बाद 24 घण्टे में विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी के कार्यालय में आमद देनी होगी। विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी ऐसे अधिकारी के आमद होते ही उपरोक्त ईमेल पर सूचना देगें। जाँचकर्ता अधिकारी प्राथमिकता से 30 दिवस में उक्त विभागीय जाँच को पूर्ण करेंगे। आवश्यकता अनुसार प्रस्तुतकर्ता अधिकारी विभागीय जाँच में दैनन्दिन कार्यवाही पूर्ण कराना सुनिश्चित करेंगे। आमद आए अपचारी अधिकारी/कर्मचारियों को सामान्यतः अवकाश पर नहीं छोड़ा जाएगा। आपातकालीन परिस्थिति में विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी ही संबधित इकाई प्रमुख से चर्चा कर आकस्मिक अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे। अपचारी अधिकारी अपनी मूल इकाई के किसी न्यायालयीन प्रकरण में यदि ओआईसी नियुक्त हैं, तो वे विभागीय जांच कार्यवाही के साथ-साथ उक्त प्रकरण से संबंधित अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

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अपचारी शासकीय सेवक विभागीय जाँच प्रकिया में असहयोग करता है तो विभागीय जाँचकर्ता अधिकारी मध्य प्रदेश सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम 1966) में दी गई शक्तियों का उपयोग करेगा एवं अनावश्यक मार्गदर्शन की प्रत्याशा में विभागीय जाँच को लंबित नही रखेगा। किसी विभागीय जाँच में न्यायालय से कोई स्थगन आदि है, तो उन सभी आदेशों का इकाई प्रमुख द्वारा अध्ययन करने एवं स्थगन आदेश शीघ्र वैकेट कराने तथा न्यायालय में शीघ्र सुनवाई कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए गए हैं।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


कर्नाटक में कोरोना के 1,330 नये मामले, 14 मरीजों की मौत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   22:02
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राज्य में अब तक 8,50,707 लोग इस संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। विभाग के अनुसार, राज्य में अभी 23,709 मरीजों का इलाज चल रहा है। उनमें से 336 ‘आईसीयू’ में हैं। बेंगलुरु शहर में मंगलवार को संक्रमण के 758 नये मामले सामने आये।

बेंगलुरु। कर्नाटक में मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1,330 नए मामले सामने आये तथा 14 मरीजों की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 8,86,227 तक पहुंच गई, जबकि मृतकों की संख्या 11,792 हो गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, आज 886 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। 

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राज्य में अब तक 8,50,707 लोग इस संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। विभाग के अनुसार, राज्य में अभी 23,709 मरीजों का इलाज चल रहा है। उनमें से 336 ‘आईसीयू’ में हैं। बेंगलुरु शहर में मंगलवार को संक्रमण के 758 नये मामले सामने आये।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


संविधान दिवस के उपलक्ष्य में अनुसूचित जाति मोर्चा का बुद्धिजीवी सम्मेलन संपन्न

  •  दिनेश शुक्ल
  •  दिसंबर 1, 2020   21:36
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संविधान दिवस के उपलक्ष्य में अनुसूचित जाति मोर्चा का बुद्धिजीवी सम्मेलन संपन्न
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राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य ने कहा कि हमारे संविधान ने हमें बोलने की स्वतंत्रता दी है परंतु उसकी कुछ सीमाएं भी है। मौलिक अधिकार दिए हैं, तो उनकी भी कुछ मर्यादाएं हैं। संविधान ने बोलने और करने की स्वतंत्रता दी है। लेकिन हमें हमारे मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कर्त्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिए।

भोपाल। जो अपने लिए नहीं करता है, समाज के लिए करता है, उसकी पूजा एक समाज में नहीं बल्कि सभी समाजों के लोग करते हैं। डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती हिन्दुस्तान के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ भी मनाता है। बाबा साहेब अंबेडकर ने जब संविधान का निर्माण किया, तो उसमें सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय, राजनैतिक न्याय, सामाजिक समरसता, सदभाव और बंधुत्व के संबंध में भी प्रावधान किए। यह बात अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य ने मंगलवार को मिंटो हाल में आयोजित अजा मोर्चा के बुद्धिजीवी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।

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सम्मेलन में उपस्थित बुद्धिजीवियों, मोर्चा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य ने कहा कि हमारे संविधान ने हमें बोलने की स्वतंत्रता दी है परंतु उसकी कुछ सीमाएं भी है। मौलिक अधिकार दिए हैं, तो उनकी भी कुछ मर्यादाएं हैं। संविधान ने बोलने और करने की स्वतंत्रता दी है। लेकिन हमें हमारे मौलिक अधिकारों के साथ-साथ कर्त्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिए। आर्य ने कहा कि जब महात्मा गांधी 80 वर्ष पहले लाखों लोगों को साथ लेकर अंहिसा के रास्ते अपनी बात मनवा सकते हैं, तो आज भी अगर किसी के सम्मान के खिलाफ कोई बात होती है तो आप इकट्ठे होकर अपनी बात मनवा सकते है, इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से ही आज यह संभव हुआ है कि कोई भी व्यक्ति पंच से लेकर सांसद तक और चपरासी से लेकर कलेक्टर तक बन सकता है। बुद्धिजीवी सम्मेलन में मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सूरज कैरो ने कहा कि संविधान ने एक तरफ मौलिक अधिकार दिए हैं, तो दूसरी तरफ हमें उसमें दिए गए कर्त्तव्यों का भी निर्वहन करना है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से बाबा अंबेडकर के बताए गए मार्गों पर चलने का आव्हान किया। 





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